गुदा (पाखाने के रास्ते) में दर्द, खून या सूजन बहुत आम है, फिर भी बहुत से लोग शर्म की वजह से महीनों तक चुपचाप तकलीफ़ सहते रहते हैं। कृपया शर्माएं नहीं। हम अपनी ओपीडी में ऐसे मरीज़ नियमित रूप से देखते हैं, और जांच पर्दे में, कुछ ही मिनटों में हो जाती है। लोग अक्सर ऐसी हर परेशानी को बवासीर कह देते हैं, लेकिन असल में तीन अलग बीमारियां आम हैं: बवासीर, फिशर और भगंदर। तीनों का इलाज अलग है, इसलिए बवासीर, फिशर और भगंदर में अंतर समझना ज़रूरी है।
बवासीर (पाइल्स)
बवासीर में गुदा के अंदर या बाहर की खून की नसें फूल जाती हैं। पुरानी कब्ज़, ज़ोर लगाना, देर तक शौचालय में बैठना, गर्भावस्था और भारी वज़न उठाना इसकी आम वजहें हैं।
आम लक्षण:
- पाखाने के दौरान या बाद में चमकीला लाल खून, अक्सर बूंदों में या पाखाने पर लकीर की तरह। इसमें आम तौर पर दर्द नहीं होता।
- पाखाने के समय बाहर आने वाला मुलायम मस्सा, जो अपने आप अंदर जा सकता है, हाथ से अंदर करना पड़ सकता है, या बाहर ही रह सकता है।
- गुदा के पास खुजली, गीलापन या चिपचिपा पदार्थ।
- अचानक तेज़ दर्द के साथ सख़्त, नीला सा मस्सा, जो मस्से में खून का थक्का जमने से हो सकता है।
शुरुआती बवासीर अक्सर खानपान बदलने और दवा से ठीक हो जाती है। बड़े मस्से या बार बार खून आने पर बवासीर के प्रकार के हिसाब से स्टेपलर से बवासीर का ऑपरेशन (MIPH), लेज़र से इलाज या दूसरा ऑपरेशन करना पड़ सकता है।
फिशर
फिशर गुदा की अंदरूनी पतली झिल्ली में एक छोटी सी दरार या कट है। यह ज़्यादातर सख़्त, सूखा पाखाना ज़ोर लगाकर निकालने से होता है। कभी कभी बार बार दस्त या डिलीवरी के बाद भी हो जाता है।
आम लक्षण:
- पाखाने के समय तेज़, कटने या जलने जैसा दर्द, जैसे कांच निकल रहा हो।
- पाखाने के बाद कई मिनट या घंटों तक दर्द रहना।
- पाखाने या टिश्यू पेपर पर थोड़ा सा चमकीला लाल खून।
- दर्द के डर से शौच जाने से बचना, जिससे कब्ज़ और बढ़ती है।
- कभी कभी दरार के पास छोटा सा मस्सा।
नया फिशर अक्सर मुलायम पाखाना, भरपूर पानी, रेशेदार खाना, गुनगुने पानी में बैठने (सिट्ज़ बाथ) और डॉक्टर की दी मलहम से कुछ हफ़्तों में भर जाता है। कई हफ़्तों तक न भरने वाले पुराने फिशर में फिशर का ऑपरेशन करना पड़ सकता है।
भगंदर (फिस्टुला)
भगंदर गुदा के अंदर और गुदा के पास की त्वचा के बीच बनी एक पतली असामान्य सुरंग है। यह ज़्यादातर गुदा के पास फोड़ा (पस वाली दर्दनाक सूजन) फूटने या उसका पस निकाले जाने के बाद बनता है।
आम लक्षण:
- गुदा के पास एक छोटा छेद या फुंसी जैसी जगह, जिससे बार बार पस या खून मिला पानी निकलता है।
- कपड़ों पर दाग लगना, अक्सर बदबू के साथ।
- दर्द और सूजन बढ़ना, पस निकलने पर आराम, फिर दोबारा वही तकलीफ़।
- पस जमा होने पर कभी कभी बुखार।
भगंदर दवा या क्रीम से ठीक नहीं होता। एंटीबायोटिक से कुछ समय के लिए इन्फेक्शन कम हो सकता है, लेकिन सुरंग बनी रहती है। इसका इलाज भगंदर का ऑपरेशन है, जिसे इस तरह प्लान किया जाता है कि पाखाना रोकने वाली मांसपेशी सुरक्षित रहे। जटिल भगंदर में ऑपरेशन से पहले सुरंग का रास्ता देखने के लिए MRI की सलाह दी जा सकती है।
एक नज़र में फ़र्क
- मुख्य शिकायत: बवासीर में बिना दर्द खून या मस्सा; फिशर में पाखाने के समय और बाद में तेज़ दर्द; भगंदर में गुदा के पास छेद से बार बार पस।
