गोपालगंज में भगंदर का इलाज: फिस्टुला का ऑपरेशन और लेज़र

भगंदर (फिस्टुला) का ऑपरेशन और लेज़र इलाज

भगंदर यानी गुदा के पास बनी सुरंग, जिससे बार-बार मवाद आता है। गोपालगंज में हम इसका इलाज ध्यान से जांच के बाद फिस्टुलोटॉमी, फिस्टुलेक्टॉमी या चुने हुए मामलों में लेज़र से करते हैं, और शौच पर कंट्रोल बचाने पर पूरा ध्यान देते हैं।

गोपालगंज में भगंदर का इलाज हम डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में पूरी देखभाल, गोपनीयता और साफ़ योजना के साथ करते हैं। भगंदर (फिस्टुला) गुदा के पास एक छोटी सुरंग होती है जिससे बार-बार मवाद आता है, और यह सिर्फ़ दवा से शायद ही कभी ठीक होता है। इलाज हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, एमएस (जनरल सर्जरी), की देखरेख में होता है। हमारे यहां फिस्टुलोटॉमी, फिस्टुलेक्टॉमी, सेटन (धागा) और चुने हुए मरीज़ों में हमारी अपनी डायोड लेज़र मशीन से भगंदर का लेज़र ऑपरेशन होता है। गोपालगंज के साथ सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और देवरिया से भी मरीज़ हमारे पास आते हैं। परिवार डॉ. ठाकुर पर उनके 16+ साल के सर्जिकल अनुभव, 10,000+ ऑपरेशन, आईजीआईएमएस पटना और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के अनुभव, और इस बात के लिए भरोसा करते हैं कि वे साफ़ समझाते हैं कि ऑपरेशन में शौच पर कंट्रोल कैसे बचाया जाएगा। कृपया सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 से शाम 7 बजे तक हमारी ओपीडी में आएं, या रिपोर्ट व्हाट्सऐप +91 72739 94786 पर भेजें।

ऑपरेशन का समयआमतौर पर 30 से 60 मिनट
अस्पताल में रुकनाआमतौर पर 1 से 2 दिन

गोपालगंज में भगंदर का इलाज: भगंदर (फिस्टुला) क्या है

भगंदर (फिस्टुला) गुदा के अंदर और पास की चमड़ी के बीच बनी एक पतली सुरंग होती है। यह ज़्यादातर गुदा के पास फोड़े (एनल एब्सेस), यानी मवाद भरी दर्द वाली सूजन से शुरू होता है। फोड़ा फूटने या मवाद निकालने के बाद एक रास्ता बचा रह जाता है, जिससे बार-बार मवाद या खून मिला पानी रिसता रहता है।

भगंदर अपने आप बहुत कम ठीक होता है। सुरंग का एक मुंह गुदा के अंदर खुलता है, इसलिए संक्रमण बार-बार उसमें जाता रहता है। एंटीबायोटिक दवा से कुछ समय सूजन कम हो सकती है, लेकिन सुरंग बंद नहीं होती।

हमारे इलाज का मकसद पूरी सुरंग को साफ़ करना या बंद करना है, और साथ में उन मांसपेशियों (स्फिंक्टर) को बचाना है जिनसे मल और गैस पर कंट्रोल रहता है। भगंदर के प्रकार के हिसाब से हम यह फिस्टुलोटॉमी, फिस्टुलेक्टॉमी, सीटॉन, या चुने हुए मामलों में लेज़र (FiLaC) से करते हैं।

भगंदर (फिस्टुला) का इलाज: डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में 1
भगंदर (फिस्टुला) का इलाज: डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में 2

