डॉक्टर और अस्पताल के कागज़ों में अक्सर ऐसे शब्द होते हैं जो समझ में नहीं आते। डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में सुनाई देने वाले आम शब्दों का मतलब हमने आसान हिंदी और अंग्रेज़ी में समझाया है। जिस इलाज का पूरा पेज हमारे पास है, उसका लिंक भी दिया गया है।
यह सूची सिर्फ़ जानकारी के लिए है। अपने इलाज की कोई बात समझ न आए तो कृपया डॉक्टर से पूछें या +91 72739 94786 पर हमें कॉल करें।
- अपेंडेक्टॉमी (अपेंडिक्स का ऑपरेशन) (Appendectomy)
- बड़ी आंत से जुड़ी उंगली जैसी छोटी नली, अपेंडिक्स, को निकालने का ऑपरेशन। यह तब किया जाता है जब अपेंडिक्स में सूजन हो (अपेंडिसाइटिस)। इसमें दर्द अक्सर नाभि के पास शुरू होकर पेट के दाहिने निचले हिस्से में चला जाता है। इलाज की पूरी जानकारी
- अल्ट्रासाउंड (यूएसजी) (Ultrasound (USG))
- ध्वनि तरंगों से शरीर के अंदर के अंगों, जैसे पित्त की थैली, किडनी, लिवर, बच्चेदानी और मूत्राशय, की तस्वीर बनाने वाली जांच। इसमें कोई रेडिएशन नहीं होता। पेट के अल्ट्रासाउंड के लिए खाली पेट या भरे मूत्राशय के साथ आने को कहा जा सकता है।
- आईपीडी (भर्ती) (IPD (admission))
- इनपेशेंट डिपार्टमेंट, यानी जब ऑपरेशन, इलाज या निगरानी के लिए आपको वार्ड या कमरे में भर्ती किया जाता है और आप आम तौर पर एक रात या ज़्यादा अस्पताल में रहते हैं।
- आईसीयू (ICU)
- इंटेंसिव केयर यूनिट, यानी खास वार्ड जहां गंभीर मरीज़ों और बड़े ऑपरेशन के बाद कुछ मरीज़ों पर मशीनों और ज़्यादा नर्सिंग देखभाल से लगातार नज़र रखी जाती है। मरीज़ों को इंफ़ेक्शन से बचाने के लिए आम तौर पर मिलने-जुलने पर रोक होती है।
- आयुष्मान कार्ड (Ayushman card)
- यह कार्ड दिखाता है कि व्यक्ति पीएम-जय में इलाज के लिए योग्य है। हमारे पास आते समय कार्ड, आधार कार्ड और आधार से जुड़ा मोबाइल साथ लाएं, क्योंकि ओटीपी की ज़रूरत पड़ सकती है। कार्ड न हो तो हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र पर पूछें।
- आयुष्मान भारत पीएम-जय (Ayushman Bharat PM-JAY)
- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, भारत सरकार की स्वास्थ्य बीमा जैसी योजना। इसमें योग्य परिवारों को सूचीबद्ध अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज के लिए हर साल प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का कवर मिलता है। आपका ऑपरेशन इसमें आता है या नहीं, यह हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पूछें।
- ईको (इकोकार्डियोग्राफ़ी) (ECHO (echocardiography))
- दिल का अल्ट्रासाउंड। इससे पता चलता है कि दिल कितनी अच्छी तरह खून पंप कर रहा है और उसके वाल्व और हिस्से ठीक काम कर रहे हैं या नहीं। इसमें कोई रेडिएशन नहीं होता। इलाज की पूरी जानकारी
- ईसीजी (ECG)
- छाती, हाथ और पैरों पर स्टिकर लगाकर दिल के इलेक्ट्रिकल सिग्नल रिकॉर्ड करने वाली जल्दी होने वाली जांच। इससे धड़कन की गड़बड़ी और हार्ट अटैक के संकेत पता चलते हैं। ज़्यादातर ऑपरेशन से पहले की जांच में यह शामिल होती है। इलाज की पूरी जानकारी
