लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के नुकसान और फायदे: पूरी सच्ची जानकारी

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के नुकसान और फायदे: पूरी सच्ची जानकारी

हम दूरबीन के ऑपरेशन के असली फायदे, गैस और कंधे के दर्द जैसे आम नुकसान, दुर्लभ ख़तरे और चीरे वाले ऑपरेशन में बदलने की स्थिति समझाते हैं, और यह भी बताते हैं कि किन मरीज़ों के लिए यह ठीक नहीं है।

मुख्य बातें

  • चीरे वाले ऑपरेशन की तुलना में ज़्यादातर मरीज़ों को दूरबीन के ऑपरेशन के बाद कम दर्द, छोटे निशान, कम दिन भर्ती और जल्दी काम पर वापसी मिलती है।
  • आम नुकसान हैं गैस से कंधे में दर्द, पेट फूलना, छेदों पर दर्द और गले में ख़राश। ये आम तौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं।
  • खून बहना, इन्फेक्शन या आसपास के अंगों में चोट जैसे गंभीर ख़तरे कम होते हैं। सही जांच और हमारी अनुभवी टीम इन्हें और भी कम रखती है।
  • कुछ मरीज़ों में सुरक्षा के लिए हमारे सर्जन चीरे वाला ऑपरेशन करते हैं। यह सोच समझकर लिया गया फ़ैसला है, नाकामी नहीं।
  • दिल या फेफड़े की गंभीर बीमारी, बिना इलाज वाली खून बहने की बीमारी या घने चिपकाव में दूरबीन का ऑपरेशन शायद ठीक न हो। हमारे सर्जन हर मरीज़ के लिए अलग से फ़ैसला करते हैं।

लेप्रोस्कोपी (दूरबीन से ऑपरेशन) ने आम ऑपरेशनों का तरीका बदल दिया है। ऑपरेशन के लिए हां कहने से पहले गोपालगंज और आसपास के परिवार अक्सर हमसे दो सवाल पूछते हैं: इसके फायदे क्या हैं, और इसके नुकसान क्या हैं? यहां हम लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के नुकसान और फायदे, दोनों ईमानदारी से और सरल शब्दों में समझा रहे हैं, ताकि आप अपने सर्जन से भरोसे के साथ बात कर सकें।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है?

इसमें सर्जन एक बड़े चीरे की जगह कुछ छोटे छेद करते हैं, जो आम तौर पर आधे से एक सेंटीमीटर के होते हैं। पेट में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरकर जगह बनाई जाती है। कैमरे वाली एक पतली दूरबीन (लेप्रोस्कोप) अंदर की बड़ी तस्वीर स्क्रीन पर दिखाती है, और सर्जन लंबे, पतले औज़ारों से ऑपरेशन करते हैं। इसका इस्तेमाल पित्त की थैली की पथरी के ऑपरेशन, हर्निया के ऑपरेशन, अपेंडिक्स, बच्चेदानी, अंडाशय की गांठ और पेट दर्द की वजह जानने में होता है। हर स्टेप हमारे लेख दूरबीन से ऑपरेशन कैसे होता है में बताया गया है।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के नुकसान और फायदे: पहले फायदे जानें

बड़े चीरे वाले (ओपन) ऑपरेशन की तुलना में ज़्यादातर मरीज़ों को:

  • ऑपरेशन के बाद कम दर्द होता है, इसलिए दर्द की दवा कम लगती है।
  • छोटे निशान रहते हैं। छेद छोटे होते हैं, हालांकि हल्के निशान फिर भी रहते हैं।
  • अस्पताल में कम दिन रुकना पड़ता है। कई प्लान किए गए दूरबीन ऑपरेशनों के बाद ज़्यादातर मरीज़ 1 से 2 दिन में घर चले जाते हैं।
  • जल्दी चलना और खाना शुरू होता है, अक्सर उसी दिन या अगली सुबह।
  • जल्दी काम पर वापसी होती है। बहुत से लोग ऑपरेशन और काम के हिसाब से 1 से 2 हफ़्ते में हल्का काम करने लगते हैं।
  • घाव की दिक्कत कम होती है। छोटे छेदों में आम तौर पर बड़े घाव की तुलना में इन्फेक्शन और टांकों की जगह हर्निया बनने की संभावना कम रहती है।
  • साफ़ और बड़ी तस्वीर मिलती है, जिससे सर्जन अंगों को बारीकी से देख पाते हैं।

इन्हीं फायदों की वजह से अब कई आम ऑपरेशन दूरबीन से ही किए जाते हैं। दोनों तरीकों की पूरी तुलना हमारे लेख दूरबीन और चीरे वाले ऑपरेशन में अंतर में पढ़ें।