भगंदर के लक्षण: गुदा के पास से मवाद आना

  • गुदा के पास छोटे मुंह से मवाद, खून मिला या पतला पानी आना, जिससे कपड़े गंदे होते हैं
  • गुदा के पास दर्द वाली सूजन जो फूटकर आराम देती है और फिर से बन जाती है
  • गुदा के आसपास की चमड़ी में खुजली, जलन या दुखन
  • रास्ता बंद होने पर बैठने, चलने या शौच के समय दर्द
  • दोबारा मवाद भरने पर बुखार और कमज़ोरी
  • कुछ मरीज़ों में गुदा के पास एक से ज़्यादा मुंह

क्या भगंदर बिना ऑपरेशन ठीक हो सकता है, और कौन सा ऑपरेशन ज़रूरी है

कृपया शर्म के कारण भगंदर को नज़रअंदाज़ न करें, और गारंटी से ठीक करने का दावा करने वाले नुस्खों में समय न गंवाएं। पुराना भगंदर कई शाखाओं में फैल सकता है। गुदा के पास दर्द वाली सूजन के साथ बुखार हो तो जल्दी सर्जन को दिखाएं, क्योंकि फोड़े से मवाद निकालना ज़रूरी होता है।

हम जांच गोपनीय और हल्के हाथ से करते हैं। शुगर की जांच भी करते हैं, क्योंकि डायबिटीज़ में घाव देर से भरता है। जटिल, गहरे या दोबारा हुए भगंदर में हमारे सर्जन एमआरआई फिस्टुलोग्राम की सलाह दे सकते हैं। यह एक खास एमआरआई जांच है जो सुरंग का नक्शा दिखाती है।

फिस्टुलोटॉमी में सीधी, नीचे की सुरंग को खोलकर अंदर से भरने दिया जाता है। फिस्टुलेक्टॉमी में सुरंग को निकाल दिया जाता है। ऊंचे या जटिल भगंदर का इलाज नरम धागे (सीटॉन) से चरणों में किया जा सकता है। लेज़र से भगंदर बंद करना (FiLaC) में साफ़ की गई सुरंग को लेज़र फाइबर से अंदर से बंद किया जाता है और मांसपेशी नहीं कटती, लेकिन हर भगंदर इससे नहीं भरता, और दोबारा या दूसरे इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है।

भगंदर का इलाज कैसे होता है: ऑपरेशन से लेज़र तक

  1. गोपनीय जांच से सुरंग के मुंह और रास्ते का पता लगाना, साथ में शुगर और ज़रूरी जांचें
  2. जटिल, गहरे या दोबारा हुए भगंदर में एमआरआई फिस्टुलोग्राम
  3. आमतौर पर स्पाइनल एनेस्थीसिया, जैसा हमारे एनेस्थीसिया विशेषज्ञ तय करें
  4. पतले प्रोब से, कभी कभी सुरक्षित रंग (डाई) की मदद से, सुरंग का रास्ता और अंदर का मुंह ढूंढा जाता है
  5. मांसपेशियों को बचाते हुए फिस्टुलोटॉमी (सुरंग खोलना) या फिस्टुलेक्टॉमी (सुरंग निकालना)
  6. ऊंचे या जटिल भगंदर में पहले नरम धागा (सीटॉन) डाला जा सकता है, या चुने हुए मामलों में लेज़र फाइबर (FiLaC) से सुरंग बंद की जाती है
  7. घाव पर पट्टी की जाती है, और ज़रूरत पर निकाला गया टुकड़ा जांच के लिए भेजा जाता है

भगंदर के ऑपरेशन के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है

फिस्टुलोटॉमी या फिस्टुलेक्टॉमी के बाद घाव को आमतौर पर खुला छोड़ा जाता है ताकि वह अंदर से भरे, इससे भगंदर दोबारा होने का खतरा कम होता है। दिन में 2 से 3 बार और हर शौच के बाद गुनगुने पानी में बैठकर सिंकाई करें, और हमारे बताए तरीके से पट्टी बदलें। मल नरम करने और दर्द की दवा सलाह के अनुसार लें, रेशेदार भोजन खाएं और भरपूर पानी पिएं। ज़्यादातर लोग 1 से 2 हफ्ते में हल्का काम शुरू कर देते हैं। खुला घाव अक्सर लगभग 4 से 6 हफ्ते में भरता है, बड़ा घाव इससे ज़्यादा समय लेता है, और लेज़र के बाद घाव छोटे होते हैं। कृपया हर फॉलो-अप पर आएं।

