बवासीर का लेज़र ऑपरेशन, जिसमें बड़ा चीरा नहीं लगता, उसके बारे में आजकल बहुत से मरीज़ हमसे पूछते हैं। अगर आपको खून वाली या बाहर निकलने वाली बवासीर है और डॉक्टर ने लेज़र की बात की है, तो आपके मन में सवाल होंगे: दर्द कितना होगा, कितने दिन काम छोड़ना पड़ेगा, परहेज क्या है और क्या बवासीर दोबारा हो सकती है। नीचे हमारी सर्जिकल टीम इन्हीं सवालों के सीधे और ईमानदार जवाब दे रही है, साथ में लेज़र, स्टेपलर (MIPH) और पुराने तरीके के ऑपरेशन की तुलना भी।
बवासीर का लेज़र ऑपरेशन क्या है?
बवासीर (पाइल्स) में गुदा के अंदर और आसपास की खून की नसें फूलकर मस्से बन जाती हैं। इनसे खून आ सकता है, शौच के समय मस्से बाहर आ सकते हैं, खुजली या भारीपन हो सकता है। लेज़र इलाज में सर्जन एक बहुत छोटे छेद से पतला लेज़र फाइबर हर मस्से के अंदर डालते हैं। नियंत्रित लेज़र ऊर्जा से मस्से की खून की सप्लाई बंद होती है और अगले कुछ हफ़्तों में मस्सा अंदर से सिकुड़ जाता है। बाहर बड़ा चीरा नहीं लगता और आमतौर पर टांके भी नहीं लगते।
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम यह इलाज डायोड लेज़र से करते हैं। आमतौर पर स्पाइनल एनेस्थीसिया (कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न करके) दिया जाता है और इसमें लगभग 20 से 45 मिनट लगते हैं। ज़्यादातर मरीज़ 1 दिन रुकते हैं, कुछ उसी दिन घर चले जाते हैं।
लेज़र ऑपरेशन किसके लिए सही है?
लेज़र हर मरीज़ के लिए सही तरीका नहीं है। डॉक्टर अंदर की बवासीर को 1 से 4 ग्रेड में बांटते हैं, इस हिसाब से कि मस्सा कितना बाहर आता है।
- अक्सर सही: ग्रेड 2 और ग्रेड 3 की बवासीर, जिसमें खून आता हो या मस्सा बाहर आकर अंदर चला जाता हो, और दवा व खान-पान बदलने से फ़ायदा न हुआ हो।
- दूसरा तरीका लग सकता है: ग्रेड 4 की बहुत बड़ी बवासीर जो हमेशा बाहर रहे, बाहर की बड़ी चमड़ी वाले मस्से, या बवासीर के साथ फिशर या भगंदर भी हो।
- अक्सर ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं: ग्रेड 1 की छोटी बवासीर, जो रेशेदार खाना, पानी और दवा से अक्सर ठीक हो जाती है।
किसी भी इलाज से पहले हमारे सर्जन पर्दे में जांच करके पक्का करते हैं कि खून सच में बवासीर से ही आ रहा है। गुदा से खून फिशर, पॉलिप या कभी-कभार आंत की गांठ से भी आ सकता है। इसलिए बड़ी उम्र में, या जब लक्षण मेल न खाएं, पहले कोलोनोस्कोपी जैसी जांच की सलाह दी जा सकती है।
लेज़र ऑपरेशन में दर्द होता है या नहीं?
हमारा सीधा जवाब है: ऑपरेशन के समय सुन्न करने की दवा दी जाती है, इसलिए उस वक्त दर्द महसूस नहीं होना चाहिए। ऑपरेशन के बाद बहुत से मरीज़ों को पुराने खुले ऑपरेशन से कम दर्द होता है, क्योंकि गुदा के आसपास की नाज़ुक चमड़ी पर बड़ा घाव नहीं बनता।
लेकिन यह कहना सही नहीं कि बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा। पहले कुछ दिन हल्की जलन, भारीपन या दुखन आम है, ख़ासकर पहली कुछ बार शौच जाते समय। दर्द की दवा, गुनगुने पानी की सिकाई और मल नरम करने की दवा से ज़्यादातर लोग आराम से रहते हैं।
लेज़र के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है?
ऑपरेशन वाला दिन
सुन्न करने की दवा का असर उतरने के बाद आप कुछ घंटों में चल-फिर सकते हैं और हमारी टीम की सलाह के अनुसार हल्का खाना शुरू कर सकते हैं।
पहला हफ़्ता
हल्की सूजन, थोड़ा खून या पानी जैसा रिसाव और भारीपन आम है। बहुत से लोग कुछ दिन से एक हफ़्ते के अंदर दुकान, दफ़्तर या घर का हल्का काम शुरू कर देते हैं।
दूसरा और तीसरा हफ़्ता
तकलीफ़ आमतौर पर कम हो जाती है। लगभग 2 से 3 हफ़्ते तक भारी वज़न उठाना, लंबी साइकिल या मोटरसाइकिल की सवारी और खेत का भारी काम टालें, या जैसी हमारे सर्जन सलाह दें।
चौथे से छठे हफ़्ते तक
इस दौरान इलाज किए गए मस्से धीरे-धीरे सिकुड़ते रहते हैं। पूरा नतीजा कुछ हफ़्ते बाद फॉलो-अप जांच में देखा जाता है।
मस्से बड़े हों, शुगर हो या कब्ज़ बनी रहे, तो ठीक होने में थोड़ा ज़्यादा समय लग सकता है। आपके लिए सही योजना हमारे सर्जन जांच के बाद तय करते हैं।
बवासीर के लेज़र ऑपरेशन के बाद परहेज और देखभाल
- रोज़ रेशेदार खाना खाएं: दाल, हरी सब्ज़ियां, पपीता और अमरूद जैसे फल, चोकर वाले आटे की रोटी, और डॉक्टर कहें तो इसबगोल।
- इतना पानी पिएं कि पेशाब हल्का पीला रहे।
- मल नरम करने की दवा और दर्द की दवा ठीक वैसे ही लें जैसे लिखी गई है। नरम करने की दवा बीच में खुद से बंद न करें।
- दिन में 2 से 3 बार और हर बार शौच के बाद 10 से 15 मिनट गुनगुने पानी के टब में बैठें (सिट्ज़ बाथ)।
- शौच में ज़ोर न लगाएं और देर तक न बैठें।
- शुरू के कुछ हफ़्ते ज़्यादा मिर्च-मसाला, तला-भुना और शराब से बचें, इनसे जलन और कब्ज़ बढ़ सकती है।
क्या लेज़र के बाद बवासीर दोबारा हो सकती है?
