बच्चेदानी निकालने के ऑपरेशन को हिस्टेरेक्टॉमी कहते हैं। सही वजह से किया जाए तो यह सालों के ज़्यादा खून आने, दर्द या तकलीफ़ से छुटकारा दिला सकता है। पर यह बड़ा और हमेशा का फैसला है: बच्चेदानी निकलने के बाद माहवारी (पीरियड) बंद हो जाती है और महिला फिर मां नहीं बन सकती। तो बच्चेदानी का ऑपरेशन कब ज़रूरी है, और कब पहले दूसरे इलाज आज़माए जा सकते हैं? नीचे हमारी सर्जिकल टीम यही समझा रही है।
हमारे अस्पताल में हम किसी भी फैसले से पहले हर विकल्प समझाते हैं। आखिरी फैसला हमेशा पूरी जांच, रिपोर्ट और डॉक्टर से खुली बातचीत के बाद ही होना चाहिए।
बच्चेदानी निकालने की आम वजहें
बच्चेदानी में गांठ (फाइब्रॉयड)
फाइब्रॉयड बच्चेदानी की दीवार में मांस की गांठें हैं, जो कैंसर नहीं होतीं। बहुत सी महिलाओं में ये बिना तकलीफ़ के रहती हैं, और छोटी गांठ में आमतौर पर समय-समय पर जांच काफ़ी है। इलाज तब सोचा जाता है जब गांठ से ज़्यादा खून आए, खून की कमी हो, दर्द हो, पेशाब या पैखाने पर दबाव पड़े, या गांठ तेज़ी से बढ़े।
ज़्यादा या बेतरतीब खून आना
माहवारी में बहुत ज़्यादा खून, दो माहवारी के बीच खून, या खून का न रुकना कमज़ोरी और गंभीर खून की कमी (एनीमिया) कर सकता है। पहले अल्ट्रासाउंड, खून की जांच और कभी-कभी अंदरूनी परत की जांच से इसकी वजह पता करनी होती है।
बच्चेदानी का नीचे खिसकना (प्रोलैप्स)
कई बच्चे होने, भारी काम और बढ़ती उम्र से बच्चेदानी को थामने वाली मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं, और बच्चेदानी नीचे खिसक आती है या बाहर निकलने लगती है। महिला को भारीपन, कुछ बाहर आने का एहसास, या पेशाब और पैखाने में दिक्कत होती है।
एडेनोमायोसिस
इसमें बच्चेदानी की अंदरूनी परत उसकी मांसपेशी वाली दीवार में घुस जाती है। इससे माहवारी में तेज़ दर्द और ज़्यादा खून आता है, और बच्चेदानी भारी हो जाती है। अक्सर पहले दवा से इलाज किया जाता है।
कैंसर या कैंसर से पहले के बदलाव
बच्चेदानी, बच्चेदानी के मुंह या अंडाशय (ओवरी) के कैंसर, या कैंसर से पहले के कुछ बदलावों में बच्चेदानी निकालनी पड़ सकती है, जिसकी योजना कैंसर विशेषज्ञ के साथ बनती है।
जहां हो सके, पहले दूसरे इलाज आज़माएं
बहुत सी महिलाओं का इलाज बच्चेदानी निकाले बिना हो सकता है, खासकर कम उम्र की महिलाओं या जो आगे बच्चा चाहती हों। वजह के हिसाब से:
- दवाएं, खून और दर्द कम करने के लिए, और खून की कमी के लिए आयरन
- हार्मोन वाला इलाज, जैसे गोली, इंजेक्शन, या बच्चेदानी के अंदर रखा जाने वाला हार्मोन वाला उपकरण, जो ज़्यादा खून आना कम करता है
- सिर्फ़ गांठ निकालना (मायोमेक्टॉमी) और बच्चेदानी बचाना, सही मामलों में
- हल्के प्रोलैप्स में नीचे की मांसपेशियों की कसरत, और कुछ महिलाओं में योनि में रखा जाने वाला रिंग (पेसरी)
- इंतज़ार और निगरानी, अगर लक्षण हल्के हों और माहवारी बंद होने वाली हो, क्योंकि उसके बाद गांठें अक्सर सिकुड़ जाती हैं
ओवरी में गांठ (सिस्ट) के लिए भी आमतौर पर बच्चेदानी निकालने की ज़रूरत नहीं होती; अक्सर सिर्फ़ सिस्ट निकालकर ओवरी बचा ली जाती है (दूरबीन से ओवरी की सिस्ट का ऑपरेशन)।
बिना साफ़ वजह के बच्चेदानी न निकलवाएं
सिर्फ़ हल्का सफ़ेद पानी, हल्का कमर दर्द, बिना लक्षण वाली छोटी गांठ, या "अब बच्चे हो गए" सोचकर बच्चेदानी नहीं निकलवानी चाहिए। हां कहने से पहले ये बातें ज़रूर समझ लें:
- असली परेशानी क्या है, और रिपोर्ट में क्या आया है?
