गोपालगंज में पेट की एंडोस्कोपी (पेट की दूरबीन जांच)

अपर जीआई एंडोस्कोपी (दूरबीन से पेट की जांच)

डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम एंडोस्कोपी करते हैं, जिसमें पतली कैमरे वाली नली से खाने की नली, पेट और छोटी आंत का शुरुआती हिस्सा देखा जाता है। यह आमतौर पर गले में स्प्रे से होती है, और ज़्यादातर लोग उसी दिन घर जाते हैं।

गोपालगंज में पेट की एंडोस्कोपी (अपर जीआई एंडोस्कोपी, जिसे पेट की दूरबीन जांच भी कहते हैं) हम डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में जांच से पहले और बाद की साफ़ जानकारी के साथ करते हैं। इसमें पतली कैमरा वाली नली से खाने की नली, पेट और छोटी आंत का पहला हिस्सा सीधे देखा जाता है, ताकि एसिडिटी, अल्सर, काला पखाना, खून की उल्टी या निगलने में परेशानी की असली वजह पता चले, और ज़रूरत पर उसी जांच में बायोप्सी ली जा सके। जांच हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर की देखरेख में होती है, जिन्हें 16+ साल का सर्जिकल अनुभव है, और हमारी टीम ने बच्चों के निगले हुए सिक्के भी एंडोस्कोपी से निकाले हैं। पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे, दवा दुकान, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू एक ही जगह हैं। गोपालगंज के साथ सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया, कुशीनगर और देवरिया से भी लोग हमारे पास आते हैं, और सीवान के पास एंडोस्कोपी ढूंढने वाले कई परिवार पटना या गोरखपुर जाने की जगह हमारे यहां आते हैं। जांच हम आमतौर पर सुबह, रात भर खाली पेट रहने के बाद करते हैं। बुकिंग के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें।

ऑपरेशन का समयजांच में आमतौर पर 5 से 15 मिनट लगते हैं।
अस्पताल में रुकनाभर्ती की ज़रूरत नहीं। ज़्यादातर लोग उसी दिन, आमतौर पर एक-दो घंटे में, घर चले जाते हैं।

गोपालगंज में पेट की एंडोस्कोपी: यह जांच क्या है

अपर जीआई एंडोस्कोपी, जिसे आम बोलचाल में दूरबीन से पेट की जांच कहते हैं, में हमारे डॉक्टर सीधे आपकी खाने की नली (इसोफेगस), पेट और छोटी आंत के शुरुआती हिस्से (ड्यूओडेनम) के अंदर देखते हैं। आगे लाइट और कैमरे वाली एक पतली, मुड़ने वाली नली मुंह के रास्ते धीरे से अंदर डाली जाती है, और तस्वीरें स्क्रीन पर दिखती हैं।

इससे अल्सर (घाव), पेट की अंदरूनी परत की सूजन (गैस्ट्राइटिस), खाने की नली में एसिड से नुकसान, नली का सिकुड़ना, खून निकलने की जगह और गांठ का पता चलता है। ज़रूरत हो तो उसी जांच में हम मांस का एक बहुत छोटा टुकड़ा (बायोप्सी) ले सकते हैं; ज़्यादातर लोगों को इसका पता भी नहीं चलता। बायोप्सी से एच. पाइलोरी नाम के कीटाणु की जांच भी हो सकती है, जो अक्सर अल्सर की वजह बनता है।

हमारे अस्पताल में यह जांच आमतौर पर गले में स्प्रे से होती है, कुछ ही मिनट लगते हैं, और ज़्यादातर लोग उसी दिन घर चले जाते हैं।

पेट की दूरबीन जांच (एंडोस्कोपी): डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में 1
पेट की दूरबीन जांच (एंडोस्कोपी): डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में 2

किन लक्षणों में एंडोस्कोपी करानी चाहिए

  • दवा से भी ठीक न होने वाली एसिडिटी, जलन या गैस
  • खून की उल्टी, या कॉफी के चूरे जैसी उल्टी
  • काला, तारकोल जैसा पखाना, या बिना साफ वजह के खून की कमी (एनीमिया)
  • निगलने में दिक्कत या दर्द, या खाना अटकना
  • बिना कोशिश के वज़न घटना या भूख न लगना
  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, या अल्सर का शक
  • बच्चे का सिक्का या कोई और चीज़ निगल लेना

