
बवासीर का इलाज
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम बवासीर का इलाज पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ करते हैं। शुरुआती बवासीर में खानपान और दवा से, और ज़रूरत होने पर ग्रेड के हिसाब से लेज़र या MIPH स्टेपलर ऑपरेशन से।
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम बवासीर, फिशर, भगंदर और पिलोनिडल साइनस का इलाज पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ करते हैं, और जहां सही हो वहां लेजर और MIPH स्टेपलर से ऑपरेशन करते हैं।
गोपालगंज में बवासीर भगंदर का इलाज हम डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ करते हैं। हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर बवासीर और भगंदर के साथ फिशर और पिलोनिडल साइनस का इलाज भी करते हैं। अगर आपको गुदा से खून, दर्द, सूजन या मवाद की तकलीफ है, तो हम आपको ईमानदारी से बताते हैं कि कब दवा काफी है और कब लेजर, MIPH स्टेपलर या पारंपरिक ऑपरेशन बेहतर है। पूरे गोपालगंज ज़िले के साथ सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया, कुशीनगर और देवरिया से भी मरीज़ हमारे पास आते हैं, और सीवान के पास बवासीर का इलाज चाहने वाले बहुत से लोग हमारे अस्पताल को चुनते हैं। डॉ. ठाकुर को 16+ साल का सर्जिकल अनुभव है और वे 10,000+ ऑपरेशन कर चुके हैं। हमारे अस्पताल में डायोड लेजर और MIPH स्टेपलर दोनों हैं, इसलिए हम तरीका आपकी बीमारी के हिसाब से चुनते हैं। हमारी ओपीडी सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 से शाम 7 बजे तक है, या आप पहले +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करके अपने सवाल पूछ सकते हैं।
प्रोक्टोलॉजी का मतलब है गुदा (मलद्वार) और आंत के आखिरी हिस्से की बीमारियों का इलाज। बहुत से लोग खून आने, दर्द या मवाद की तकलीफ़ सालों तक झेलते रहते हैं, क्योंकि उन्हें बात करने में शर्म आती है, या वे जल्दी ठीक करने का दावा करने वाले नुस्खे आज़माते रहते हैं। ये समस्याएं आम हैं और इनका इलाज संभव है। हमारे अस्पताल में हम इनका इलाज पूरी गोपनीयता और सम्मान के साथ करते हैं।
आम बीमारियां हैं: बवासीर (पाइल्स, गुदा की फूली हुई नसें जिनसे खून आता है या मस्सा बाहर निकलता है), फिशर (गुदा में छोटा सा कट, जिससे शौच के समय तेज दर्द और जलन होती है), भगंदर (फिस्टुला) (गुदा के अंदर से बाहर की त्वचा तक बनी एक छोटी नली, जिससे बार बार मवाद निकलता है) और पिलोनिडल साइनस (कमर के नीचे, पूंछ की हड्डी के पास दर्द और मवाद वाला छेद)। गुदा के पास मवाद भरी दर्दनाक सूजन (फोड़ा) को जल्दी निकालना ज़रूरी होता है।
शुरुआती बवासीर और फिशर अक्सर रेशेदार भोजन, भरपूर पानी, मल नरम करने की दवा, गुनगुने पानी की सिंकाई और दवाओं से ठीक हो जाते हैं। ऑपरेशन की ज़रूरत हो तो सही मरीज़ों में हम बवासीर, फिशर, भगंदर और पिलोनिडल साइनस का डायोड लेजर से इलाज करते हैं, और बाहर निकलने वाली बवासीर के लिए हमारे पास MIPH स्टेपलर ऑपरेशन की सुविधा है। जहां बेहतर हो, वहां हम फिशर का ऑपरेशन और भगंदर का ऑपरेशन पारंपरिक तरीके से करते हैं। आपके लिए कौन सा तरीका सही है, यह हमारे सर्जन समझाते हैं।