हां, हो सकती है। लेज़र हो, स्टेपलर हो या पुराना ऑपरेशन, कोई भी तरीका यह वादा नहीं कर सकता कि बवासीर फिर कभी नहीं होगी। जिन मस्सों का इलाज हुआ, वे आमतौर पर उसी रूप में नहीं लौटते, पर अगर वजहें बनी रहें तो समय के साथ नए मस्से बन सकते हैं। हमारे इलाके में आम वजहें हैं: पुरानी कब्ज़, गर्मी में कम पानी पीना, शौच में ज़ोर लगाना, घंटों बैठे रहना, भारी वज़न उठाना और गर्भावस्था।
अगर आप मल को हमेशा नरम रखने की आदत बना लें, सिर्फ़ कुछ हफ़्तों के लिए नहीं, तो दोबारा होने का खतरा कम रहता है। बहुत बड़ी बवासीर में अकेला लेज़र काफ़ी नहीं भी हो सकता, इसलिए शुरू में सही तरीका चुनना ज़रूरी है।
लेज़र, स्टेपलर (MIPH) या पुराना ऑपरेशन: फ़र्क क्या है?
लेज़र
ग्रेड 2 और 3 की बवासीर में अक्सर सही रहता है। छोटा छेद, बड़ा घाव नहीं, और बहुत से मरीज़ों में कम दर्द व जल्दी काम पर लौटना। बाहर की बड़ी चमड़ी वाली बहुत बड़ी बवासीर में यह कम कारगर हो सकता है।
स्टेपलर (MIPH)
इसमें गोल स्टेपलर से मस्सों के ऊपर की ढीली परत का एक छल्ला निकालकर एक ही बार में स्टेपल कर दिया जाता है, जिससे मस्से ऊपर अपनी जगह पर खिंच जाते हैं। यह अक्सर उस बवासीर में चुना जाता है जो बाहर आती है और हाथ से अंदर करनी पड़ती है। कट सबसे नाज़ुक हिस्से से ऊपर होता है, इसलिए दर्द आमतौर पर पुराने ऑपरेशन से कम होता है।
पुराना (खुला) ऑपरेशन
इसमें मस्सों को काटकर निकाला जाता है। बाहर की बड़ी बवासीर में यह अच्छा काम करता है, पर खुले घाव की वजह से दर्द ज़्यादा होता है और घाव भरने में कुछ हफ़्ते लगते हैं।
आपके लिए कौन सा तरीका सही है, यह आपकी जांच से तय होता है, पड़ोसी के ऑपरेशन से नहीं। ज़्यादा जानकारी के लिए बवासीर का लेज़र और स्टेपलर इलाज पेज देखें। अगर शौच के समय कांच चुभने जैसा तेज़ दर्द मुख्य दिक्कत है, तो यह फिशर हो सकता है, जिसका इलाज अलग है। इसके लिए फिशर का इलाज और बवासीर, फिशर और भगंदर में फ़र्क वाला लेख पढ़ें।
खर्च और आयुष्मान कार्ड
खर्च इलाज के तरीके, ज़रूरी जांचों, भर्ती के दिनों और कमरे पर निर्भर करता है, और भर्ती से पहले हम यह साफ़-साफ़ बता देते हैं। आयुष्मान भारत कार्ड वाले मरीज़ हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पूछ सकते हैं कि पैकेज के नियमों के हिसाब से उनका इलाज कवर है या नहीं।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- गुदा से पहली बार खून आए, या बार-बार आता रहे
- मस्सा बाहर आए और हाथ से अंदर करना पड़े, या अंदर न जाए
- गुदा के पास दर्द वाली सख्त, नीली सी गांठ
- शौच की आदत में बदलाव, वज़न घटना या कमज़ोरी, ख़ासकर 40 से 45 साल की उम्र के बाद
- लेज़र ऑपरेशन के बाद: ज़्यादा खून आना, बुखार, लगातार बढ़ता तेज़ दर्द, या पेशाब न उतरना। कृपया तुरंत हमारे पास आएं, हमारी इमरजेंसी 24 घंटे खुली है।
शर्म की वजह से बहुत लोग सालों तक बवासीर झेलते रहते हैं। इसकी कोई ज़रूरत नहीं। डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, जो हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन हैं और 16 साल से ज़्यादा अनुभव वाले लेप्रोस्कोपिक, लेज़र, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन हैं, हर मरीज़ की पर्दे में जांच करते हैं और फ़ैसले से पहले हर विकल्प समझाते हैं। गोपालगंज के साथ सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया और पास के उत्तर प्रदेश से भी मरीज़ हमारे पास आते हैं। ओपीडी (सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 से शाम 7 बजे) के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें।