एंडोस्कोपी कब ज़रूरी है, और एसिडिटी कब दवा से ठीक होती है

पेट की तकलीफ की सही वजह जानने के लिए हम एंडोस्कोपी की सलाह देते हैं, जैसे दवा से भी ठीक न होने वाली एसिडिटी या जलन, बार-बार उल्टी, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, या अल्सर का शक। इन खतरे के संकेतों में जांच जल्दी कराएं: खून की उल्टी, काला पखाना, निगलने में दिक्कत, बिना कोशिश के वज़न घटना, खून की कमी, या बड़ी उम्र में नई तकलीफ शुरू होना। बहुत ज़्यादा खून आने या बेहोशी में कृपया पहले हमारी इमरजेंसी में आएं। अगर आप तंबाकू, गुटखा या खैनी खाते हैं और निगलने में दिक्कत है या मुंह का छाला ठीक नहीं हो रहा, तो जल्दी जांच कराएं।

कभी-कभार होने वाली हल्की एसिडिटी में आमतौर पर एंडोस्कोपी की ज़रूरत नहीं होती, और हम पहले दवा और खान-पान में बदलाव से इलाज करते हैं। हमारे डॉक्टर जांच करके फैसला करते हैं, और खून की जांच या अल्ट्रासाउंड की सलाह भी दे सकते हैं, जैसे पित्त की थैली में पथरी देखने के लिए, जिससे मिलता-जुलता दर्द होता है।

एंडोस्कोपी कैसे होती है: पूरी प्रक्रिया

  1. जांच से 6 से 8 घंटे पहले तक कुछ भी न खाएं-पिएं। ज़रूरी दवा लेते हैं तो पूछ लें कि उसे पानी के घूंट के साथ लेना है या नहीं।
  2. हमारे डॉक्टर जांच के बारे में समझाते हैं और आपकी सहमति लेते हैं। नकली दांत और चश्मा उतार दिए जाते हैं।
  3. गले में स्प्रे करके उसे सुन्न किया जाता है। आप बाईं करवट लेटते हैं, और दांतों के बीच एक छोटा प्लास्टिक का माउथ गार्ड रखा जाता है।
  4. पतली कैमरे वाली नली मुंह से धीरे-धीरे खाने की नली, पेट और ड्यूओडेनम तक ले जाई जाती है। आप सामान्य सांस ले सकते हैं। उबकाई आना और हवा से पेट भरा लगना आम है।
  5. ज़रूरत हो तो बहुत छोटी बायोप्सी लेकर जांच के लिए भेजी जाती है। ज़्यादातर लोगों को इसका पता नहीं चलता।
  6. नली निकाल ली जाती है। गले का सुन्नपन जाने तक, लगभग 1 घंटे, कुछ न खाएं-पिएं, फिर पानी के घूंट से शुरू करें।

जांच के बाद आराम और रिपोर्ट

कुछ घंटे गले में हल्की खराश, पेट फूलना या डकार आना आम है। सुन्नपन जाने के बाद पहले पानी के घूंट लें, फिर हल्का खाना खाएं। अगर बेहोशी की हल्की दवा (सेडेशन) दी गई हो, तो कृपया किसी साथी के साथ आएं, और उस दिन गाड़ी न चलाएं या कोई जोखिम वाला काम न करें। जांच के बाद हमारे डॉक्टर नतीजे समझाते हैं। बायोप्सी की रिपोर्ट में आमतौर पर कुछ दिन लगते हैं। तेज़ दर्द, खून की उल्टी, काला पखाना, बुखार या सांस की दिक्कत हो तो कृपया तुरंत आएं।

एंडोस्कोपी के बाद क्या खाएं और क्या सावधानी रखें

ज़्यादातर लोग उसी दिन सामान्य हो जाते हैं। कुछ आसान बातों का ध्यान रखें, जो हम जाने से पहले आपको समझाते हैं।

