लेप्रोस्कोपी (दूरबीन से ऑपरेशन) ने आम ऑपरेशनों का तरीका बदल दिया है। ऑपरेशन के लिए हां कहने से पहले गोपालगंज और आसपास के परिवार अक्सर हमसे दो सवाल पूछते हैं: इसके फायदे क्या हैं, और इसके नुकसान क्या हैं? यहां हम लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के नुकसान और फायदे, दोनों ईमानदारी से और सरल शब्दों में समझा रहे हैं, ताकि आप अपने सर्जन से भरोसे के साथ बात कर सकें।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी क्या है?
इसमें सर्जन एक बड़े चीरे की जगह कुछ छोटे छेद करते हैं, जो आम तौर पर आधे से एक सेंटीमीटर के होते हैं। पेट में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरकर जगह बनाई जाती है। कैमरे वाली एक पतली दूरबीन (लेप्रोस्कोप) अंदर की बड़ी तस्वीर स्क्रीन पर दिखाती है, और सर्जन लंबे, पतले औज़ारों से ऑपरेशन करते हैं। इसका इस्तेमाल पित्त की थैली की पथरी के ऑपरेशन, हर्निया के ऑपरेशन, अपेंडिक्स, बच्चेदानी, अंडाशय की गांठ और पेट दर्द की वजह जानने में होता है। हर स्टेप हमारे लेख दूरबीन से ऑपरेशन कैसे होता है में बताया गया है।
लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के नुकसान और फायदे: पहले फायदे जानें
बड़े चीरे वाले (ओपन) ऑपरेशन की तुलना में ज़्यादातर मरीज़ों को:
- ऑपरेशन के बाद कम दर्द होता है, इसलिए दर्द की दवा कम लगती है।
- छोटे निशान रहते हैं। छेद छोटे होते हैं, हालांकि हल्के निशान फिर भी रहते हैं।
- अस्पताल में कम दिन रुकना पड़ता है। कई प्लान किए गए दूरबीन ऑपरेशनों के बाद ज़्यादातर मरीज़ 1 से 2 दिन में घर चले जाते हैं।
- जल्दी चलना और खाना शुरू होता है, अक्सर उसी दिन या अगली सुबह।
- जल्दी काम पर वापसी होती है। बहुत से लोग ऑपरेशन और काम के हिसाब से 1 से 2 हफ़्ते में हल्का काम करने लगते हैं।
- घाव की दिक्कत कम होती है। छोटे छेदों में आम तौर पर बड़े घाव की तुलना में इन्फेक्शन और टांकों की जगह हर्निया बनने की संभावना कम रहती है।
- साफ़ और बड़ी तस्वीर मिलती है, जिससे सर्जन अंगों को बारीकी से देख पाते हैं।
इन्हीं फायदों की वजह से अब कई आम ऑपरेशन दूरबीन से ही किए जाते हैं। दोनों तरीकों की पूरी तुलना हमारे लेख दूरबीन और चीरे वाले ऑपरेशन में अंतर में पढ़ें।
दूरबीन ऑपरेशन के नुकसान: जो आम तौर पर होते हैं
ज़्यादातर तकलीफ़ें हल्की होती हैं और कुछ दिनों में ठीक हो जाती हैं। इसलिए हम ऑपरेशन से पहले ही इनके बारे में बता देते हैं, ताकि ऐसा होने पर आप परेशान न हों।
लेप्रोस्कोपी के बाद कंधे में दर्द
पेट के दूरबीन ऑपरेशन के बाद एक या दोनों कंधों में दर्द से कई मरीज़ हैरान होते हैं। ऑपरेशन में इस्तेमाल हुई कुछ गैस थोड़े समय तक पेट में रह जाती है और डायफ्राम (फेफड़ों के नीचे की मांसपेशी) को छेड़ती है। डायफ्राम और कंधे की नसें जुड़ी होती हैं, इसलिए दर्द कंधे में महसूस होता है। यह आम तौर पर 1 से 3 दिन में ठीक हो जाता है। चलने फिरने और हमारी दी गई दवा से आराम मिलता है।
गैस, पेट फूलना और बेचैनी
कुछ दिन पेट भरा हुआ, फूला हुआ या कसा हुआ लग सकता है। कुछ मरीज़ों को बेहोशी की दवा से हल्का जी मिचलाता है। पानी के घूंट, हल्का खाना और चलना मदद करते हैं।
छेदों पर दर्द और नील
छोटे घावों में दर्द और हल्का नीलापन हो सकता है, जो लगभग एक हफ़्ते में ठीक हो जाता है।
गले में ख़राश और थकान
बेहोशी के दौरान सांस की नली लगाई जाती है, इसलिए एक दो दिन गला ख़राब लग सकता है। किसी भी ऑपरेशन के बाद कुछ दिन थकान होना सामान्य है।
त्वचा के नीचे चरचराहट
कभी कभी थोड़ी गैस त्वचा के नीचे जमा हो जाती है और दबाने पर चरचराहट सी लगती है। यह आम तौर पर नुकसान नहीं करती और अपने आप ठीक हो जाती है।
कम होने वाले ख़तरे
हर ऑपरेशन की तरह दूरबीन के ऑपरेशन में भी कुछ ख़तरे होते हैं। ये कम होते हैं, लेकिन हम मानते हैं कि आपको इनके बारे में पता होना चाहिए:
- ऑपरेशन के दौरान या बाद में खून बहना।
- छेद पर या पेट के अंदर इन्फेक्शन।
- आसपास के अंगों, जैसे आंत, पेशाब की थैली, नसों या पित्त की थैली के ऑपरेशन में पित्त की नली में चोट। यह दुर्लभ है।
- बाद में किसी छेद पर हर्निया, ज़्यादातर नाभि पर।
- पैरों की नसों में खून का थक्का, ख़ासकर बुज़ुर्गों या कम चलने फिरने वाले मरीज़ों में।
- बेहोशी की दवा से रिएक्शन या छाती में इन्फेक्शन।
हमारे अस्पताल में ऑपरेशन से पहले सही जांच, हमारी अनुभवी सर्जिकल और बेहोशी की टीम, कीटाणुरहित तरीका और ऑपरेशन के बाद जल्दी चलना, इन ख़तरों को कम रखते हैं। आपके ऑपरेशन से जुड़े ख़तरे हमारे सर्जन आपको ख़ुद समझाएंगे।
चीरे वाले ऑपरेशन में बदलना
कुछ मरीज़ों में सर्जन को ऑपरेशन के दौरान दूरबीन छोड़कर चीरे वाला ऑपरेशन करना पड़ता है। ऐसा ज़्यादा सूजन, छोटे छेदों से न रुकने वाले खून, पुराने ऑपरेशन के चिपकाव, या अंग साफ़ न दिखने पर होता है। यह सुरक्षा का फ़ैसला है, नाकामी नहीं। ऐसा होने पर रिकवरी में आम तौर पर चीरे वाले ऑपरेशन जितना समय लगता है। इसीलिए हमारे सहमति पत्र में इसका ज़िक्र होता है, और इसीलिए आपके सर्जन को दोनों तरीकों में प्रशिक्षित होना चाहिए। हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर दूरबीन और चीरे वाले, दोनों तरह के ऑपरेशन करते हैं।
क्या लेप्रोस्कोपिक सर्जरी सुरक्षित है? किनके लिए ठीक नहीं
ज़्यादातर लोगों के लिए दूरबीन का ऑपरेशन सुरक्षित और आज़माया हुआ तरीका है। लेकिन यह हर किसी के लिए सही विकल्प नहीं है। हमारे सर्जन चीरे वाले ऑपरेशन या अतिरिक्त सावधानी की सलाह दे सकते हैं, अगर:
- दिल या फेफड़े की गंभीर बीमारी हो, क्योंकि गैस और बेहोशी से दिल और फेफड़ों पर ज़्यादा ज़ोर पड़ता है।
- पेट के पहले कई बड़े ऑपरेशन हो चुके हों, जिनसे अंदर घना चिपकाव बन सकता है।
- खून बहने की ऐसी बीमारी हो जो ठीक न की गई हो।
- बहुत बड़ी गांठ हो या कोई अंग बहुत ज़्यादा सूजा हो।
- गर्भावस्था के आख़िरी महीने हों, या इमरजेंसी में मरीज़ की हालत बहुत नाज़ुक हो, जैसे शॉक।
सिर्फ़ ज़्यादा उम्र आम तौर पर दूरबीन के ऑपरेशन से बचने की वजह नहीं है। सही फिटनेस जांच के बाद बहुत से बुज़ुर्ग मरीज़ अच्छी तरह ठीक होते हैं। डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हमारे विज़िटिंग हृदय रोग विशेषज्ञ ऑपरेशन से पहले दिल की फिटनेस जांच कर सकते हैं, और जिन मरीज़ों को कड़ी निगरानी चाहिए, उनके लिए हमारे पास आईसीयू है।
दिक्कत की संभावना कैसे कम करें
- अपनी सभी बीमारियां और दवाएं हमें बताएं, ख़ासकर खून पतला करने की, शुगर और बीपी की दवा।
- ऑपरेशन से पहले शुगर और बीपी काबू में रखें।
- बीड़ी, सिगरेट और तंबाकू जितनी जल्दी हो सके छोड़ें।
- खाली पेट रहने के हमारे निर्देश ठीक से मानें।
- ऑपरेशन के बाद सलाह के अनुसार चलना शुरू करें और हमारी बताई विधि से घाव की देखभाल करें।
ऑपरेशन के बाद के हफ़्तों के लिए कृपया हमारा लेख पढ़ें: दूरबीन ऑपरेशन के बाद रिकवरी।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
ऑपरेशन के बाद इनमें से कुछ भी हो तो कृपया तुरंत हमसे संपर्क करें:
- बुखार, या छेद पर लाली, सूजन या मवाद।
- पेट दर्द जो कम होने की जगह बढ़ता जाए, या पेट फूलकर सख़्त हो जाए।
- बार बार उल्टी, या पेशाब या गैस न निकले।
- पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद आंखें पीली हों।
- सांस फूलना, सीने में दर्द, या एक पैर में सूजन और दर्द।
अगर आप ऑपरेशन के बारे में सोच रहे हैं और जानना चाहते हैं कि दूरबीन का तरीका आपके लिए ठीक है या नहीं, तो कृपया हमारी ओपीडी में डॉ. ठाकुर से मिलें। वे डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक मरीज़ देखते हैं। कृपया ओपीडी के लिए +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें। हमारी इमरजेंसी 24 घंटे खुली रहती है।





