भगंदर का इलाज बिना ऑपरेशन हो सकता है या नहीं, यह हमारे पास आने वाले उन मरीज़ों का सबसे आम सवाल है जिन्हें पता चलता है कि उन्हें भगंदर (फिस्टुला) है। मन में यह उम्मीद होना स्वाभाविक है कि गोली, मलहम या कोई घरेलू नुस्खा काफ़ी होगा। इसका ईमानदार जवाब यह है कि ज़्यादातर भगंदर सिर्फ़ दवा से बंद नहीं होते, लेकिन आज के ऑपरेशन कई लोगों की सोच से छोटे होते हैं और उनसे जल्दी आराम मिलता है। सही जानकारी समय पर मिल जाए तो सालों का मवाद, दर्द और बार-बार फोड़ा बनने से बचा जा सकता है।
भगंदर (फिस्टुला) क्या है?
भगंदर एक छोटी सुरंग जैसी नली है, जो गुदा के अंदर से शुरू होकर गुदा के पास की चमड़ी पर एक छेद में खुलती है। यह आमतौर पर गुदा के अंदर की एक छोटी ग्रंथि में फोड़ा (मवाद की थैली) बनने से शुरू होता है। फोड़ा फूटने या निकाले जाने के बाद पीछे यह नली रह जाती है। आम लक्षण ये हैं:
- गुदा के पास छोटा छेद, जिससे बार-बार मवाद, खून या पानी रिसता रहे
- कपड़ों पर दाग, खुजली और चमड़ी में जलन
- दर्द और सूजन बढ़ना, फिर मवाद निकलने पर आराम, और यह बार-बार होना
- नया फोड़ा बनने पर बुखार
यह बवासीर और फिशर से अलग बीमारी है, हालांकि लोग अक्सर इन्हें एक समझ लेते हैं। फ़र्क जानने के लिए कृपया हमारा बवासीर, फिशर और भगंदर में फ़र्क वाला लेख पढ़ें।
क्या भगंदर का इलाज बिना ऑपरेशन संभव है?
ज़्यादातर भगंदर में ईमानदार जवाब है: नहीं। इस नली के अंदर अपनी एक परत बन जाती है, और परत बनने के बाद यह अपने आप बहुत कम बंद होती है। ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा NHS जैसी भरोसेमंद संस्थाएं भी बताती हैं कि भगंदर आमतौर पर अपने आप ठीक नहीं होता और ज़्यादातर मामलों में कोई प्रक्रिया (प्रोसीजर) ज़रूरी होती है।
कुछ हालात में दवा की भूमिका बड़ी होती है:
- क्रोन्स डिज़ीज़ (आंतों की लंबी चलने वाली सूजन) से बने भगंदर में बीमारी की दवा ज़रूरी है, अक्सर सेटॉन जैसी प्रक्रिया के साथ।
- टीबी से कभी-कभी भगंदर बनता है। ऐसे में टीबी की दवा का पूरा कोर्स ज़रूरी है, और प्रक्रिया के बाद टिश्यू की जांच से इसका पता चलता है।
- जो मरीज़ सुन्न करने या बेहोशी की दवा के लायक न हों, उन्हें कुछ समय दवा और पट्टी से संभाला जा सकता है।
ये अपवाद हैं, और इनका फ़ैसला हम पूरी जांच के बाद ही करते हैं, अंदाज़े से नहीं।
दवा और गोली क्या कर सकती हैं, क्या नहीं
दवा यह कर सकती है:
- इन्फेक्शन को कुछ समय के लिए शांत करना, सूजन और मवाद कम करना (एंटीबायोटिक)
- दर्द में आराम देना
- मल नरम करना, ताकि शौच में कम दर्द हो
- शुगर जैसी बीमारियों को काबू में रखना, जो घाव भरने में रुकावट डालती हैं
दवा नली को बंद नहीं कर सकती। इसीलिए बहुत से लोग गोली खाकर कुछ दिन ठीक महसूस करते हैं, और कुछ हफ़्ते बाद फिर मवाद और सूजन लौट आती है। बिना योजना के बार-बार एंटीबायोटिक लेने से बीमारी छिप जाती है, जबकि अंदर भगंदर धीरे-धीरे और उलझता जाता है।
इलाज टालने के खतरे
- बार-बार फोड़ा बनना, हर बार दर्द और कभी-कभी बुखार के साथ
- नली की नई शाखाएं बनना, जिससे सीधा-सादा भगंदर उलझा हुआ (कॉम्प्लेक्स) बन जाता है
- उलझे भगंदर में बड़ा ऑपरेशन और मल रोकने वाली मांसपेशी (स्फिंक्टर) पर ज़्यादा खतरा
- शुगर के मरीज़ों में गुदा के आसपास का इन्फेक्शन तेज़ी से फैलकर गंभीर हो सकता है
बिना सही योग्यता वाले इलाज से सावधान
कुछ लोग ऐसे व्यक्ति से धागा, लेप, पाउडर या केमिकल लगवा लेते हैं जिसके पास सही मेडिकल योग्यता नहीं होती। तेज़ केमिकल गुदा की चमड़ी और मांसपेशियों को जला सकते हैं, जिससे घाव के निशान, रास्ता सिकुड़ना या मल पर काबू खत्म होना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। ऐसे इलाज में क्रोन्स डिज़ीज़ या टीबी जैसी असली वजह भी छूट सकती है। जो भी इलाज करे, कृपया उसकी डिग्री ज़रूर देखें और पूछें कि असल में क्या किया जाएगा।