  • खाना-पीना: लगभग 1 घंटे तक, जब तक गले का सुन्नपन न जाए, कुछ न खाएं-पिएं। फिर पानी के घूंट से शुरू करें। अटकन या खांसी न हो तो खिचड़ी, दाल-चावल, दही या सूप जैसा हल्का खाना लें, और शाम तक सामान्य खाना खा सकते हैं।
  • बायोप्सी के बाद: उस दिन बहुत गर्म और मसालेदार खाना न लें। रिपोर्ट आने में आमतौर पर कुछ दिन लगते हैं।
  • बेहोशी की दवा के बाद: किसी साथी के साथ घर जाएं, और बाकी दिन गाड़ी न चलाएं, मशीन पर काम न करें और ज़रूरी कागज़ों पर दस्तखत न करें।
  • आम और मामूली: कुछ घंटे गले में हल्की खराश, पेट फूलना या डकार।
  • दवाएं: अपनी रोज़ की दवाएं, खासकर खून पतला करने वाली, हमारे डॉक्टर की सलाह से दोबारा शुरू करें।
  • खतरे के संकेत: सीने या पेट में तेज़ दर्द, खून की उल्टी, काला पखाना, बुखार या सांस लेने में तकलीफ़। कृपया तुरंत आएं या +91 72739 94786 पर कॉल करें।

फायदे

  • खाने की नली, पेट और ड्यूओडेनम को सीधे देखा जाता है
  • उसी जांच में बायोप्सी ली जा सकती है
  • न चीरा, न टांके
  • आमतौर पर गले के स्प्रे से, और उसी दिन घर वापसी
  • अंदाज़े की जगह सही इलाज चुनने में मदद
संभावित जोखिम:

अपर जीआई एंडोस्कोपी आम और आमतौर पर सुरक्षित जांच है। गले में खराश, पेट फूलना और थोड़ी देर की बेचैनी आम है और जल्दी ठीक हो जाती है। कभी-कभी बायोप्सी की जगह से खून आ सकता है, या बेहोशी की दवा से रिएक्शन हो सकता है। खाने की नली या पेट में छेद (परफोरेशन) बहुत कम होता है, पर गंभीर है। खाली पेट रहना, दवाओं की जांच (खासकर खून पतला करने वाली) और सावधानी से जांच करके हम जोखिम घटाते हैं। हमारे डॉक्टर जांच से पहले इन्हें समझाएंगे।

गोपालगंज में एंडोस्कोपी जांच का खर्च और आयुष्मान कार्ड

बहुत से लोग बुकिंग से पहले हमसे एंडोस्कोपी जांच का खर्च पूछते हैं। खर्च इस पर निर्भर करता है कि जांच में क्या करना पड़ा: सिर्फ़ देखना, एक या ज़्यादा बायोप्सी (और लैब में उसकी जांच का खर्च), निगली हुई चीज़ निकालना, ज़रूरत पर बेहोशी की हल्की दवा, और जांच से पहले की खून की जांचें। आपका केस जाने बिना हम कोई एक तय रकम नहीं बताते, लेकिन बुकिंग के समय, जांच से पहले ही, हमारी टीम अनुमानित खर्च साफ़ बता देती है। आप पहले अपनी पुरानी रिपोर्ट और पर्चे व्हाट्सऐप +91 72739 94786 पर भेज सकते हैं।

आयुष्मान भारत PM-JAY मुख्य रूप से उस इलाज को कवर करता है जिसमें अस्पताल में भर्ती होना पड़े, इसलिए ओपीडी में पहले से तय एंडोस्कोपी शायद अकेले कवर न हो। हमारा अस्पताल जनरल सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी पैकेज के लिए सूचीबद्ध है। आयुष्मान कार्ड हो तो कृपया आधार कार्ड के साथ लाएं और जांच से पहले हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पूछ लें।

एंडोस्कोपी के लिए परिवार हमारे अस्पताल को क्यों चुनते हैं

हमारे यहां एंडोस्कोपी के साथ पैथोलॉजी लैब, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे और फार्मेसी भी एक ही जगह हैं, इसलिए ज़रूरी जांच अक्सर एक ही बार में हो जाती हैं। हमारी टीम ने बच्चों के निगले हुए सिक्के जैसी चीज़ें भी एंडोस्कोपी से निकाली हैं। ऑपरेशन की ज़रूरत हो तो 16+ साल के अनुभव वाले डॉ. आर. के. ठाकुर की सर्जरी टीम यहीं है। गांठ की स्थिति में हर महीने के पहले शनिवार को हमारे यहां डॉ. फिरोज़ पाशा की कैंसर सर्जरी ओपीडी लगती है। बुकिंग के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें।

