
डॉ. नीरज चतुर्वेदी
एनेस्थीसिया (बेहोशी) विशेषज्ञ
एमबीबीएस, डीए
डॉ. नीरज चतुर्वेदी (एमबीबीएस, डीए) डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हमारे बेहोशी (एनेस्थीसिया) विशेषज्ञ हैं और उन्हें 10+ साल का अनुभव है। वे ऑपरेशन से पहले जांच करते हैं, जनरल और स्पाइनल एनेस्थीसिया देते हैं, और हमारे ओटी व आईसीयू में सुरक्षा पर नज़र रखते हैं।
ओपीडी का समय: तय ऑपरेशन से पहले हम आपकी बेहोशी की जांच करवाते हैं
गोपालगंज में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के रूप में डॉ. नीरज चतुर्वेदी (एमबीबीएस, डीए) हमारे डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में ऑपरेशन के दौरान मरीज़ की सुरक्षा संभालते हैं, और उन्हें 10+ साल का अनुभव है। एनेस्थीसिया (बेहोशी) वह इलाज है जिसमें ऑपरेशन के समय मरीज़ को सुला दिया जाता है या शरीर का एक हिस्सा सुन्न कर दिया जाता है। तय ऑपरेशन से पहले वे बेहोशी से पहले की जांच (प्री-एनेस्थीसिया चेक-अप) करते हैं: आपकी सेहत, दवाइयां, खून की जांच और ईसीजी देखकर तय करते हैं कि आपके लिए कौन सी बेहोशी सबसे सुरक्षित है। ऑपरेशन के हिसाब से यह पूरी बेहोशी (जनरल एनेस्थीसिया) हो सकती है, या कमर से नीचे के ऑपरेशन के लिए स्पाइनल एनेस्थीसिया। ज़रूरत हो तो वे एंडोस्कोपी के लिए हल्की बेहोशी देते हैं, ऑपरेशन के बाद दर्द से राहत की योजना बनाते हैं और हमारे ओटी व आईसीयू में मरीज़ पर नज़र रखते हैं। गोपालगंज, सीवान, छपरा, चंपारण और उत्तर प्रदेश से हमारे पास ऑपरेशन के लिए आने वाले मरीज़ ऑपरेशन से पहले उनसे मिलते हैं। बेहोशी के बारे में सवाल हो तो कृपया +91 72739 94786 पर कॉल करें।
डॉ. नीरज चतुर्वेदी हमारे डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में एनेस्थीसिया (बेहोशी) विशेषज्ञ हैं। उनके पास एमबीबीएस और डिप्लोमा इन एनेस्थीसिया (डीए) की डिग्री है, और उन्हें 10 साल से ज़्यादा का अनुभव है। एनेस्थीसिया वह इलाज है जिसमें ऑपरेशन के समय मरीज़ को सुला दिया जाता है या शरीर का एक हिस्सा सुन्न कर दिया जाता है, ताकि ऑपरेशन आराम से और सुरक्षित तरीके से हो सके।
आपके ऑपरेशन में उनकी भूमिका
- बेहोशी से पहले की जांच (प्री-एनेस्थीसिया चेक-अप): तय ऑपरेशन से पहले वे आपकी सेहत, दवाइयां, खून की जांच और ईसीजी देखते हैं, और तय करते हैं कि आपके लिए कौन सी बेहोशी सबसे सुरक्षित है।
- जनरल और स्पाइनल एनेस्थीसिया: जनरल एनेस्थीसिया में आप पूरी तरह सो जाते हैं। स्पाइनल एनेस्थीसिया में कमर से नीचे का हिस्सा सुन्न होता है और आप जागते रहते हैं।
- एंडोस्कोपी के लिए हल्की बेहोशी (सिडेशन): ज़रूरत होने पर हल्की दवा, ताकि जांच के दौरान आप शांत रहें।
- ऑपरेशन के बाद दर्द से राहत: दवाइयों की सही योजना, ताकि आप आराम कर सकें और जल्दी उठकर चल-फिर सकें।
- सुरक्षा की निगरानी: हमारे ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू में धड़कन, बीपी, ऑक्सीजन और सांस पर लगातार नज़र।
आप कैसे मदद कर सकते हैं
अगर आपको शुगर, बीपी, दिल या फेफड़ों की बीमारी है, या आप खून पतला करने की दवा लेते हैं, तो कृपया जांच के समय उन्हें ज़रूर बताएं। अपनी सभी दवाइयां और पुरानी रिपोर्ट साथ लाएं। खाली पेट रहने के जो निर्देश हम दें, उनका पूरा पालन करें, क्योंकि खाली पेट से बेहोशी ज़्यादा सुरक्षित रहती है।
- एमबीबीएस, डिप्लोमा इन एनेस्थीसिया (डीए)
- 10+ साल का अनुभव
- तय ऑपरेशन से पहले बेहोशी की जांच (प्री-एनेस्थीसिया चेक-अप)
- जनरल और स्पाइनल एनेस्थीसिया, और एंडोस्कोपी के लिए हल्की बेहोशी
- ऑपरेशन के बाद दर्द से राहत की योजना
- हमारे ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू में सुरक्षा की निगरानी
विशेषज्ञता
करियर और प्रशिक्षण
- एमबीबीएस, डिप्लोमा इन एनेस्थीसिया (डीए)
- एनेस्थीसिया विशेषज्ञ
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज
वर्तमान
सुरक्षा सबसे पहले
हमारे अस्पताल में बेहोशी की पूरी देखभाल सुरक्षा पर टिकी है। हर तय ऑपरेशन से पहले बेहोशी की जांच होती है, मरीज़ की सेहत और ऑपरेशन के हिसाब से हम बेहोशी का तरीका चुनते हैं, और ऑपरेशन थिएटर से लेकर रिकवरी बेड तक, और ज़रूरत हो तो आईसीयू में भी, लगातार निगरानी रखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बुज़ुर्ग मरीज़ों के लिए बेहोशी सुरक्षित है?