भगंदर के ऑपरेशन के बाद पट्टी, सिंकाई और परहेज

भगंदर का घाव घर पर रोज़ की नियमित देखभाल से सबसे अच्छा भरता है। छुट्टी से पहले हम आपको और परिवार के एक सदस्य को हर कदम सिखाते हैं।

  • सिंकाई और पट्टी: दिन में 2 से 3 बार और हर बार शौच के बाद 10 से 15 मिनट गुनगुने पानी में बैठें, फिर सिखाए गए तरीके से पट्टी बदलें। खुला घाव अंदर से भरता है, जिससे भगंदर दोबारा होने का खतरा घटता है।
  • क्या खाएं: घर का नरम, रेशेदार खाना, जैसे दाल, हरी सब्ज़ी, फल और भरपूर पानी। मल नरम रखने के लिए इसबगोल की सलाह दी जा सकती है।
  • परहेज: पहले कुछ हफ्ते बहुत मिर्च-मसाले वाला और तला खाना, मैदा, शराब और तंबाकू से दूर रहें।
  • शुगर: डायबिटीज़ हो तो शुगर काबू में रखें, क्योंकि ज़्यादा शुगर से घाव देर से भरता है।
  • चलना और काम: पहले दिन से चलें। ज़्यादातर लोग 1 से 2 हफ्ते में हल्का काम शुरू कर देते हैं। घाव भरने तक लंबी बाइक यात्रा से बचें।
  • खतरे के संकेत: बुखार, बढ़ता दर्द या सूजन, ज़्यादा खून, या फिर से मवाद जमा होना। कृपया तुरंत +91 72739 94786 पर कॉल करें।

फायदे

  • बार-बार मवाद और फोड़े की असली वजह का इलाज, जो सिर्फ़ दवा से संभव नहीं
  • मल और गैस पर कंट्रोल बचाने के लिए सोच-समझकर, चरणबद्ध योजना
  • चुने हुए भगंदर में मांसपेशी बचाने वाला लेज़र (FiLaC) विकल्प
  • जटिल सुरंग का नक्शा जानने के लिए ज़रूरत पर एमआरआई फिस्टुलोग्राम
  • अस्पताल में कम रुकना, आमतौर पर 1 से 2 दिन
  • ज़रूरत पर निकाले गए टुकड़े की जांच से टीबी जैसे असामान्य कारणों का पता
संभावित जोखिम:

संभावित जोखिमों में खून आना, संक्रमण, दर्द, घाव देर से भरना और स्पाइनल एनेस्थीसिया के बाद कुछ समय पेशाब रुकना शामिल हैं। कुछ मरीज़ों में भगंदर दोबारा हो सकता है, खासकर जटिल, ऊंचे या बहुत पुराने भगंदर में, और फिर से ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है। जब सुरंग मांसपेशी के बीच से जाती है, तो गैस या मल पर कंट्रोल कम होने का खतरा रहता है। लेज़र में मांसपेशी नहीं कटती, लेकिन इससे भगंदर भरने की संभावना फिस्टुलोटॉमी से कम होती है, इसलिए कुछ मरीज़ों को दोबारा या दूसरे इलाज की ज़रूरत पड़ती है। सुरंग का ध्यान से नक्शा बनाकर और घाव भरने तक फॉलो-अप करके हम इन जोखिमों को कम रखते हैं।