वीडियो और इंटरव्यू

  • बच्ची के पेट से दूरबीन (एंडोस्कोपी) से सिक्का निकाला गया (स्थानीय न्यूज़ रिपोर्ट)

    सिक्का निगल लेने वाली एक बच्ची का इलाज हमने एंडोस्कोपी से, बिना चीरा लगाए किया। डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर बताते हैं कि परिवारों को पता होना चाहिए कि यह सुविधा गोपालगंज में उपलब्ध है।

    Bhojpuriya Jhakora · 2023-11-17
  • खैनी, गुटखा और तंबाकू के खतरे: डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर की सलाह और एंडोस्कोपी जांच

    डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर खैनी, गुटखा और पान से होने वाले नुकसान के बारे में बताते हैं और दिखाते हैं कि हमारे हॉस्पिटल में एंडोस्कोपी से खाने की नली और पेट की जांच कैसे होती है।

    Bhojpuriya Jhakora · 2023-10-05

एंडोस्कोपी से जुड़े आम सवाल

एंडोस्कोपी से पहले कितनी देर खाली पेट रहना है?

कृपया जांच से 6 से 8 घंटे पहले तक कुछ भी न खाएं-पिएं, ताकि पेट खाली रहे और साफ दिखे। रात भर खाली पेट रहकर सुबह जांच कराना अक्सर सबसे आसान होता है। बीपी, दिल या शुगर की दवा लेते हैं तो पहले ही हमारी टीम से पूछ लें। खून पतला करने की दवा खुद से बंद न करें, हमारे डॉक्टर को उसके बारे में बताएं।

गोपालगंज में पेट की एंडोस्कोपी कैसे होती है और कितना समय लगता है?

6 से 8 घंटे खाली पेट रहने के बाद हम गले को स्प्रे से सुन्न करते हैं, और आपको बाईं करवट लिटाकर दांतों के बीच छोटा माउथ गार्ड रखा जाता है। फिर पतली, मुड़ने वाली कैमरा नली मुंह से धीरे-धीरे खाने की नली, पेट और छोटी आंत के पहले हिस्से तक ले जाई जाती है, और हमारे डॉक्टर स्क्रीन पर देखते हैं। ज़रूरत हो तो बायोप्सी ली जाती है। जांच आमतौर पर 5 से 15 मिनट की होती है, और ज़्यादातर लोग एक दो घंटे में घर चले जाते हैं।

क्या एंडोस्कोपी में दर्द होता है? क्या बेहोश करते हैं?

ज़्यादातर लोगों की जांच सिर्फ गले के स्प्रे से होती है और वे जागते रहते हैं। थोड़ी उबकाई, दबाव और हवा से पेट भरा लग सकता है, पर आप सामान्य सांस ले सकते हैं, और जांच कुछ ही मिनट में खत्म हो जाती है। शांत रहना और धीरे-धीरे सांस लेना मदद करता है। बहुत घबराहट हो तो हमारे डॉक्टर हल्की बेहोशी की दवा के बारे में आपसे बात कर सकते हैं; तब साथी के साथ आना ज़रूरी है।

एंडोस्कोपी कैसे होती है, क्या इसमें ऑपरेशन या चीरा लगता है?

नहीं। एंडोस्कोपी एक जांच है, ऑपरेशन नहीं। "दूरबीन" का मतलब यहां पतली कैमरा वाली नली है। इसमें न चीरा लगता है, न टांके। नली मुंह से अंदर जाती है और खाने की नली, पेट और छोटी आंत के पहले हिस्से को स्क्रीन पर दिखाती है, ताकि हमारे डॉक्टर अल्सर, सूजन, खून बहने की जगह या गांठ देख सकें और ज़रूरत हो तो बायोप्सी ले सकें। ज़्यादातर लोग सिर्फ़ गले के स्प्रे से जागते हुए जांच कराते हैं।

बायोप्सी क्या है? क्या इसका मतलब कैंसर है?

बायोप्सी एंडोस्कोपी के दौरान लिया गया मांस का बहुत छोटा टुकड़ा है, जिसे लैब में जांचा जाता है। हम इसे कई वजहों से लेते हैं, जैसे अल्सर वाले कीटाणु एच. पाइलोरी की जांच, या सूजन देखने के लिए। बायोप्सी लेने का मतलब यह नहीं कि आपको कैंसर है। रिपोर्ट में आमतौर पर कुछ दिन लगते हैं, और हमारे डॉक्टर उसे साफ़ साफ़ समझाते हैं।

एसिडिटी में कब चिंता करनी चाहिए?