- एंडोस्कोपी (दूरबीन से पेट की जांच) (Upper GI endoscopy)
- मुंह के रास्ते कैमरे वाली पतली, लचीली नली डालकर खाने की नली, पेट और छोटी आंत का शुरुआती हिस्सा देखा जाता है। इससे अल्सर, खून आना या गांठ का पता चलता है, बायोप्सी ली जा सकती है और निगली गई चीज़, जैसे सिक्का, निकाली जा सकती है। जांच के लिए खाली पेट आना होता है। इलाज की पूरी जानकारी
- एफ़एनएसी (सुई से गांठ की जांच) (FNAC)
- पतली सुई गांठ में डालकर कुछ कोशिकाएं निकाली जाती हैं और माइक्रोस्कोप से जांची जाती हैं। यह जल्दी हो जाती है, ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं पड़ती और इससे तय करने में मदद मिलती है कि गांठ का ऑपरेशन चाहिए या नहीं।
- एमआईपीएच (स्टेपलर से बवासीर का ऑपरेशन) (MIPH (stapler surgery for piles))
- एमआईपीएच बवासीर का कम चीर-फाड़ वाला ऑपरेशन है, जिसे स्टेपलर हेमोरॉयडोपेक्सी भी कहते हैं। एक खास गोल स्टेपलर बवासीर को ऊपर उसकी जगह पर खींचता है और उसकी खून की सप्लाई कम करता है, बाहर की त्वचा नहीं काटी जाती। सही मरीज़ों में इसमें आम तौर पर पुराने तरीके के ऑपरेशन से कम दर्द होता है। इलाज की पूरी जानकारी
- ओपीडी (OPD)
- आउटपेशेंट डिपार्टमेंट, जहां बिना भर्ती हुए डॉक्टर से परामर्श, जांच और फ़ॉलो-अप होता है। आम तौर पर आप उसी दिन घर लौट जाते हैं।
- किडनी की पथरी (गुर्दे की पथरी) (Kidney stone)
- पेशाब में मौजूद खनिजों से किडनी के अंदर बनने वाली सख़्त पथरी। छोटी पथरी अपने आप निकल सकती है, पर मूत्रनली में फंसने पर कमर या बगल में तेज़ दर्द, उल्टी या पेशाब में खून आ सकता है। बड़ी पथरी के लिए आम तौर पर पीसीएनएल या यूआरएसएल जैसी प्रक्रिया करनी पड़ती है। इलाज की पूरी जानकारी
- कैथेटर (पेशाब की नली) (Urinary catheter)
- पेशाब के रास्ते से मूत्राशय तक डाली जाने वाली पतली, मुलायम नली, जिससे पेशाब थैली में आता है। ऑपरेशन के दौरान और बाद में कुछ समय के लिए अक्सर लगाई जाती है, और जब आप खुद पेशाब कर सकें तो निकाल दी जाती है।
- कोलेसिस्टेक्टॉमी (पित्त की थैली निकालना) (Cholecystectomy)
- पित्त की थैली निकालने का ऑपरेशन, जो ज़्यादातर पथरी की वजह से किया जाता है। आम तौर पर यह दूरबीन से होता है। पित्त की थैली के बिना इंसान सामान्य जीवन जी सकता है। इलाज की पूरी जानकारी
- कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy)
- मलद्वार के रास्ते कैमरे वाली पतली, लचीली नली डालकर बड़ी आंत की जांच। इससे मल के रास्ते खून आने, लंबे समय से शौच की आदत बदलने, पॉलिप या गांठ का कारण पता चलता है। जांच से पहले दवा से आंत की सफ़ाई करनी होती है। इलाज की पूरी जानकारी
- खतना (सर्कमसीजन) (Circumcision)