गुदा से खून आना हमेशा बवासीर नहीं होता। अगर आपकी उम्र 40 से ज़्यादा है, वज़न घटा है या शौच की आदत बदली है, तो हम अपनी एंडोस्कोपी सेवा में कोलोनोस्कोपी की सलाह दे सकते हैं। इन बीमारियों का अंतर समझने के लिए कृपया पढ़ें: बवासीर, फिशर और भगंदर में अंतर।


हमारे यहां इलाज डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर की देखरेख में होता है, जो सीनियर कंसल्टेंट लेप्रोस्कोपिक, लेजर, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन हैं। उन्हें 16+ साल का सर्जिकल अनुभव है और वे 10,000+ ऑपरेशन कर चुके हैं। हमारे पास डायोड लेजर और MIPH स्टेपलर दोनों हैं, इसलिए हम हर मरीज़ पर एक ही तरीका नहीं अपनाते, बल्कि आपकी बीमारी के हिसाब से तरीका चुनते हैं। एंडोस्कोपी, पैथोलॉजी लैब और बेहोशी के विशेषज्ञ एक ही छत के नीचे हैं। हम हर विकल्प ईमानदारी से बताते हैं, यह भी कि कब ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं है, और कभी पक्के इलाज की गारंटी नहीं देते।
दोनों की अपनी जगह है। सही ग्रेड 2 और ग्रेड 3 बवासीर में अक्सर लेजर का इस्तेमाल होता है, और कई मरीज़ों को कम दर्द होता है और वे जल्दी काम पर लौटते हैं। बाहर निकलने वाली ग्रेड 3 और कुछ ग्रेड 4 बवासीर में MIPH स्टेपलर ऑपरेशन अच्छा रहता है। बहुत बड़े बाहरी मस्सों में पारंपरिक ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है। कब्ज़ बनी रहे तो बवासीर लौट भी सकती है। जांच के बाद हमारे सर्जन आपके लिए सही तरीका बताते हैं।
हमारे अस्पताल में बवासीर और भगंदर का इलाज हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर करते हैं। वे एमएस (जनरल सर्जरी) हैं, उन्हें 16+ साल का अनुभव है और वे 10,000+ ऑपरेशन कर चुके हैं। उन्होंने आईजीआईएमएस पटना और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली में काम किया है। हमारे पास डायोड लेजर और MIPH स्टेपलर है, और गूगल पर 84 समीक्षाओं से हमारे अस्पताल की रेटिंग 5 में से 4.4 है (सितंबर 2026)। आप हमारे मरीज़ों की राय गूगल पर पढ़ सकते हैं।
बहुत से लोगों को शर्म आती है, हम यह समझते हैं। हम जांच अलग जगह पर, गोपनीयता के साथ करते हैं, इसमें कुछ ही मिनट लगते हैं और पहले आपको पूरी बात समझाई जाती है। केवल ज़रूरी स्टाफ मौजूद रहता है और हम आपकी जानकारी गोपनीय रखते हैं। सही जांच इसलिए ज़रूरी है क्योंकि बवासीर, फिशर, भगंदर और कभी कभी गंभीर बीमारियों के लक्षण मिलते जुलते होते हैं। देर करने से इलाज अक्सर मुश्किल हो जाता है, इसलिए कृपया इंतज़ार न करें।
आम तौर पर नहीं। भगंदर गुदा के अंदर से त्वचा तक बनी एक नली है। दवा से कुछ समय के लिए दर्द और मवाद कम हो सकता है, लेकिन नली शायद ही बंद होती है। ज़्यादातर मामलों में लेजर या फिस्टुलोटॉमी और फिस्टुलेक्टॉमी जैसे पारंपरिक ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ती है। जटिल भगंदर में एक से ज़्यादा बार ऑपरेशन करना पड़ सकता है। हमारे सर्जन ऑपरेशन की योजना ऐसे बनाते हैं कि शौच रोकने वाली मांसपेशी सुरक्षित रहे।