दूरबीन ऑपरेशन के नुकसान: जो आम तौर पर होते हैं

ज़्यादातर तकलीफ़ें हल्की होती हैं और कुछ दिनों में ठीक हो जाती हैं। इसलिए हम ऑपरेशन से पहले ही इनके बारे में बता देते हैं, ताकि ऐसा होने पर आप परेशान न हों।

लेप्रोस्कोपी के बाद कंधे में दर्द

पेट के दूरबीन ऑपरेशन के बाद एक या दोनों कंधों में दर्द से कई मरीज़ हैरान होते हैं। ऑपरेशन में इस्तेमाल हुई कुछ गैस थोड़े समय तक पेट में रह जाती है और डायफ्राम (फेफड़ों के नीचे की मांसपेशी) को छेड़ती है। डायफ्राम और कंधे की नसें जुड़ी होती हैं, इसलिए दर्द कंधे में महसूस होता है। यह आम तौर पर 1 से 3 दिन में ठीक हो जाता है। चलने फिरने और हमारी दी गई दवा से आराम मिलता है।

गैस, पेट फूलना और बेचैनी

कुछ दिन पेट भरा हुआ, फूला हुआ या कसा हुआ लग सकता है। कुछ मरीज़ों को बेहोशी की दवा से हल्का जी मिचलाता है। पानी के घूंट, हल्का खाना और चलना मदद करते हैं।

छेदों पर दर्द और नील

छोटे घावों में दर्द और हल्का नीलापन हो सकता है, जो लगभग एक हफ़्ते में ठीक हो जाता है।

गले में ख़राश और थकान

बेहोशी के दौरान सांस की नली लगाई जाती है, इसलिए एक दो दिन गला ख़राब लग सकता है। किसी भी ऑपरेशन के बाद कुछ दिन थकान होना सामान्य है।

त्वचा के नीचे चरचराहट

कभी कभी थोड़ी गैस त्वचा के नीचे जमा हो जाती है और दबाने पर चरचराहट सी लगती है। यह आम तौर पर नुकसान नहीं करती और अपने आप ठीक हो जाती है।

कम होने वाले ख़तरे

हर ऑपरेशन की तरह दूरबीन के ऑपरेशन में भी कुछ ख़तरे होते हैं। ये कम होते हैं, लेकिन हम मानते हैं कि आपको इनके बारे में पता होना चाहिए:

  • ऑपरेशन के दौरान या बाद में खून बहना।
  • छेद पर या पेट के अंदर इन्फेक्शन।
  • आसपास के अंगों, जैसे आंत, पेशाब की थैली, नसों या पित्त की थैली के ऑपरेशन में पित्त की नली में चोट। यह दुर्लभ है।
  • बाद में किसी छेद पर हर्निया, ज़्यादातर नाभि पर।
  • पैरों की नसों में खून का थक्का, ख़ासकर बुज़ुर्गों या कम चलने फिरने वाले मरीज़ों में।
  • बेहोशी की दवा से रिएक्शन या छाती में इन्फेक्शन।

हमारे अस्पताल में ऑपरेशन से पहले सही जांच, हमारी अनुभवी सर्जिकल और बेहोशी की टीम, कीटाणुरहित तरीका और ऑपरेशन के बाद जल्दी चलना, इन ख़तरों को कम रखते हैं। आपके ऑपरेशन से जुड़े ख़तरे हमारे सर्जन आपको ख़ुद समझाएंगे।

चीरे वाले ऑपरेशन में बदलना

कुछ मरीज़ों में सर्जन को ऑपरेशन के दौरान दूरबीन छोड़कर चीरे वाला ऑपरेशन करना पड़ता है। ऐसा ज़्यादा सूजन, छोटे छेदों से न रुकने वाले खून, पुराने ऑपरेशन के चिपकाव, या अंग साफ़ न दिखने पर होता है। यह सुरक्षा का फ़ैसला है, नाकामी नहीं। ऐसा होने पर रिकवरी में आम तौर पर चीरे वाले ऑपरेशन जितना समय लगता है। इसीलिए हमारे सहमति पत्र में इसका ज़िक्र होता है, और इसीलिए आपके सर्जन को दोनों तरीकों में प्रशिक्षित होना चाहिए। हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर दूरबीन और चीरे वाले, दोनों तरह के ऑपरेशन करते हैं।

क्या लेप्रोस्कोपिक सर्जरी सुरक्षित है? किनके लिए ठीक नहीं

ज़्यादातर लोगों के लिए दूरबीन का ऑपरेशन सुरक्षित और आज़माया हुआ तरीका है। लेकिन यह हर किसी के लिए सही विकल्प नहीं है। हमारे सर्जन चीरे वाले ऑपरेशन या अतिरिक्त सावधानी की सलाह दे सकते हैं, अगर:

  • दिल या फेफड़े की गंभीर बीमारी हो, क्योंकि गैस और बेहोशी से दिल और फेफड़ों पर ज़्यादा ज़ोर पड़ता है।
  • पेट के पहले कई बड़े ऑपरेशन हो चुके हों, जिनसे अंदर घना चिपकाव बन सकता है।
  • खून बहने की ऐसी बीमारी हो जो ठीक न की गई हो।
  • बहुत बड़ी गांठ हो या कोई अंग बहुत ज़्यादा सूजा हो।
  • गर्भावस्था के आख़िरी महीने हों, या इमरजेंसी में मरीज़ की हालत बहुत नाज़ुक हो, जैसे शॉक।

सिर्फ़ ज़्यादा उम्र आम तौर पर दूरबीन के ऑपरेशन से बचने की वजह नहीं है। सही फिटनेस जांच के बाद बहुत से बुज़ुर्ग मरीज़ अच्छी तरह ठीक होते हैं। डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हमारे विज़िटिंग हृदय रोग विशेषज्ञ ऑपरेशन से पहले दिल की फिटनेस जांच कर सकते हैं, और जिन मरीज़ों को कड़ी निगरानी चाहिए, उनके लिए हमारे पास आईसीयू है।

दिक्कत की संभावना कैसे कम करें

  • अपनी सभी बीमारियां और दवाएं हमें बताएं, ख़ासकर खून पतला करने की, शुगर और बीपी की दवा।
  • ऑपरेशन से पहले शुगर और बीपी काबू में रखें।
  • बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू जितनी जल्दी हो सके छोड़ें।
  • खाली पेट रहने के हमारे निर्देश ठीक से मानें।
  • ऑपरेशन के बाद सलाह के अनुसार चलना शुरू करें और हमारी बताई विधि से घाव की देखभाल करें।

ऑपरेशन के बाद के हफ़्तों के लिए कृपया हमारा लेख पढ़ें: दूरबीन ऑपरेशन के बाद रिकवरी।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

ऑपरेशन के बाद इनमें से कुछ भी हो तो कृपया तुरंत हमसे संपर्क करें:

  • बुखार, या छेद पर लाली, सूजन या मवाद।
  • पेट दर्द जो कम होने की जगह बढ़ता जाए, या पेट फूलकर सख़्त हो जाए।
  • बार बार उल्टी, या पेशाब या गैस न निकले।
  • पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद आंखें पीली हों।
  • सांस फूलना, सीने में दर्द, या एक पैर में सूजन और दर्द।

अगर आप ऑपरेशन के बारे में सोच रहे हैं और जानना चाहते हैं कि दूरबीन का तरीका आपके लिए ठीक है या नहीं, तो कृपया हमारी ओपीडी में डॉ. ठाकुर से मिलें। वे डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक मरीज़ देखते हैं। कृपया ओपीडी के लिए +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें। हमारी इमरजेंसी 24 घंटे खुली रहती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के नुकसान और फायदे क्या हैं?

फायदे: चीरे वाले ऑपरेशन की तुलना में ज़्यादातर मरीज़ों को कम दर्द, छोटे निशान, कम दिन भर्ती और जल्दी काम पर वापसी। नुकसान: गैस से कुछ दिन कंधे में दर्द, पेट फूलना, छेदों पर दर्द, और हर ऑपरेशन की तरह खून बहना, इन्फेक्शन या अंगों में चोट जैसे दुर्लभ ख़तरे। कुछ मरीज़ों में सुरक्षा के लिए चीरे वाला ऑपरेशन करना पड़ सकता है। हमारे सर्जन आपकी स्थिति के अनुसार सब कुछ समझाएंगे।

दूरबीन ऑपरेशन के नुकसान क्या लंबे समय तक रहते हैं?

आम तौर पर नहीं। ज़्यादातर तकलीफ़ें कुछ दिनों से दो हफ़्तों में ठीक हो जाती हैं। कुछ मरीज़ों में लंबी दिक्कत हो सकती है, जैसे किसी छेद पर हर्निया, लगातार दर्द, या पित्त की थैली निकलने के बाद कुछ हफ़्ते तला खाना खाने पर पतला पाखाना। ये कम होती हैं और आम तौर पर इनका इलाज हो जाता है। फॉलो-अप के लिए हमारे पास आते रहने से कोई भी दिक्कत जल्दी पकड़ में आ जाती है।

लेप्रोस्कोपी के बाद कंधे में दर्द क्यों होता है?