- लिंग की आगे की चमड़ी (फोरस्किन) हटाने का ऑपरेशन। फिमोसिस (चमड़ी इतनी टाइट कि पीछे न हो) या बार-बार इंफ़ेक्शन जैसी वजहों से इसकी सलाह दी जाती है, और धार्मिक कारणों से भी यह कराया जाता है। इलाज की पूरी जानकारी
- खाली पेट रहना (एनपीओ) (Fasting (NPO))
- एनपीओ का मतलब है मुंह से कुछ भी नहीं। ऑपरेशन या कुछ जांचों से पहले तय समय तक, आम तौर पर 6 से 8 घंटे, कुछ भी खाना-पीना नहीं होता, ताकि पेट खाली रहे और एनेस्थीसिया ज़्यादा सुरक्षित हो। हमारी टीम जो समय बताए, कृपया उसी का पालन करें।
- जनरल एनेस्थीसिया (पूरी तरह बेहोश करना) (General anaesthesia)
- एनेस्थीसिया विशेषज्ञ दवा देकर आपको गहरी, नियंत्रित नींद में ले जाते हैं ताकि ऑपरेशन के दौरान कुछ महसूस न हो। पूरे समय सांस को सहारा दिया जाता है और धड़कन, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन पर नज़र रखी जाती है। ज़्यादातर दूरबीन वाले ऑपरेशन इसी में होते हैं।
- टांके (Sutures (stitches))
- ऑपरेशन के बाद घाव बंद करने के लिए लगाए गए धागे, क्लिप या स्टेपल। कुछ टांके अपने आप घुल जाते हैं। बाकी डॉक्टर की सलाह के अनुसार फ़ॉलो-अप पर काटे जाते हैं, अक्सर ऑपरेशन के 1 से 2 हफ़्ते बाद।
- टीएमटी (ट्रेडमिल टेस्ट) (TMT (treadmill test))
- ट्रेडमिल पर चलते हुए, जिसकी रफ़्तार और चढ़ाई धीरे-धीरे बढ़ती है, आपका ईसीजी और ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड किया जाता है। इससे पता चलता है कि मेहनत के समय दिल कैसे काम करता है, और दिल की नसों में रुकावट का संकेत मिल सकता है। इलाज की पूरी जानकारी
- टीयूआरपी (TURP)
- बढ़े हुए प्रोस्टेट का ऑपरेशन, जो पेशाब के रास्ते से दूरबीन डालकर किया जाता है, पेट पर कोई चीरा नहीं लगता। प्रोस्टेट का वह हिस्सा निकाला जाता है जो पेशाब का रास्ता रोकता है। ऑपरेशन के बाद आम तौर पर कुछ दिन कैथेटर लगा रहता है। इलाज की पूरी जानकारी
- टीयूआरबीटी (TURBT)
- पेशाब के रास्ते से दूरबीन डालकर मूत्राशय की गांठ निकालने का ऑपरेशन। निकाले गए टिश्यू को हिस्टोपैथोलॉजी जांच के लिए भेजा जाता है, ताकि पता चले कि गांठ किस तरह की है और आगे का इलाज तय हो सके। इलाज की पूरी जानकारी
- डायग्नोस्टिक लेप्रोस्कोपी (जांच के लिए दूरबीन) (Diagnostic laparoscopy)
- जब जांच और स्कैन से बीमारी साफ़ पता न चले, जैसे लंबे समय से पेट दर्द, तब दूरबीन से पेट के अंदर देखकर कारण ढूंढा जाता है। संभव हो तो उसी समय इलाज या बायोप्सी भी की जा सकती है। इलाज की पूरी जानकारी
- डिजिटल एक्स-रे (Digital X-ray)
- थोड़े से रेडिएशन से हड्डियों, छाती या पेट की तस्वीर लेने वाली जल्दी होने वाली जांच। डिजिटल एक्स-रे की तस्वीरें जल्दी तैयार हो जाती हैं और स्क्रीन पर देखी जा सकती हैं। अगर आप गर्भवती हैं या हो सकती हैं, तो स्टाफ़ को ज़रूर बताएं।
- डिस्चार्ज समरी (छुट्टी का पर्चा) (Discharge summary)
- अस्पताल से छुट्टी के समय मिलने वाला कागज़, जिसमें बीमारी, किया गया ऑपरेशन या इलाज, जांच के नतीजे, घर पर ली जाने वाली दवाएं और फ़ॉलो-अप की तारीख लिखी होती है। इसे संभालकर रखें और हर फ़ॉलो-अप पर साथ लाएं।