पहले हमारे सर्जन जांच करके देखते हैं कि भगंदर की नली कहां से कहां तक है, और ज़रूरत हो तो किसी दूसरे सेंटर पर एमआरआई करवाई जाती है। भगंदर आम तौर पर केवल दवा से बंद नहीं होता। सही मरीज़ों में हम लेजर से, या फिस्टुलोटॉमी और फिस्टुलेक्टॉमी जैसे पारंपरिक ऑपरेशन से इलाज करते हैं। जटिल भगंदर में एक से ज़्यादा बार ऑपरेशन लग सकता है। शौच रोकने वाली मांसपेशी को बचाने का हम पूरा ध्यान रखते हैं।
हमारे सर्जन पहले आपकी तकलीफ, शौच की आदत और चल रही दवाओं के बारे में पूछते हैं, फिर अलग कमरे में थोड़ी देर जांच करते हैं। कभी कभी लाइट वाली एक छोटी नली (प्रोक्टोस्कोप) से अंदर देखा जाता है। इससे पता चलता है कि बवासीर है, फिशर है, भगंदर है या कुछ और। कुछ मरीज़ों को खून की जांच या कोलोनोस्कोपी की ज़रूरत पड़ती है। फिर हम आसान शब्दों में दवा या ऑपरेशन की पूरी योजना बताते हैं।
खर्च बीमारी और इलाज के तरीके पर निर्भर करता है, जैसे केवल दवा, लेजर, MIPH स्टेपलर या पारंपरिक ऑपरेशन। इसके अलावा बेहोशी का प्रकार, ऑपरेशन से पहले की जांच, कितने दिन रुकना है, कमरे का प्रकार और घर जाने के बाद की दवाएं भी मायने रखती हैं। जटिल भगंदर में एक से ज़्यादा बार ऑपरेशन हो तो खर्च बढ़ता है। बिना जांच के हम कोई रकम नहीं बताते। जांच के बाद भर्ती से पहले हम साफ़ लिखित अनुमान देते हैं।
हां, बवासीर, फिशर और भगंदर के हमारे बहुत से मरीज़ सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया और पास के उत्तर प्रदेश से आते हैं। अपने सवाल पूछने और दिखाने का दिन तय करने के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें। ज़्यादातर तय ऑपरेशन में थोड़े दिन रुकना पड़ता है और ज़्यादातर मरीज़ 1 से 2 दिन में घर चले जाते हैं। कृपया कम से कम एक बार फॉलो-अप के लिए आने की योजना रखें और साथ में एक परिजन लाएं।
हमारी आयुष्मान भारत (पीएम-जेएवाई) सूची में जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के लगभग 50 पैकेज शामिल हैं। आपका बवासीर, फिशर या भगंदर का ऑपरेशन इसमें आता है या नहीं, यह सही पैकेज और आपकी पात्रता पर निर्भर करता है। कृपया भर्ती से पहले आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड लेकर हमारे सहायता केंद्र आएं, हम साफ़ बताएंगे कि आपका ऑपरेशन कवर है या नहीं। जो कवर नहीं है, उसका खर्च हम पहले ही समझा देते हैं।
रेशेदार खाना ज़्यादा खाएं: मोटा अनाज, दाल, हरी सब्ज़ी, सलाद, पपीता और अमरूद जैसे फल, और सलाह हो तो इसबगोल। दिन भर भरपूर पानी पिएं। बहुत तीखा और तला हुआ खाना, मैदा और शराब से परहेज करें। शौच में ज़ोर न लगाएं और देर तक न बैठें, और सलाह के अनुसार गुनगुने पानी की सिंकाई करें। कब्ज़ बवासीर और फिशर के दोबारा होने की बड़ी वजह है, इसलिए कृपया ठीक होने के बाद भी ये आदतें बनाए रखें।
अपनी जानकारी भेजें, हमारी टीम आपको कॉल करके समय तय करेगी।
यह जानकारी सिर्फ़ जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं। इलाज हर मरीज़ की हालत देखकर तय होता है।

अपना नाम और फ़ोन नंबर दें। हमारी टीम आपको कॉल करके ओपीडी का समय तय करेगी।