गोपालगंज में भगंदर के ऑपरेशन का खर्च और आयुष्मान कार्ड

भगंदर के ऑपरेशन का खर्च भगंदर की किस्म पर निर्भर करता है, इसलिए हम कोई एक तय रकम नहीं बताते। मुख्य बातें हैं: ऑपरेशन का तरीका (फिस्टुलोटॉमी, फिस्टुलेक्टॉमी, सेटन या लेज़र), जांचें जैसे शुगर और ज़रूरत पर MRI फिस्टुलोग्राम, बेहोशी का तरीका, अस्पताल में रुकने के दिन (आमतौर पर 1 से 2 दिन), कौन सा कमरा लिया, और छुट्टी के बाद की पट्टी और दवाएं। परामर्श और रिपोर्ट के बाद भर्ती से पहले हम आपको साफ़ लिखित अनुमान देते हैं, ताकि परिवार तैयारी कर सके। आप पहले अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप +91 72739 94786 पर भेज सकते हैं।

हमारा अस्पताल आयुष्मान भारत PM-JAY में जनरल सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी पैकेज के लिए सूचीबद्ध है। आपका इलाज और चुना गया तरीका कवर होगा या नहीं, यह योजना की पैकेज सूची और आपकी पात्रता पर निर्भर करता है। कृपया आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड लेकर आएं और भर्ती से पहले हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पुष्टि कर लें।

भगंदर के इलाज के लिए मरीज़ डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर पर क्यों भरोसा करते हैं

फिस्टुलोटॉमी और फिस्टुलेक्टॉमी हमारे यहां नियमित रूप से होने वाले ऑपरेशनों में शामिल हैं, और चुने हुए भगंदर के लिए हमारे पास डायोड लेज़र भी है। आपका इलाज डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर की देखरेख में होता है, जो लेप्रोस्कोपिक, लेज़र, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन हैं। उन्हें 16+ साल का सर्जिकल अनुभव है और वे 10,000+ ऑपरेशन कर चुके हैं। हम इलाज की योजना और दोबारा होने की संभावना ईमानदारी से बताते हैं, और घाव भरने तक आपका साथ देते हैं।

भगंदर के इलाज से जुड़े आम सवाल

क्या सिर्फ़ दवा से भगंदर ठीक हो सकता है?

बहुत कम। एंटीबायोटिक और दर्द की दवा से कुछ समय संक्रमण और सूजन शांत हो सकती है, लेकिन सुरंग खुली रहती है और मवाद आमतौर पर फिर से आने लगता है। ज़्यादातर भगंदर को ठीक होने के लिए ऑपरेशन चाहिए। देर करने से नई शाखाएं और फोड़े बन सकते हैं, जिससे ऑपरेशन मुश्किल हो जाता है। कृपया बार-बार दवा दोहराने या गारंटी वाले नुस्खों के बजाय जल्दी योग्य सर्जन को दिखाएं।

गोपालगंज में भगंदर का इलाज कैसे होता है?

पहले हमारे सर्जन गोपनीय जांच करते हैं, शुगर देखते हैं, और जटिल या बार-बार होने वाले भगंदर में सुरंग का नक्शा देखने के लिए MRI फिस्टुलोग्राम की सलाह दे सकते हैं। स्पाइनल एनेस्थीसिया में पतले प्रोब से सुरंग का रास्ता ढूंढा जाता है। सीधी, नीचे वाली सुरंग को खोला (फिस्टुलोटॉमी) या निकाला (फिस्टुलेक्टॉमी) जाता है। ऊंची या जटिल सुरंग में पहले सेटन (नरम धागा) लगाया जा सकता है, या चुने हुए मरीज़ों में लेज़र से बंद किया जाता है। हर तरीके में हम शौच पर कंट्रोल बचाने का पूरा ध्यान रखते हैं।

क्या भगंदर का इलाज बिना ऑपरेशन, घरेलू उपाय या देसी दवा से हो सकता है?