- डीजे स्टेंट (DJ stent)
- किडनी से मूत्राशय तक मूत्रनली के अंदर डाली जाने वाली पतली, मुलायम नली, जो पेशाब का बहाव बनाए रखती है। यह आम तौर पर पथरी के ऑपरेशन के बाद लगती है और कुछ समय के लिए होती है। डॉक्टर की बताई तारीख पर इसे ज़रूर निकलवाएं या बदलवाएं, क्योंकि ज़्यादा दिन छोड़ने पर इंफ़ेक्शन और रुकावट हो सकती है। इलाज की पूरी जानकारी
- ड्रेन (नली) (Drain)
- ऑपरेशन वाली जगह के पास लगाई जाने वाली पतली नली, जिससे अतिरिक्त पानी या खून एक छोटी थैली में निकलता है। स्टाफ़ निकलने वाली मात्रा देखता है, और मात्रा कम होने पर आम तौर पर कुछ दिनों में ड्रेन निकाल दिया जाता है।
- ड्रेसिंग (पट्टी) (Dressing)
- घाव पर लगाई जाने वाली साफ़, कीटाणुरहित पट्टी, जो उसे गंदगी और इंफ़ेक्शन से बचाती है। इसे सूखा रखें, खुद न खोलें और डॉक्टर के बताए दिन बदलवाएं।
- पाइलोनिडल साइनस (Pilonidal sinus)
- कूल्हों के बीच की दरार के ऊपरी हिस्से में त्वचा के अंदर बनी छोटी नली या थैली, जिसमें अक्सर बाल फंसे होते हैं। इसमें बार-बार इंफ़ेक्शन, दर्द, सूजन और मवाद आ सकता है। इलाज की पूरी जानकारी
- पित्त की थैली में पथरी (Gallstones)
- लिवर के नीचे पित्त जमा करने वाली छोटी थैली में बनने वाली पथरी। इससे पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द हो सकता है, अक्सर तला-भुना खाने के बाद। कभी-कभी इससे इंफ़ेक्शन, पीलिया या पैंक्रियाटाइटिस भी हो जाता है। इलाज की पूरी जानकारी
- पीएसी (ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया जांच) (Pre-anaesthetic check-up (PAC))
- ऑपरेशन से पहले एनेस्थीसिया विशेषज्ञ द्वारा की जाने वाली जांच। वे आपकी सेहत और दवाओं के बारे में पूछते हैं, जांच करते हैं और खून की जांच, ईसीजी और छाती के एक्स-रे जैसी रिपोर्ट देखते हैं, ताकि तय हो कि आप एनेस्थीसिया के लिए फ़िट हैं और कौन सा तरीका सबसे सुरक्षित है।
- पीसीएनएल (PCNL)
- पीसीएनएल बड़ी किडनी पथरी के लिए दूरबीन वाला ऑपरेशन है। कमर पर छोटा सा छेद करके नली और दूरबीन किडनी तक पहुंचाई जाती है, फिर पथरी तोड़कर निकाली जाती है। बाद में कुछ समय के लिए डीजे स्टेंट या छोटी नली लगाई जा सकती है। इलाज की पूरी जानकारी
- प्रोस्टेट बढ़ना (बीपीएच) (Enlarged prostate (BPH))
- बढ़ती उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का बिना कैंसर के बढ़ जाना। इससे पेशाब की धार कमज़ोर होना, रात में बार-बार पेशाब जाना, पेशाब शुरू करने में दिक्कत या पूरा खाली न होने का एहसास हो सकता है। इलाज दवा से या टीयूआरपी जैसे ऑपरेशन से होता है। इलाज की पूरी जानकारी
- फिशर (Anal fissure)
