बच्चेदानी का ऑपरेशन कब ज़रूरी है? (हिस्टेरेक्टॉमी)

बच्चेदानी का ऑपरेशन कब ज़रूरी है? (हिस्टेरेक्टॉमी)

बच्चेदानी में गांठ, ज़्यादा खून आना, बच्चेदानी खिसकना या एडेनोमायोसिस में ऑपरेशन मदद कर सकता है, पर यह हमेशा पहला इलाज नहीं। हमारे सर्जन बता रहे हैं वजहें, दूसरे रास्ते और ऑपरेशन के तरीके।

मुख्य बातें

  • गांठ, ज़्यादा खून, बच्चेदानी खिसकने और एडेनोमायोसिस में बच्चेदानी का ऑपरेशन मदद कर सकता है, पर यह बड़ा और हमेशा का फैसला है।
  • जहां ठीक हो, पहले दवा, हार्मोन वाला इलाज, सिर्फ़ गांठ निकालना या इंतज़ार आज़माया जा सकता है।
  • जिनकी माहवारी बंद नहीं हुई, उनमें स्वस्थ ओवरी आमतौर पर बचा ली जाती है; ऑपरेशन से पहले इस पर बात करें।
  • दूरबीन, योनि के रास्ते या खुला ऑपरेशन, यह वजह, बच्चेदानी के साइज़ और सेहत देखकर तय होता है।
  • जांच के समय महिला स्टाफ़ साथ रखने के लिए कह सकती हैं, और महिला अटेंडेंट साथ ला सकती हैं।

बच्चेदानी निकालने के ऑपरेशन को हिस्टेरेक्टॉमी कहते हैं। सही वजह से किया जाए तो यह सालों के ज़्यादा खून आने, दर्द या तकलीफ़ से छुटकारा दिला सकता है। पर यह बड़ा और हमेशा का फैसला है: बच्चेदानी निकलने के बाद माहवारी (पीरियड) बंद हो जाती है और महिला फिर मां नहीं बन सकती। तो बच्चेदानी का ऑपरेशन कब ज़रूरी है, और कब पहले दूसरे इलाज आज़माए जा सकते हैं? नीचे हमारी सर्जिकल टीम यही समझा रही है।

हमारे अस्पताल में हम किसी भी फैसले से पहले हर विकल्प समझाते हैं। आखिरी फैसला हमेशा पूरी जांच, रिपोर्ट और डॉक्टर से खुली बातचीत के बाद ही होना चाहिए।

बच्चेदानी निकालने की आम वजहें

बच्चेदानी में गांठ (फाइब्रॉयड)

फाइब्रॉयड बच्चेदानी की दीवार में मांस की गांठें हैं, जो कैंसर नहीं होतीं। बहुत सी महिलाओं में ये बिना तकलीफ़ के रहती हैं, और छोटी गांठ में आमतौर पर समय-समय पर जांच काफ़ी है। इलाज तब सोचा जाता है जब गांठ से ज़्यादा खून आए, खून की कमी हो, दर्द हो, पेशाब या पैखाने पर दबाव पड़े, या गांठ तेज़ी से बढ़े।

ज़्यादा या बेतरतीब खून आना

माहवारी में बहुत ज़्यादा खून, दो माहवारी के बीच खून, या खून का न रुकना कमज़ोरी और गंभीर खून की कमी (एनीमिया) कर सकता है। पहले अल्ट्रासाउंड, खून की जांच और कभी-कभी अंदरूनी परत की जांच से इसकी वजह पता करनी होती है।

बच्चेदानी का नीचे खिसकना (प्रोलैप्स)

कई बच्चे होने, भारी काम और बढ़ती उम्र से बच्चेदानी को थामने वाली मांसपेशियां कमज़ोर हो जाती हैं, और बच्चेदानी नीचे खिसक आती है या बाहर निकलने लगती है। महिला को भारीपन, कुछ बाहर आने का एहसास, या पेशाब और पैखाने में दिक्कत होती है।

एडेनोमायोसिस

इसमें बच्चेदानी की अंदरूनी परत उसकी मांसपेशी वाली दीवार में घुस जाती है। इससे माहवारी में तेज़ दर्द और ज़्यादा खून आता है, और बच्चेदानी भारी हो जाती है। अक्सर पहले दवा से इलाज किया जाता है।