सच कहें तो बहुत कम। एंटीबायोटिक, दर्द की दवा और सिंकाई से कुछ समय के लिए सूजन और दर्द कम हो जाता है, और ऑपरेशन से पहले ये काम आते हैं। लेकिन इनसे सुरंग बंद नहीं होती, इसलिए मवाद आमतौर पर फिर आने लगता है। कृपया बिना ठीक से जांच किए या बिना मेडिकल डिग्री के चूर्ण या तेल से गारंटी से पक्का इलाज का दावा करने वालों से सावधान रहें। देर करने से सुरंग की नई शाखाएं बन सकती हैं। चुने हुए मरीज़ों में लेज़र से मांसपेशी बचती है, पर वह भी एक प्रक्रिया ही है।

भगंदर का ऑपरेशन कितनी देर का होता है और ठीक होने में कितना समय लगता है?

ऑपरेशन आमतौर पर 30 से 60 मिनट का होता है, और ज़्यादातर मरीज़ हमारे यहां 1 से 2 दिन रुकते हैं। आप उसी दिन चल सकते हैं। ज़्यादातर लोग 1 से 2 हफ्ते में हल्का काम शुरू कर देते हैं। फिस्टुलोटॉमी या फिस्टुलेक्टॉमी के बाद खुला घाव अक्सर 4 से 6 हफ्ते में भरता है, और बड़ा घाव इससे ज़्यादा समय लेता है। लेज़र के बाद घाव छोटा होता है। सिंकाई, सही पट्टी और काबू में शुगर से घाव जल्दी भरता है।

क्या भगंदर का लेज़र ऑपरेशन (FiLaC) सामान्य ऑपरेशन से बेहतर है?

लेज़र सुरंग को अंदर से बंद करता है और मांसपेशी नहीं काटता, इसलिए शौच पर कंट्रोल का खतरा कम होता है और घाव छोटे होते हैं। यह चुने हुए भगंदर में, अक्सर ऊंचे या जटिल भगंदर में, ठीक रहता है। लेकिन इससे हर भगंदर नहीं भरता, और इसकी सफलता फिस्टुलोटॉमी से कम है, इसलिए कुछ मरीज़ों को दोबारा या दूसरे इलाज की ज़रूरत पड़ती है। सीधे, नीचे के भगंदर में अक्सर फिस्टुलोटॉमी ही सबसे भरोसेमंद तरीका रहता है, और आपके लिए क्या ठीक है, यह हमारे सर्जन बताते हैं।

क्या भगंदर के ऑपरेशन से शौच पर कंट्रोल कम हो जाता है?

भगंदर के ऑपरेशन में आपका कंट्रोल बचाना हमारे लिए सबसे ज़रूरी है। सीधे, नीचे के भगंदर में, जो थोड़ी ही मांसपेशी से होकर जाते हैं, खतरा कम होता है। ऊंचे या जटिल भगंदर में हमारे सर्जन एमआरआई फिस्टुलोग्राम जैसी जांच कराते हैं, और एक साथ ज़्यादा मांसपेशी काटने के बजाय सीटॉन या लेज़र (FiLaC) जैसे मांसपेशी बचाने वाले तरीके चुन सकते हैं। आपके भगंदर के हिसाब से योजना और जोखिम हम आपको समझाएंगे।

गोपालगंज में भगंदर के ऑपरेशन का खर्च किन बातों पर निर्भर करता है?

खर्च भगंदर की किस्म और तरीके पर निर्भर करता है: फिस्टुलोटॉमी, फिस्टुलेक्टॉमी, सेटन या लेज़र। इसके अलावा जांचें, जैसे ज़रूरत पर MRI फिस्टुलोग्राम, बेहोशी, अस्पताल में रुकने के दिन, कमरा, पट्टी और दवाएं भी खर्च तय करती हैं। बिना जांच के हम कोई रकम नहीं बताते। परामर्श और रिपोर्ट के बाद भर्ती से पहले हम आपको साफ़ लिखित अनुमान देते हैं। शुरुआत के लिए कृपया रिपोर्ट व्हाट्सऐप +91 72739 94786 पर भेजें।

क्या आयुष्मान कार्ड से भगंदर का ऑपरेशन हो सकता है?