- मलद्वार की अंदरूनी परत में छोटा सा कट, जो अक्सर कड़े मल से होता है। इसमें शौच के समय और बाद में तेज़ जलन और दर्द होता है, कभी थोड़ा खून भी आता है। ज़्यादातर फिशर नरम मल, गुनगुने पानी में बैठने (सिट्ज़ बाथ) और मलहम से भर जाते हैं, पर पुराने फिशर में छोटे ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है। इलाज की पूरी जानकारी
- फोड़ा और आई एंड डी (Abscess and I&D)
- फोड़ा यानी त्वचा के नीचे या शरीर के अंदर मवाद का दर्दनाक जमाव। आई एंड डी (चीरा लगाकर मवाद निकालना) एक छोटी प्रक्रिया है जिसमें फोड़े को खोलकर मवाद निकाला जाता है और घाव भरने तक ड्रेसिंग की जाती है। इलाज की पूरी जानकारी
- बवासीर (पाइल्स) (Haemorrhoids (piles))
- मलद्वार के अंदर या आसपास की नसों का फूल जाना, जिससे शौच के समय लाल खून आना, खुजली या मस्सा बाहर आना हो सकता है। कई मरीज़ खान-पान, पानी और दवा से ठीक हो जाते हैं। बड़े या खून वाले बवासीर में लेज़र या ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है। इलाज की पूरी जानकारी
- बायोप्सी (Biopsy)
- गांठ, घाव या किसी अंग से टिश्यू का छोटा टुकड़ा लेकर माइक्रोस्कोप से जांच करना। कोई गांठ कैंसर है या नहीं, इसकी पुष्टि आम तौर पर बायोप्सी से ही होती है। इलाज की पूरी जानकारी
- भगंदर (फिस्टुला) (Fistula-in-ano)
- मलद्वार के अंदर से बाहर की त्वचा तक बनी एक असामान्य नली, जो अक्सर फोड़े के बाद बनती है। इससे बार-बार मवाद या पानी निकलता है। आम तौर पर यह सिर्फ़ दवा से ठीक नहीं होता, इसलिए ऑपरेशन या लेज़र इलाज की ज़रूरत पड़ती है। इलाज की पूरी जानकारी
- महिला नसबंदी (ट्यूबेक्टॉमी) (Tubectomy (female sterilisation))
- महिलाओं के लिए परिवार नियोजन का स्थायी ऑपरेशन, जिसमें बच्चेदानी की नलियां (फ़ैलोपियन ट्यूब) बंद की जाती हैं ताकि अंडा और शुक्राणु न मिल सकें। आम तौर पर यह दूरबीन से छोटे छेद करके होता है। इसे तभी चुनें जब परिवार पूरा हो चुका हो। इलाज की पूरी जानकारी
- मेश (जाली) (Mesh)
- हर्निया के ऑपरेशन में कमज़ोर जगह पर लगाई जाने वाली कीटाणुरहित, जाली जैसी मेडिकल सामग्री। यह दीवार को मज़बूत करती है और हर्निया के दोबारा होने की संभावना कम करती है। समय के साथ शरीर का टिश्यू इसमें जुड़ जाता है। इलाज की पूरी जानकारी
- यूआरएसएल (URSL (ureteroscopy))
- इसमें पेशाब के रास्ते से पतली दूरबीन मूत्राशय होते हुए मूत्रनली (यूरेटर) तक ले जाई जाती है, जो पेशाब को किडनी से नीचे लाती है। वहां पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़कर निकाला जाता है। त्वचा पर कोई चीरा नहीं लगता। इलाज की पूरी जानकारी
- लाइपोमा (चर्बी की गांठ) (Lipoma)
- त्वचा के नीचे चर्बी की मुलायम, धीरे बढ़ने वाली गांठ। यह लगभग हमेशा हानिरहित होती है। अगर यह बढ़ रही हो, तकलीफ़ दे या मरीज़ चाहे, तो आम तौर पर सुन्न करके छोटे ऑपरेशन से निकाल दी जाती है। इलाज की पूरी जानकारी
- लेज़र इलाज (Laser treatment)