कैंसर या कैंसर से पहले के बदलाव

बच्चेदानी, बच्चेदानी के मुंह या अंडाशय (ओवरी) के कैंसर, या कैंसर से पहले के कुछ बदलावों में बच्चेदानी निकालनी पड़ सकती है, जिसकी योजना कैंसर विशेषज्ञ के साथ बनती है।

जहां हो सके, पहले दूसरे इलाज आज़माएं

बहुत सी महिलाओं का इलाज बच्चेदानी निकाले बिना हो सकता है, खासकर कम उम्र की महिलाओं या जो आगे बच्चा चाहती हों। वजह के हिसाब से:

  • दवाएं, खून और दर्द कम करने के लिए, और खून की कमी के लिए आयरन
  • हार्मोन वाला इलाज, जैसे गोली, इंजेक्शन, या बच्चेदानी के अंदर रखा जाने वाला हार्मोन वाला उपकरण, जो ज़्यादा खून आना कम करता है
  • सिर्फ़ गांठ निकालना (मायोमेक्टॉमी) और बच्चेदानी बचाना, सही मामलों में
  • हल्के प्रोलैप्स में नीचे की मांसपेशियों की कसरत, और कुछ महिलाओं में योनि में रखा जाने वाला रिंग (पेसरी)
  • इंतज़ार और निगरानी, अगर लक्षण हल्के हों और माहवारी बंद होने वाली हो, क्योंकि उसके बाद गांठें अक्सर सिकुड़ जाती हैं

ओवरी में गांठ (सिस्ट) के लिए भी आमतौर पर बच्चेदानी निकालने की ज़रूरत नहीं होती; अक्सर सिर्फ़ सिस्ट निकालकर ओवरी बचा ली जाती है (दूरबीन से ओवरी की सिस्ट का ऑपरेशन)।

बिना साफ़ वजह के बच्चेदानी न निकलवाएं

सिर्फ़ हल्का सफ़ेद पानी, हल्का कमर दर्द, बिना लक्षण वाली छोटी गांठ, या "अब बच्चे हो गए" सोचकर बच्चेदानी नहीं निकलवानी चाहिए। हां कहने से पहले ये बातें ज़रूर समझ लें:

  • असली परेशानी क्या है, और रिपोर्ट में क्या आया है?
  • क्या दूसरे इलाज आज़माए गए या उन पर सोचा गया?
  • इंतज़ार करें तो क्या होगा?
  • ओवरी निकाली जाएगी या बचाई जाएगी?
  • कौन-सा ऑपरेशन होगा, और क्यों?

मन में शक हो तो किसी दूसरे डॉक्टर की राय लेना बिल्कुल ठीक है।

ओवरी (अंडाशय) का फैसला

ओवरी ऐसे हार्मोन बनाती है जो महिला की हड्डियों और दिल की रक्षा करते हैं। जिन महिलाओं की माहवारी अभी बंद नहीं हुई, उनमें स्वस्थ ओवरी आमतौर पर बचा ली जाती है, क्योंकि उसे निकालने से अचानक मेनोपॉज़ (माहवारी बंद होना) हो जाता है, गर्मी की लहरें आती हैं, और आगे चलकर हड्डियां कमज़ोर होने और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है। माहवारी बंद होने के बाद, या ओवरी में खुद कोई दिक्कत हो, तो उसे निकालने की सलाह दी जा सकती है। यह बात सर्जन से साफ़-साफ़ करें और सहमति पत्र में लिखवाएं।

ऑपरेशन के तरीके

दूरबीन से (लेप्रोस्कोपिक) बच्चेदानी का ऑपरेशन

पेट पर कुछ छोटे छेद करके कैमरे और पतले औज़ारों से किया जाता है। खुले ऑपरेशन के मुकाबले आमतौर पर दर्द कम होता है और महिला जल्दी घर-काम पर लौटती है। ज़्यादा जानें: दूरबीन से बच्चेदानी का ऑपरेशन।

योनि के रास्ते (वेजाइनल) ऑपरेशन

बच्चेदानी योनि के रास्ते निकाली जाती है, पेट पर कोई चीरा नहीं लगता। बच्चेदानी खिसकने में यह अक्सर चुना जाता है, और साथ में कमज़ोर मांसपेशियों की मरम्मत (PFR) भी की जाती है। देखें: वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी और PFR।