हमारा अस्पताल आयुष्मान भारत PM-JAY में जनरल सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी पैकेज के लिए सूचीबद्ध है। आपका भगंदर का इलाज और चुना गया तरीका कवर होगा या नहीं, यह योजना की पैकेज सूची और आपकी पात्रता पर निर्भर करता है। कृपया अपना आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड लेकर आएं और भर्ती से पहले हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से जांच करा लें। बाकी मरीज़ों को हम भर्ती से पहले अनुमानित खर्च साफ़ साफ़ बता देते हैं।

भगंदर के ऑपरेशन के बाद क्या खाएं और क्या परहेज करें?

घर का नरम, रेशेदार खाना खाएं, जैसे दाल, रोटी, हरी सब्ज़ी, फल और सलाद, साथ में भरपूर पानी, ताकि मल नरम रहे और घाव पर ज़ोर न पड़े। हम इसबगोल की सलाह दे सकते हैं। पहले कुछ हफ्ते बहुत मिर्च-मसाले वाला और तला खाना, मैदा और शराब से परहेज करें। डायबिटीज़ हो तो शुगर काबू में रखें, क्योंकि ज़्यादा शुगर से घाव देर से भरता है और भगंदर दोबारा होने का खतरा बढ़ता है।

क्या ऑपरेशन के बाद भगंदर दोबारा हो सकता है?

हां, कुछ मरीज़ों में हो सकता है, और हम यह बात ईमानदारी से बताना ठीक समझते हैं। जटिल, ऊंचे या बार-बार हुए भगंदर में, और डायबिटीज़ या घाव की ठीक देखभाल न होने पर, यह संभावना ज़्यादा होती है। सिंकाई और पट्टी की सलाह मानना, शुगर कंट्रोल में रखना और हर फॉलो-अप पर आना घाव को ठीक से भरने में मदद करता है। मवाद फिर आए तो कृपया जल्दी हमें दिखाएं, ताकि समय पर इलाज हो सके।

गोपालगंज में भगंदर का सबसे अच्छा डॉक्टर कौन है?

हमारी सलाह है कि ऐसे योग्य सर्जन को चुनें जो ध्यान से जांच करें, ज़रूरत पर एमआरआई फिस्टुलोग्राम कराएं, और समझाएं कि आपका शौच पर कंट्रोल कैसे बचाया जाएगा। हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. आर. के. ठाकुर, एमएस (जनरल सर्जरी), लेप्रोस्कोपिक, लेज़र, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन हैं। उन्हें 16+ साल का सर्जिकल अनुभव है और वे 10,000+ ऑपरेशन कर चुके हैं। हमारे यहां फिस्टुलोटॉमी, फिस्टुलेक्टॉमी, सीटॉन और लेज़र, सभी विकल्प उपलब्ध हैं। हमारे मरीज़ों के रिव्यू आप गूगल पर पढ़ सकते हैं।

हम मोतिहारी या बेतिया में रहते हैं। क्या गोपालगंज में भगंदर का इलाज करा सकते हैं?

हां। अरार, गोपालगंज स्थित हमारे अस्पताल में मोतिहारी, बेतिया, सीवान, छपरा, कुशीनगर और देवरिया से मरीज़ आते हैं। कृपया पहले अपनी रिपोर्ट और कोई MRI हो तो व्हाट्सऐप +91 72739 94786 पर भेजें, फिर सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 से शाम 7 बजे के बीच हमारी ओपीडी में आएं। ज़्यादातर मरीज़ 1 से 2 दिन रुकते हैं। सिंकाई और पट्टी का तरीका हम परिवार के एक सदस्य को सिखाते हैं, ताकि घर पर देखभाल जारी रहे और आप फॉलो-अप पर आ सकें।