- रोशनी की केंद्रित किरण की ऊर्जा से बीमार टिश्यू को सिकोड़ने, सील करने या बंद करने का तरीका। हमारे हॉस्पिटल में डायोड लेज़र से बवासीर, भगंदर, फिशर, पाइलोनिडल साइनस और वैरिकोज़ वेन्स का इलाज होता है। सही मरीज़ों में आम तौर पर घाव छोटा और दर्द कम होता है, पर लेज़र आपके लिए सही है या नहीं, यह हमारे सर्जन तय करते हैं।
- लेप्रोस्कोपी (दूरबीन से ऑपरेशन) (Laparoscopy)
- पेट पर एक बड़े चीरे की जगह कुछ छोटे छेद करके किया जाने वाला ऑपरेशन। पतली दूरबीन में लगा कैमरा अंदर का हिस्सा स्क्रीन पर दिखाता है और सर्जन लंबे, पतले औज़ारों से ऑपरेशन करते हैं। खुले ऑपरेशन की तुलना में ज़्यादातर मरीज़ों को दर्द कम होता है, निशान छोटे रहते हैं और वे जल्दी काम पर लौटते हैं।
- लैपरोटॉमी (पेट का खुला ऑपरेशन) (Laparotomy)
- पेट पर बड़ा चीरा लगाकर किया जाने वाला खुला ऑपरेशन। यह अक्सर इमरजेंसी में करना पड़ता है, जैसे आंत फटना या आंत फंसना, या तब जब दूरबीन से ऑपरेशन मरीज़ के लिए सुरक्षित न हो। इलाज की पूरी जानकारी
- लोकल एनेस्थीसिया (सिर्फ़ उस जगह को सुन्न करना) (Local anaesthesia)
- इंजेक्शन या जेल जो सिर्फ़ छोटे से हिस्से को सुन्न करता है, ताकि छोटी गांठ निकालना, फोड़ा खोलना या टांके लगाना जैसे छोटे काम आपके पूरी तरह जागते हुए हो सकें।
- वीआईयू (पेशाब की नली सिकुड़ने का इलाज) (VIU (for urethral stricture))
- यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर यानी पेशाब की नली का सिकुड़ जाना, जिससे धार पतली और धीमी हो जाती है। वीआईयू में दूरबीन से अंदर जाकर सिकुड़े हिस्से को काटकर खोला जाता है, त्वचा पर कोई चीरा नहीं लगता। इलाज की पूरी जानकारी
- वैरिकोज़ वेन्स (नसों का फूलना) (Varicose veins)
- पैरों की नसों का फूलकर टेढ़ा-मेढ़ा हो जाना, जो नसों के अंदर के वाल्व कमज़ोर होने से होता है। इससे पैरों में भारीपन, दर्द, खुजली या त्वचा का रंग बदल सकता है। एंडोवीनस लेज़र इलाज में पतले लेज़र फ़ाइबर से खराब नस को अंदर से बंद किया जाता है। इलाज की पूरी जानकारी
- सहमति पत्र (कंसेंट फ़ॉर्म) (Consent form)
- ऑपरेशन या जोखिम वाली जांच से पहले का फ़ॉर्म, जिस पर डॉक्टर के समझाने के बाद आप या आपके माता-पिता या अभिभावक हस्ताक्षर करते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि क्या किया जाएगा, क्यों, मुख्य जोखिम क्या हैं और दूसरे विकल्प क्या हैं। हस्ताक्षर से पहले अपने सारे सवाल पूछ लें।
- सिस्टोस्कोपी (Cystoscopy)
- पेशाब के रास्ते से पतली दूरबीन डालकर मूत्रनली और मूत्राशय के अंदर देखना। इससे पेशाब में खून, रास्ता सिकुड़ने या मूत्राशय में गांठ जैसी समस्याओं का कारण पता चलता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसे सुन्न करके या एनेस्थीसिया देकर किया जाता है। इलाज की पूरी जानकारी
- सीटी स्कैन (CT scan)
- एक्स-रे मशीन कई तस्वीरें लेती है और कंप्यूटर उनसे शरीर की परत-दर-परत बारीक तस्वीर बनाता है। इसमें सामान्य एक्स-रे से ज़्यादा जानकारी मिलती है पर रेडिएशन भी ज़्यादा होता है। कभी-कभी अंग साफ़ दिखाने के लिए पीने या इंजेक्शन से कंट्रास्ट दवा दी जाती है।