भगंदर का लेज़र इलाज और दूसरे छोटे तरीके
प्रक्रिया का मतलब हमेशा बड़ा ऑपरेशन नहीं होता। तरीका इस पर निर्भर करता है कि नली मल रोकने वाली मांसपेशियों के मुकाबले कहां से गुज़रती है। उलझे भगंदर में पहले नली का नक्शा देखने के लिए एमआरआई जांच की सलाह दी जा सकती है। भगंदर का इलाज कैसे होता है? इसके मुख्य तरीके ये हैं:
लेज़र से नली बंद करना (FiLaC)
एक पतला लेज़र फाइबर नली में डालकर उसकी अंदरूनी परत को अंदर से सील किया जाता है। यह चुने हुए मरीज़ों में किया जाता है, ख़ासकर कुछ ऊंचे या उलझे भगंदर में, जहां मांसपेशी को बचाना सबसे ज़रूरी हो। घाव छोटे होते हैं और अक्सर जल्दी आराम मिलता है। पर यह हर भगंदर को बंद नहीं करता, और कुछ मरीज़ों में दोबारा प्रक्रिया या दूसरा तरीका लगता है।
सेटॉन (धागा)
सेटॉन एक मुलायम सर्जिकल धागा है, जो कुछ हफ़्तों के लिए नली में डाला जाता है। इससे मवाद निकलता रहता है, इन्फेक्शन शांत होता है और मांसपेशी सुरक्षित रहती है। अक्सर यह आख़िरी प्रक्रिया से पहले का पहला कदम होता है।
फिस्टुलोटॉमी या फिस्टुलेक्टॉमी
नीचे वाले सीधे भगंदर में, जिसमें मांसपेशी कम शामिल हो, नली को खोल दिया जाता है (फिस्टुलोटॉमी) या निकाल दिया जाता है (फिस्टुलेक्टॉमी), और घाव अंदर से भरता है। सही मरीज़ों में यह भरोसेमंद तरीका है और ठीक होने की अच्छी संभावना रहती है।
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम डायोड लेज़र, सेटॉन और पारंपरिक, तीनों तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, और आपकी जांच के आधार पर आपके भगंदर के लिए सही तरीका चुनते हैं। ज़्यादा जानकारी के लिए कृपया हमारा भगंदर का ऑपरेशन और लेज़र इलाज पेज देखें।
ठीक होने में कितना समय लगता है?
ज़्यादातर मरीज़ 1 से 2 दिन भर्ती रहते हैं। दिन में 2 से 3 बार और हर शौच के बाद गुनगुने पानी की सिकाई, सिखाए गए तरीके से पट्टी, मल नरम करने की दवा और रेशेदार खाना घाव भरने में मदद करते हैं। ज़्यादातर लोग 1 से 2 हफ़्ते में हल्का काम शुरू कर देते हैं। खुला घाव अक्सर 4 से 6 हफ़्ते में भरता है, बड़ा हो तो ज़्यादा; लेज़र के बाद घाव छोटे होते हैं। किसी भी तरीके के बाद भगंदर दोबारा हो सकता है, इसलिए जब तक हमारे सर्जन पूरी तरह ठीक होने की पुष्टि न कर दें, कृपया हर फॉलो-अप पर आएं।
अगर अभी दर्द वाली सूजन है
गुदा के पास गरम, दर्द वाली सूजन, अक्सर बुखार के साथ, आमतौर पर फोड़ा होता है। सिर्फ़ एंटीबायोटिक से फोड़ा ठीक नहीं होता, मवाद निकालना पड़ता है। कृपया इसके फूटने का इंतज़ार न करें। ज़्यादा जानकारी के लिए हमारा फोड़े का ऑपरेशन (आई एंड डी) पेज देखें।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- गुदा के पास छोटा छेद, जिससे बार-बार मवाद या खून निकले
- गुदा के पास दर्द वाली सूजन, बुखार हो या न हो
- पहले इलाज के बाद भगंदर का लौट आना
- भगंदर के साथ दस्त, वज़न घटना या पेट दर्द, जो क्रोन्स डिज़ीज़ की ओर इशारा कर सकते हैं
- तुरंत हमारी इमरजेंसी में आएं अगर तेज़ बुखार, फैलती लाली, बहुत तेज़ दर्द हो या बहुत बीमार महसूस हो, ख़ासकर शुगर के मरीज़।
भगंदर के बारे में बात करने में शर्म आ सकती है, पर यह एक आम बीमारी है, और हमसे बात करने में संकोच की कोई ज़रूरत नहीं। डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर 16 साल से ज़्यादा अनुभव वाले लेप्रोस्कोपिक, लेज़र, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन हैं। वे हर मरीज़ की जांच पर्दे में करते हैं और हर विकल्प समझाते हैं, यह भी कि आपके लिए छोटा तरीका सही है या नहीं। पूरी जानकारी हमारे बवासीर, फिशर और भगंदर विभाग के पेज पर है। आयुष्मान कार्ड वाले मरीज़ हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पूछ सकते हैं कि उनका इलाज कवर है या नहीं। कृपया ओपीडी के लिए +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें।