इससे जुड़े इलाज

फोड़े का आई एंड डी

हम पस से भरे फोड़े को चीरा लगाकर खाली करते हैं, ताकि दर्द और संक्रमण से राहत मिले, साथ में शुगर की जांच करते हैं और घाव भरने तक ड्रेसिंग का साफ़ शेड्यूल बनाते हैं।

बवासीर का इलाज

डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम बवासीर का इलाज पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ करते हैं। शुरुआती बवासीर में खानपान और दवा से, और ज़रूरत होने पर ग्रेड के हिसाब से लेज़र या MIPH स्टेपलर ऑपरेशन से।

फिशर का इलाज

फिशर यानी गुदा में दर्द वाला चीरा। डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम ज़्यादातर फिशर का इलाज खानपान, सिंकाई और मरहम से करते हैं, और पुराने फिशर में ज़रूरत होने पर छोटे ऑपरेशन की सलाह देते हैं।

स्रोत और आगे पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

अपॉइंटमेंट बुक करें

अपनी जानकारी भेजें, हमारी टीम आपको कॉल करके समय तय करेगी।

यह जानकारी सिर्फ़ जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं। इलाज हर मरीज़ की हालत देखकर तय होता है।
आखिरी बार अपडेट: 30 सितंबर 2026

हाल के लेख

सफल इलाज की कहानियां

डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, लेप्रोस्कोपिक सर्जन, डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज

डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर

संस्थापक एवं मुख्य सर्जन: लेप्रोस्कोपिक, लेजर, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन

एमबीबीएस, डीए, एमएस (जनरल सर्जरी)

पूरी जानकारी

गूगल पर मरीज़ों की राय

मरीज़ों और उनके परिवार के असली रिव्यू, जैसे उन्होंने हमारे गूगल बिज़नेस प्रोफ़ाइल पर लिखे हैं।

4.4
कुल 84 गूगल रिव्यू (तारीख 1 Oct 2026)
  • zaheer udddinजून 2024
    I Recently Visited this Clinic in Gopalganj, Earlier I was a bit Hesitant, But Once I met the Doctor, I was so Sure & Confident that I am in Good Hands, Very Well Experienced Doctor Well Behaved Staffs Nice Arrangements & Most Important, Very Easy Procedure. Would Always be Thankful to Mr. RK Thakur & His Team.
    अनुवाद देखें

    हाल ही में मैं गोपालगंज के इस क्लिनिक में आया। पहले थोड़ा झिझक रहा था, लेकिन डॉक्टर से मिलते ही मुझे पूरा भरोसा हो गया कि मैं सही हाथों में हूं। बहुत अनुभवी डॉक्टर, अच्छे व्यवहार वाला स्टाफ़, अच्छी व्यवस्था, और सबसे ज़रूरी, बहुत आसान प्रक्रिया। मैं श्री आर. के. ठाकुर और उनकी टीम का हमेशा आभारी रहूंगा।

  • arav singhaniaनवंबर 2025
    My relative hernia surgery at Dr RK Thakur Hospital Went Very Well, Skilled Doctors, Caring Staff and Smooth recovery, Highly Satisfied.
    अनुवाद देखें

    मेरे रिश्तेदार का हर्निया का ऑपरेशन डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में बहुत अच्छे से हुआ। कुशल डॉक्टर, देखभाल करने वाला स्टाफ़ और आसानी से रिकवरी। हम बहुत संतुष्ट हैं।

  • Jamal Enterprisesजून 2026
    डाक्टर साहब बहुत अच्छे है उनका बात करने का अंदाज बहुत ही निराला है स्टाफ के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता बाकी हॉस्पिटल अच्छा है

मुफ़्त परामर्श के लिए संपर्क करें

अपना नाम और फ़ोन नंबर दें। हमारी टीम आपको कॉल करके ओपीडी का समय तय करेगी।

कॉल करेंव्हाट्सऐप