खुला (पेट पर चीरे वाला) ऑपरेशन

पेट के निचले हिस्से पर बड़ा चीरा लगाकर किया जाता है। बहुत बड़ी बच्चेदानी, कुछ कैंसर, या पहले के ऑपरेशनों से अंदर बहुत चिपकाव होने पर इसकी ज़रूरत पड़ सकती है। इसमें ठीक होने में ज़्यादा समय लगता है।

सही तरीका हमारे सर्जन बच्चेदानी के साइज़, वजह, पहले के ऑपरेशन और आपकी सेहत देखकर तय करते हैं।

ऑपरेशन के बाद

  • दूरबीन या योनि वाले ऑपरेशन के बाद आमतौर पर 1 से 3 दिन और खुले ऑपरेशन में कुछ दिन ज़्यादा रुकना होता है, हमारे सर्जन के फैसले के अनुसार।
  • सलाह के अनुसार जल्दी चलना शुरू करें, इससे खून के थक्के और गैस से बचाव होता है।
  • लगभग 6 हफ़्ते तक पानी की बाल्टी जैसा भारी वज़न न उठाएं।
  • लगभग 6 हफ़्ते तक, या सलाह के अनुसार, पति के साथ संबंध न बनाएं।
  • कुछ हफ़्ते हल्का खून के धब्बे आना आम है। ज़्यादा खून, बुखार या बदबूदार पानी आए तो बताएं।

परदा और महिला अटेंडेंट

कृपया शर्म की वजह से इलाज न टालें। हमारे अस्पताल में जांच के समय परदे का आपको पूरा हक है, और अंदरूनी जांच के समय आप किसी महिला स्टाफ़ को साथ रखने के लिए कह सकती हैं। घर की किसी महिला को अटेंडेंट के रूप में साथ ला सकती हैं।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

  • माहवारी में इतना खून कि हर एक-दो घंटे में पैड भीग जाए, या बड़े थक्के आएं
  • कमज़ोरी, चक्कर या सांस फूलना, जो खून की कमी की निशानी हो सकती है
  • माहवारी बंद होने के बाद किसी भी तरह का खून आना
  • संबंध के बाद या दो माहवारी के बीच खून आना
  • योनि से कुछ बाहर आने का एहसास
  • पेट के निचले हिस्से में गांठ, या तेज़ दर्द

गोपालगंज, सीवान, छपरा और आसपास के ज़िलों की महिलाएं डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर से परामर्श लेकर समझ सकती हैं कि बच्चेदानी निकालना सच में ज़रूरी है या पहले दूसरा इलाज आज़माया जा सकता है। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: दूरबीन से बच्चेदानी का ऑपरेशन।

गोपालगंज में हमारे यहां दूरबीन से बच्चेदानी का ऑपरेशन, वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी के साथ PFR, और ओवरी की सिस्ट के ऑपरेशन होते हैं, और अल्ट्रासाउंड व लैब जांच हमारे अस्पताल में ही होती है। ओपीडी के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बच्चेदानी में हर गांठ के लिए बच्चेदानी निकालनी पड़ती है?

नहीं। बहुत सी गांठें छोटी होती हैं और कोई तकलीफ़ नहीं देतीं, उनमें आमतौर पर समय-समय पर जांच ही काफ़ी है। जिन गांठों से ज़्यादा खून, दर्द या दबाव हो, उनका इलाज अक्सर पहले दवा, हार्मोन वाले इलाज या सही मामलों में सिर्फ़ गांठ निकालकर किया जा सकता है। बच्चेदानी निकालने पर तब सोचा जाता है जब तकलीफ़ ज़्यादा हो, दूसरे इलाज काम न करें और आगे बच्चा न चाहिए।

क्या बच्चेदानी निकालने से जल्दी मेनोपॉज़ हो जाता है?