जो एसिडिटी खान-पान बदलने और थोड़े दिन की दवा से ठीक हो जाए, वह आमतौर पर गंभीर नहीं होती। अगर यह बार-बार लौटे, या खून की उल्टी, काला पखाना, निगलने में दिक्कत, वज़न घटना, भूख न लगना, या बड़ी उम्र में नई तकलीफ हो, तो कृपया जल्दी डॉक्टर को दिखाएं। ये संकेत बताते हैं कि वजह जानने के लिए एंडोस्कोपी की ज़रूरत हो सकती है।

एंडोस्कोपी जांच का खर्च किन बातों पर निर्भर करता है, और क्या आयुष्मान कार्ड से होती है?

खर्च इस पर निर्भर करता है कि जांच में क्या हुआ: सिर्फ़ देखना, बायोप्सी और लैब में उसकी जांच, निगली हुई चीज़ निकालना, या ज़रूरत पर बेहोशी की दवा। बुकिंग के समय, जांच से पहले ही, हम अनुमानित खर्च साफ़ बता देते हैं। आयुष्मान भारत PM-JAY मुख्य रूप से भर्ती वाले इलाज को कवर करता है, इसलिए ओपीडी में तय एंडोस्कोपी शायद अकेले कवर न हो। कृपया आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड लेकर आएं और जांच से पहले हमारे सहायता केंद्र से पूछ लें।

एंडोस्कोपी के बाद क्या खा सकते हैं?

लगभग 1 घंटे तक, जब तक गले का सुन्नपन न जाए, रुकें, फिर पानी के घूंट लें। अटकन या खांसी न हो तो खिचड़ी, दाल-चावल, दही या सूप जैसा हल्का खाना शुरू करें, और शाम तक सामान्य खाना खा सकते हैं। अगर हमने बायोप्सी ली हो तो उस दिन बहुत गर्म और मसालेदार खाना न लें। बेहोशी की दवा दी गई हो तो बाकी दिन गाड़ी न चलाएं और जोखिम वाला काम न करें।

मेरे बच्चे ने सिक्का निगल लिया है। क्या करें?

कृपया घबराएं नहीं। बच्चे को उल्टी कराने की कोशिश न करें, और खाना-पानी न दें। बच्चे को हमारी इमरजेंसी में लाएं। एक्स-रे से पता चलता है कि सिक्का कहां है। बहुत से सिक्के अपने आप निकल जाते हैं, पर खाने की नली में अटका सिक्का एंडोस्कोपी से निकालना पड़ता है, जो हमारी टीम ने बच्चों में किया है। अगर बटन वाली बैटरी या चुंबक हो सकता है, या बच्चे को सांस में दिक्कत हो या लार टपक रही हो, तो तुरंत आएं।

गोपालगंज में एंडोस्कोपी के लिए सबसे अच्छा अस्पताल कौन सा है?

ऐसा अस्पताल चुनें जहां एंडोस्कोपी अनुभवी डॉक्टर की देखरेख में हो, बायोप्सी हिस्टोपैथोलॉजी लैब में भेजी जाए, और कोई गंभीर बीमारी मिले तो सर्जरी की सुविधा भी हो। हमारे अस्पताल में एंडोस्कोपी हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर की देखरेख में होती है, जिन्हें 16+ साल का अनुभव है, और पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू एक ही जगह हैं। हमारे मरीज़ों के रिव्यू आप गूगल पर पढ़ सकते हैं।

गोपालगंज में पेट की एंडोस्कोपी कहां होती है?

अपर जीआई एंडोस्कोपी हम डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में करते हैं, और पैथोलॉजी जांच, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे भी हमारे अस्पताल में ही हैं। बुकिंग के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें, खाली पेट रहने के बारे में पूछ लें, और पुरानी रिपोर्ट व दवाओं की लिस्ट साथ लाएं। आयुष्मान कार्ड है तो हमारे सहायता केंद्र से पूछ सकते हैं कि जांच कवर है या नहीं।

हम सीवान के पास रहते हैं। क्या सीवान के पास एंडोस्कोपी की सुविधा है, या पटना जाना पड़ेगा?