- सीबीडी की पथरी और सीबीडी एक्सप्लोरेशन (CBD stones and CBD exploration)
- सीबीडी (कॉमन बाइल डक्ट) वह नली है जो पित्त को लिवर से आंत तक ले जाती है। इसमें पथरी फंसने से पीलिया, बुखार और दर्द हो सकता है। सीबीडी एक्सप्लोरेशन में ऑपरेशन करके इस नली से पथरी निकाली जाती है। इलाज की पूरी जानकारी
- सेडेशन (हल्की नींद की दवा) (Sedation)
- दवा जो आपको शांत और उनींदा कर देती है, पर पूरी तरह बेहोश नहीं करती। एंडोस्कोपी जैसी जांच या छोटी प्रक्रिया में इसका इस्तेमाल होता है। सेडेशन के बाद उस दिन गाड़ी न चलाएं और कोई ज़रूरी फ़ैसला न लें।
- स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर से नीचे सुन्न करना) (Spinal anaesthesia)
- कमर के निचले हिस्से में लगने वाला इंजेक्शन, जो कुछ घंटों के लिए कमर से नीचे का शरीर सुन्न कर देता है। आप जागते रहते हैं या हल्की नींद में रहते हैं, पर ऑपरेशन वाली जगह पर दर्द महसूस नहीं होना चाहिए। निचले पेट, जांघ के जोड़, पैरों, पेशाब के रास्ते और बवासीर के ऑपरेशन में अक्सर इसका इस्तेमाल होता है।
- हर्निया (Hernia)
- जब पेट की दीवार की किसी कमज़ोर जगह से चर्बी या आंत का हिस्सा बाहर की ओर उभर आता है। आम प्रकार हैं: इंगुइनल (जांघ के जोड़ के पास), अम्बिलिकल (नाभि पर), इंसीज़नल (पुराने ऑपरेशन के निशान पर) और एपिगैस्ट्रिक (पेट के ऊपरी हिस्से में)। बड़ों में हर्निया अपने आप ठीक नहीं होता, इसका आम इलाज ऑपरेशन है। इलाज की पूरी जानकारी
- हाइड्रोसील (Hydrocele)
- अंडकोष के चारों ओर पानी भर जाने से अंडकोष की थैली का एक तरफ़ सूज जाना। आम तौर पर इसमें दर्द नहीं होता, पर यह बड़ा होकर परेशानी दे सकता है। हाइड्रोसील के ऑपरेशन में पानी निकालकर थैली का इलाज किया जाता है, ताकि पानी दोबारा भरने की संभावना कम हो। इलाज की पूरी जानकारी
- हिस्टेरेक्टॉमी (बच्चेदानी निकालना) (Hysterectomy)
- बच्चेदानी निकालने का ऑपरेशन। यह दूरबीन से (टीएलएच), पेट पर चीरा लगाकर (टीएएच) या योनि के रास्ते (वीएच) किया जा सकता है। रसौली (फ़ाइब्रॉइड), लगातार ज़्यादा खून आना या बच्चेदानी खिसकने जैसी समस्याओं में, जब दूसरा इलाज सही न हो, तब इसकी सलाह दी जाती है। इलाज की पूरी जानकारी
- हिस्टोपैथोलॉजी (एचपीई) (Histopathology (HPE))
- ऑपरेशन या बायोप्सी में निकाले गए टिश्यू की माइक्रोस्कोप से लैब जांच। इसकी रिपोर्ट से बीमारी पक्की होती है और आगे का इलाज तय होता है। रिपोर्ट आने में कुछ दिन लग सकते हैं, इसे संभालकर रखें और फ़ॉलो-अप पर दिखाएं।
- होल्टर मॉनिटरिंग (Holter monitoring)
- छोटी सी पोर्टेबल ईसीजी मशीन जो रोज़ के कामकाज के दौरान 24 घंटे या ज़्यादा समय तक पहनी जाती है। यह हर धड़कन रिकॉर्ड करती है और बीच-बीच में होने वाली अनियमित धड़कन पकड़ने में मदद करती है, जैसे जिनसे घबराहट या बेहोशी होती है। इलाज की पूरी जानकारी