बच्चेदानी निकलने के बाद माहवारी बंद हो जाती है, पर अगर ओवरी बचा ली गई है तो वह आमतौर पर हार्मोन बनाती रहती है, इसलिए अचानक मेनोपॉज़ नहीं होता। कुछ महिलाओं में प्राकृतिक मेनोपॉज़ थोड़ा पहले आ सकता है। अगर माहवारी बंद होने से पहले दोनों ओवरी निकाल दी जाएं, तो मेनोपॉज़ तुरंत शुरू हो जाता है और गर्मी की लहरें जैसी तकलीफ़ें होती हैं। इसलिए ओवरी का फैसला पहले साफ़ करें।

दूरबीन, योनि के रास्ते या खुला ऑपरेशन, कौन-सा बेहतर है?

हर महिला के लिए एक ही तरीका सबसे अच्छा नहीं होता। दूरबीन के ऑपरेशन में आमतौर पर खुले ऑपरेशन से कम दर्द होता है और जल्दी आराम मिलता है। योनि के रास्ते ऑपरेशन में पेट पर चीरा नहीं लगता और बच्चेदानी खिसकने में यह अक्सर ठीक रहता है। बहुत बड़ी बच्चेदानी, कुछ कैंसर या पुराने ऑपरेशन के चिपकाव में खुला ऑपरेशन करना पड़ सकता है। हमारे सर्जन जांच के बाद तरीका बताते हैं।

बच्चेदानी के ऑपरेशन के बाद कितना आराम चाहिए?

दूरबीन या योनि वाले ऑपरेशन के बाद ज़्यादातर महिलाएं लगभग 1 से 3 दिन अस्पताल में रहती हैं, और खुले ऑपरेशन में कुछ ज़्यादा। घर का हल्का काम आमतौर पर एक-दो हफ़्ते में शुरू हो सकता है, पर भारी वज़न उठाना और पति के साथ संबंध लगभग 6 हफ़्ते तक, या हमारे सर्जन की सलाह तक, टालें। ज़्यादा खून, बुखार या बदबूदार पानी आए तो तुरंत बताएं।

बच्चेदानी का ऑपरेशन क्यों होता है?

बच्चेदानी का ऑपरेशन आम तौर पर तब सोचा जाता है जब गांठ (फाइब्रॉयड), एडेनोमायोसिस या ज़्यादा खून आने से खून की कमी या तेज़ दर्द जैसी बड़ी तकलीफ़ हो, दवा और दूसरे इलाज से फ़ायदा न हो, और आगे बच्चा न चाहिए। कुछ कैंसर और कैंसर से पहले के बदलावों में, और अक्सर बच्चेदानी खिसकने में भी इसकी सलाह दी जाती है। फ़ैसला जांच और अल्ट्रासाउंड के बाद होता है।

दूरबीन से बच्चेदानी का ऑपरेशन क्या है?

इसे लेप्रोस्कोपिक हिस्टेरेक्टॉमी कहते हैं। इसमें पेट पर कुछ छोटे छेद करके कैमरा और बारीक औज़ारों से बच्चेदानी निकाली जाती है। खुले ऑपरेशन के मुकाबले आम तौर पर दर्द कम होता है और आराम जल्दी मिलता है। लेकिन यह हर महिला के लिए ठीक नहीं, जैसे बहुत बड़ी बच्चेदानी या पुराने ऑपरेशन के ज़्यादा चिपकाव में। सही तरीका हमारे सर्जन जांच के बाद बताते हैं।

हम सीवान या छपरा से हैं, क्या गोपालगंज में बच्चेदानी की जांच और इलाज हो सकता है?

हां। सीवान, छपरा और आसपास के ज़िलों से महिलाएं डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हमारे पास आती हैं। हमारे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और लैब जांच होती है, और हम दूरबीन से बच्चेदानी का ऑपरेशन और वेजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी के साथ PFR जैसे ऑपरेशन करते हैं। जांच के समय आप महिला स्टाफ़ को साथ रखने के लिए कह सकती हैं। ओपीडी के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें।

स्रोत और आगे पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

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डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल मेडिकल टीम
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल मेडिकल टीम

डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज की मेडिकल टीम की ओर से स्वास्थ्य जानकारी। अपनी बीमारी के बारे में सलाह के लिए कृपया हमारे डॉक्टर से मिलें।

यह जानकारी सिर्फ़ जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं। इलाज हर मरीज़ की हालत देखकर तय होता है।

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डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, लेप्रोस्कोपिक सर्जन, डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज

डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर

संस्थापक एवं मुख्य सर्जन: लेप्रोस्कोपिक, लेजर, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन

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