पटना जाने की ज़रूरत नहीं है। अपर जीआई एंडोस्कोपी हम कमला राय कॉलेज रोड, अरार, गोपालगंज स्थित अपने अस्पताल में करते हैं, और सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया, कुशीनगर और देवरिया से लोग हमारे पास आते हैं। सुबह का समय बुक करने के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें, रात भर खाली पेट रहकर आएं, और साथ में एक साथी, पुरानी रिपोर्ट और दवाओं की सूची लाएं। ज़्यादातर लोग उसी दिन, अक्सर जांच के एक दो घंटे में घर चले जाते हैं।

इससे जुड़े इलाज

कोलोनोस्कोपी

डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम कोलोनोस्कोपी करते हैं, जिसमें पतली कैमरे वाली नली से बड़ी आंत के अंदर देखा जाता है, ताकि पखाने में खून, पखाने की आदत में बदलाव या खून की कमी की वजह पता चले।

पेट और आंत के कैंसर का ऑपरेशन

हम पेट, बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर का इलाज करते हैं: बायोप्सी के साथ एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी, सीटी स्कैन से स्टेजिंग, ज़रूरत पर ऑपरेशन, और कीमोथेरेपी व रेडियोथेरेपी के लिए बड़े सेंटर से तालमेल।

पित्त की थैली का ऑपरेशन

पित्त की थैली में पथरी होने पर लेप्रोस्कोपी (दूरबीन से ऑपरेशन) द्वारा छोटे चीरों से पूरी थैली निकालना। गोपालगंज के हमारे हॉस्पिटल में यह ऑपरेशन हमारे मुख्य सर्जन डॉ. आर. के. ठाकुर करते हैं।

स्रोत और आगे पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

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यह जानकारी सिर्फ़ जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं। इलाज हर मरीज़ की हालत देखकर तय होता है।
आखिरी बार अपडेट: 30 सितंबर 2026

सफल इलाज की कहानियां

डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, लेप्रोस्कोपिक सर्जन, डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज

डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर

संस्थापक एवं मुख्य सर्जन: लेप्रोस्कोपिक, लेजर, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन

एमबीबीएस, डीए, एमएस (जनरल सर्जरी)

पूरी जानकारी

गूगल पर मरीज़ों की राय

मरीज़ों और उनके परिवार के असली रिव्यू, जैसे उन्होंने हमारे गूगल बिज़नेस प्रोफ़ाइल पर लिखे हैं।

4.4
कुल 84 गूगल रिव्यू (तारीख 1 Oct 2026)
  • zaheer udddinजून 2024
    I Recently Visited this Clinic in Gopalganj, Earlier I was a bit Hesitant, But Once I met the Doctor, I was so Sure & Confident that I am in Good Hands, Very Well Experienced Doctor Well Behaved Staffs Nice Arrangements & Most Important, Very Easy Procedure. Would Always be Thankful to Mr. RK Thakur & His Team.
    अनुवाद देखें

    हाल ही में मैं गोपालगंज के इस क्लिनिक में आया। पहले थोड़ा झिझक रहा था, लेकिन डॉक्टर से मिलते ही मुझे पूरा भरोसा हो गया कि मैं सही हाथों में हूं। बहुत अनुभवी डॉक्टर, अच्छे व्यवहार वाला स्टाफ़, अच्छी व्यवस्था, और सबसे ज़रूरी, बहुत आसान प्रक्रिया। मैं श्री आर. के. ठाकुर और उनकी टीम का हमेशा आभारी रहूंगा।

  • arav singhaniaनवंबर 2025
    My relative hernia surgery at Dr RK Thakur Hospital Went Very Well, Skilled Doctors, Caring Staff and Smooth recovery, Highly Satisfied.
    अनुवाद देखें

    मेरे रिश्तेदार का हर्निया का ऑपरेशन डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में बहुत अच्छे से हुआ। कुशल डॉक्टर, देखभाल करने वाला स्टाफ़ और आसानी से रिकवरी। हम बहुत संतुष्ट हैं।

  • Jamal Enterprisesजून 2026
    डाक्टर साहब बहुत अच्छे है उनका बात करने का अंदाज बहुत ही निराला है स्टाफ के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता बाकी हॉस्पिटल अच्छा है

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