- दर्द: बवासीर में आम तौर पर हल्का, जब तक थक्का न जमे; फिशर में तेज़; भगंदर में पस के साथ घटता बढ़ता।
- बिना ऑपरेशन ठीक होना: शुरुआती बवासीर और नया फिशर अक्सर ठीक हो जाते हैं; भगंदर नहीं।
यह सिर्फ़ एक आम जानकारी है। एक ही व्यक्ति को एक से ज़्यादा बीमारी हो सकती है, और सही कारण जांच से ही पता चलता है।
पाखाने में खून हमेशा बवासीर नहीं होता
गुदा से आने वाला ज़्यादातर खून बवासीर या फिशर से होता है। लेकिन आंत में पॉलिप (छोटी गांठ), आंत की सूजन या आंत के कैंसर से भी खून आ सकता है। बिना जांच के महीनों तक ख़ुद इलाज न करें। डॉक्टर कोलोनोस्कोपी की सलाह दे सकते हैं, जिसमें पतले कैमरे से बड़ी आंत के अंदर देखा जाता है, ख़ासकर अगर:
- आपकी उम्र 40 से ज़्यादा है और नया खून आ रहा है।
- खून गहरे रंग का है या पाखाने में मिला हुआ है।
- कई हफ़्तों से पाखाने की आदत बदली है, कब्ज़ या दस्त के साथ।
- वज़न या भूख घट रही है, या कमज़ोरी और थकान है, जो खून की कमी (एनीमिया) का संकेत हो सकता है।
- परिवार में किसी को आंत का कैंसर हुआ है।
- इलाज के बाद भी खून आना बंद नहीं हो रहा।
कुछ आसान उपाय
- रेशेदार खाना ज़्यादा खाएं: हरी सब्ज़ी, फल, मोटा अनाज, दाल और सलाद।
- दिन भर में भरपूर पानी पिएं।
- ज़ोर न लगाएं, और शौचालय में देर तक न बैठें, जैसे फ़ोन चलाते हुए।
- दर्द में आराम के लिए दिन में 2 से 3 बार, 10 से 15 मिनट गुनगुने पानी के टब में बैठें।
- उस जगह पर कोई भी लेप, केमिकल या घरेलू मिश्रण न लगाएं। इससे त्वचा जल सकती है और सही इलाज में देर होती है।
हमारे अस्पताल में इलाज के विकल्प
इलाज बीमारी और उसकी अवस्था पर निर्भर करता है। बहुत से मरीज़ सिर्फ़ खानपान बदलने और दवा से ठीक हो जाते हैं। जब प्रक्रिया या ऑपरेशन की ज़रूरत हो, तो डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हम स्टेपलर से बवासीर का ऑपरेशन (MIPH) और फिशर व भगंदर का ऑपरेशन करते हैं। हमारे यहां डायोड लेज़र की सुविधा भी है, जिससे सही मरीज़ों में बवासीर, फिशर और भगंदर का इलाज किया जा सकता है। लेज़र या स्टेपलर हर मरीज़ के लिए सही नहीं होता। हमारे सर्जन जांच करके बताएंगे कि आपके लिए कौन सा तरीका ठीक है।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- गुदा से किसी भी तरह का खून, ख़ासकर पहली बार या 40 साल की उम्र के बाद।
- पाखाने के समय दर्द जो एक दो हफ़्ते से ज़्यादा रहे।
- गुदा के पास दर्द वाली सूजन और बुखार। यह फोड़ा हो सकता है, जिसका जल्दी पस निकालना ज़रूरी है।
- गुदा के पास किसी छेद से पस या पानी निकलना।
- बहुत ज़्यादा खून, चक्कर या बेहोशी। तुरंत हमारी 24x7 इमरजेंसी में आएं।
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हम गोपालगंज, सीवान, छपरा और आसपास के ज़िलों के मरीज़ों की पर्दे में जांच करके बताते हैं कि उन्हें इन तीनों में से कौन सी बीमारी है। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: बवासीर का लेज़र और स्टेपलर से इलाज।
हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर और हमारी सर्जिकल टीम बवासीर, फिशर और भगंदर का इलाज ज़रूरत के हिसाब से दवा, प्रक्रिया या ऑपरेशन से करती है। ओपीडी में दिखाने के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें। आयुष्मान कार्ड वाले मरीज़ हमारे सहायता केंद्र से पूछ सकते हैं कि उनका इलाज कवर है या नहीं।