- क्या दूसरे इलाज आज़माए गए या उन पर सोचा गया?
- इंतज़ार करें तो क्या होगा?
- ओवरी निकाली जाएगी या बचाई जाएगी?
- कौन-सा ऑपरेशन होगा, और क्यों?
मन में शक हो तो किसी दूसरे डॉक्टर की राय लेना बिल्कुल ठीक है।
ओवरी (अंडाशय) का फैसला
ओवरी ऐसे हार्मोन बनाती है जो महिला की हड्डियों और दिल की रक्षा करते हैं। जिन महिलाओं की माहवारी अभी बंद नहीं हुई, उनमें स्वस्थ ओवरी आमतौर पर बचा ली जाती है, क्योंकि उसे निकालने से अचानक मेनोपॉज़ (माहवारी बंद होना) हो जाता है, गर्मी की लहरें आती हैं, और आगे चलकर हड्डियां कमज़ोर होने और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है। माहवारी बंद होने के बाद, या ओवरी में खुद कोई दिक्कत हो, तो उसे निकालने की सलाह दी जा सकती है। यह बात सर्जन से साफ़-साफ़ करें और सहमति पत्र में लिखवाएं।
ऑपरेशन के तरीके
दूरबीन से (लेप्रोस्कोपिक) बच्चेदानी का ऑपरेशन
पेट पर कुछ छोटे छेद करके कैमरे और पतले औज़ारों से किया जाता है। खुले ऑपरेशन के मुकाबले आमतौर पर दर्द कम होता है और महिला जल्दी घर-काम पर लौटती है। ज़्यादा जानें: दूरबीन से बच्चेदानी का ऑपरेशन।
योनि के रास्ते (वेजाइनल) ऑपरेशन
बच्चेदानी योनि के रास्ते निकाली जाती है, पेट पर कोई चीरा नहीं लगता। बच्चेदानी खिसकने में यह अक्सर चुना जाता है, और साथ में कमज़ोर मांसपेशियों की मरम्मत (PFR) भी की जाती है। देखें: वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी और PFR।
खुला (पेट पर चीरे वाला) ऑपरेशन
पेट के निचले हिस्से पर बड़ा चीरा लगाकर किया जाता है। बहुत बड़ी बच्चेदानी, कुछ कैंसर, या पहले के ऑपरेशनों से अंदर बहुत चिपकाव होने पर इसकी ज़रूरत पड़ सकती है। इसमें ठीक होने में ज़्यादा समय लगता है।
सही तरीका हमारे सर्जन बच्चेदानी के साइज़, वजह, पहले के ऑपरेशन और आपकी सेहत देखकर तय करते हैं।
ऑपरेशन के बाद
- दूरबीन या योनि वाले ऑपरेशन के बाद आमतौर पर 1 से 3 दिन और खुले ऑपरेशन में कुछ दिन ज़्यादा रुकना होता है, हमारे सर्जन के फैसले के अनुसार।
- सलाह के अनुसार जल्दी चलना शुरू करें, इससे खून के थक्के और गैस से बचाव होता है।
- लगभग 6 हफ़्ते तक पानी की बाल्टी जैसा भारी वज़न न उठाएं।
- लगभग 6 हफ़्ते तक, या सलाह के अनुसार, पति के साथ संबंध न बनाएं।
- कुछ हफ़्ते हल्का खून के धब्बे आना आम है। ज़्यादा खून, बुखार या बदबूदार पानी आए तो बताएं।
परदा और महिला अटेंडेंट
कृपया शर्म की वजह से इलाज न टालें। हमारे अस्पताल में जांच के समय परदे का आपको पूरा हक है, और अंदरूनी जांच के समय आप किसी महिला स्टाफ़ को साथ रखने के लिए कह सकती हैं। घर की किसी महिला को अटेंडेंट के रूप में साथ ला सकती हैं।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- माहवारी में इतना खून कि हर एक-दो घंटे में पैड भीग जाए, या बड़े थक्के आएं
- कमज़ोरी, चक्कर या सांस फूलना, जो खून की कमी की निशानी हो सकती है
- माहवारी बंद होने के बाद किसी भी तरह का खून आना
- संबंध के बाद या दो माहवारी के बीच खून आना
- योनि से कुछ बाहर आने का एहसास
- पेट के निचले हिस्से में गांठ, या तेज़ दर्द
गोपालगंज, सीवान, छपरा और आसपास के ज़िलों की महिलाएं डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर से परामर्श लेकर समझ सकती हैं कि बच्चेदानी निकालना सच में ज़रूरी है या पहले दूसरा इलाज आज़माया जा सकता है। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: दूरबीन से बच्चेदानी का ऑपरेशन।
गोपालगंज में हमारे यहां दूरबीन से बच्चेदानी का ऑपरेशन, वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी के साथ PFR, और ओवरी की सिस्ट के ऑपरेशन होते हैं, और अल्ट्रासाउंड व लैब जांच हमारे अस्पताल में ही होती है। ओपीडी के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें।