पेट में जगह बनाने के लिए भरी गई कार्बन डाइऑक्साइड गैस का कुछ हिस्सा थोड़े समय तक अंदर रह जाता है और डायफ्राम (फेफड़ों के नीचे की मांसपेशी) को छेड़ता है। डायफ्राम और कंधे की नसें जुड़ी होती हैं, इसलिए दर्द कंधे में लगता है। यह आम तौर पर 1 से 3 दिन में ठीक हो जाता है, और चलने से आराम मिलता है। सीने में दर्द या सांस फूलना अलग बात है, ऐसा हो तो कृपया तुरंत हमसे संपर्क करें।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के मुख्य फायदे क्या हैं?

चीरे वाले ऑपरेशन की तुलना में ज़्यादातर मरीज़ों को कम दर्द, छोटे निशान, अस्पताल में कम दिन, जल्दी चलना और खाना, और जल्दी काम पर वापसी मिलती है। घाव में इन्फेक्शन और टांकों की जगह हर्निया आम तौर पर कम होते हैं। कैमरे की बड़ी तस्वीर से हमारे सर्जन को अंदर साफ़ दिखता है। असली फायदे आपके ऑपरेशन और सेहत पर निर्भर करते हैं, और किसी भी फ़ैसले से पहले हम ये आपको समझाते हैं।

क्या लेप्रोस्कोपिक सर्जरी सुरक्षित है, ख़ासकर बुज़ुर्गों के लिए?

ज़्यादातर लोगों के लिए, कई बुज़ुर्गों समेत, सही फिटनेस जांच के बाद दूरबीन का ऑपरेशन सुरक्षित है। सिर्फ़ उम्र आम तौर पर रुकावट नहीं है। ऑपरेशन से पहले हम दिल, फेफड़े और किडनी की सेहत, शुगर और दवाएं जांचते हैं। दिल या फेफड़े की गंभीर बीमारी में हमारे सर्जन अतिरिक्त सावधानी या चीरे वाले ऑपरेशन की सलाह दे सकते हैं। हम हर मरीज़ के लिए अलग से फ़ैसला करते हैं।

क्या दूरबीन का ऑपरेशन चीरे वाले ऑपरेशन में बदल सकता है?

हां, कुछ मरीज़ों में। ज़्यादा सूजन, खून बहने, घने चिपकाव या अंदर की बनावट साफ़ न दिखने पर हमारे सर्जन सुरक्षा के लिए चीरे वाला ऑपरेशन कर सकते हैं। इसे कन्वर्ज़न कहते हैं। यह आपकी सुरक्षा के लिए सोच समझकर लिया गया फ़ैसला है, नाकामी नहीं। ऐसा होने पर रिकवरी में आम तौर पर ज़्यादा समय लगता है।

किन मरीज़ों को लेप्रोस्कोपिक सर्जरी नहीं करानी चाहिए?

दिल या फेफड़े की गंभीर बीमारी, बिना इलाज वाली खून बहने की बीमारी, पहले कई बड़े ऑपरेशन से बना घना चिपकाव, बहुत बड़ी गांठ, या इमरजेंसी में बहुत नाज़ुक हालत हो, तो हो सकता है कि दूरबीन का ऑपरेशन ठीक न रहे। गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में भी ख़ास सावधानी चाहिए। ऐसे में भी हमारे सर्जन कई बार सावधानी के साथ यह ऑपरेशन कर सकते हैं। हम आपकी जांच करके और रिपोर्ट देखकर ही फ़ैसला करते हैं।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के नुकसान और फायदे चीरे वाले ऑपरेशन से कैसे अलग हैं?

ज़्यादातर मरीज़ों में दूरबीन के ऑपरेशन से कम दर्द, घाव की कम दिक्कत और जल्दी रिकवरी होती है, जबकि चीरे वाले ऑपरेशन में बड़ा घाव और ज़्यादा दिन आराम लगता है। फिर भी दूरबीन के अपने नुकसान हैं, जैसे गैस से कंधे में दर्द और पेट फूलना, और हर ऑपरेशन के सामान्य ख़तरे भी। कुछ मरीज़ों के लिए चीरे वाला ऑपरेशन ही ज़्यादा सुरक्षित होता है। आपके लिए कौन सा तरीका ठीक है, यह हमारे सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर आपको बताएंगे।

स्रोत और आगे पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

टैग:
  • laparoscopic surgery
  • side effects
  • benefits
  • shoulder pain
  • patient safety
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल मेडिकल टीम
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल मेडिकल टीम

डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज की मेडिकल टीम की ओर से स्वास्थ्य जानकारी। अपनी बीमारी के बारे में सलाह के लिए कृपया हमारे डॉक्टर से मिलें।

यह जानकारी सिर्फ़ जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं। इलाज हर मरीज़ की हालत देखकर तय होता है।

मुफ़्त परामर्श के लिए संपर्क करें

अपना नाम और फ़ोन नंबर दें। हमारी टीम आपको कॉल करके ओपीडी का समय तय करेगी।

कॉल करेंव्हाट्सऐप