ज़्यादातर बुज़ुर्ग मरीज़ों के लिए, सही योजना के साथ दी गई बेहोशी आम तौर पर सुरक्षित रहती है। खतरा केवल उम्र पर नहीं, बल्कि पूरी सेहत पर ज़्यादा निर्भर करता है। ऑपरेशन से पहले डॉ. चतुर्वेदी दिल, फेफड़े, शुगर और बीपी की जांच देखते हैं और ज़रूरत हो तो ईसीजी जैसी जांच करवाते हैं। ज़रूरत पड़ने पर हमारे अस्पताल में ही हमारे हृदय रोग विशेषज्ञ हार्ट फिटनेस जांच करते हैं। अपनी हर बीमारी और दवा के बारे में कृपया हमारी टीम को ज़रूर बताएं।
ऑपरेशन से पहले खाली पेट क्यों रहना पड़ता है?
बेहोशी के दौरान पेट में मौजूद खाना या पानी ऊपर आकर फेफड़ों में जा सकता है, जिससे सीने में गंभीर इन्फेक्शन हो सकता है। खाली पेट रहने से यह खतरा कम होता है। आम तौर पर हम ऑपरेशन से लगभग 6 से 8 घंटे पहले तक कुछ न खाने को कहते हैं, लेकिन पानी और रोज़ की दवाइयों समेत, हमारी टीम जो सही निर्देश दे, कृपया उसी का पालन करें।
क्या ऑपरेशन से पहले अपनी रोज़ की दवाइयां लेते रहें?
कोई भी दवा अपने मन से बंद न करें और न ही बदलें। खून पतला करने की दवा और शुगर की कुछ दवाइयों को ऑपरेशन से पहले रोकना या बदलना पड़ सकता है, जबकि बीपी की कई दवाइयां आम तौर पर चलती रहती हैं। कृपया अपनी सारी दवाइयां और पर्चे बेहोशी की जांच के समय साथ लाएं, डॉ. चतुर्वेदी आपको साफ़ बताएंगे कि कौन सी दवा कब लेनी है।
बेहोशी से पहले की जांच (प्री-एनेस्थीसिया चेक-अप) में डॉ. नीरज चतुर्वेदी क्या देखते हैं?
वे आपकी बीमारियों, एलर्जी, पुराने ऑपरेशन और पहले कभी बेहोशी में हुई किसी दिक्कत के बारे में पूछते हैं, और आपकी दवाइयां देखते हैं। वे बीपी, दिल, फेफड़े और शुगर की जांच करते हैं, खून की रिपोर्ट और ईसीजी देखते हैं, और ऑपरेशन के दौरान सांस सुरक्षित रखने की योजना के लिए मुंह और गर्दन भी देख सकते हैं। फिर वे बेहोशी का तरीका, खाली पेट रहने का समय और कौन सी दवा लेनी है, यह समझाते हैं। ज़रूरत हो तो हमारे हृदय रोग विशेषज्ञ से हार्ट फिटनेस जांच करवाते हैं।
गोपालगंज में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ऑपरेशन में पूरी बेहोशी देंगे या स्पाइनल एनेस्थीसिया?
यह ऑपरेशन और आपकी सेहत पर निर्भर करता है। हमारे अस्पताल में पेट के दूरबीन वाले ऑपरेशन, जैसे पित्त की थैली निकालना, आम तौर पर जनरल एनेस्थीसिया में होते हैं, जिसमें आप पूरी तरह सो जाते हैं। कमर से नीचे के कई ऑपरेशन, जैसे कुछ हर्निया, हाइड्रोसील या बवासीर के ऑपरेशन, स्पाइनल एनेस्थीसिया में हो सकते हैं, जिसमें शरीर का निचला हिस्सा सुन्न रहता है और आप जागते रहते हैं। ऑपरेशन से पहले डॉ. चतुर्वेदी आपको यह फ़ैसला समझाते हैं।
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ कौन हैं?
डॉ. नीरज चतुर्वेदी (एमबीबीएस, डीए) हमारे डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ हैं, और उन्हें 10+ साल का अनुभव है। वे बेहोशी से पहले की जांच करते हैं, जनरल और स्पाइनल एनेस्थीसिया और एंडोस्कोपी के लिए हल्की बेहोशी देते हैं, और हमारे ओटी व आईसीयू में मरीज़ पर नज़र रखते हैं। हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर के पास भी डिप्लोमा इन एनेस्थीसिया है, जिससे हमारी टीम का ध्यान सुरक्षा पर और मज़बूत रहता है।