गोपालगंज में फोड़े का ऑपरेशन (चीरा लगाकर पस निकालना, आई एंड डी)

फोड़े का ऑपरेशन (चीरा लगाकर पस निकालना, आई एंड डी)

हम पस से भरे फोड़े को चीरा लगाकर खाली करते हैं, ताकि दर्द और संक्रमण से राहत मिले, साथ में शुगर की जांच करते हैं और घाव भरने तक ड्रेसिंग का साफ़ शेड्यूल बनाते हैं।

अगर आपको पस से भरी दर्द वाली सूजन है, तो हम गोपालगंज में फोड़े का ऑपरेशन जल्दी करते हैं और घाव भरने तक ड्रेसिंग की पूरी देखभाल करते हैं। फोड़ा (एब्सेस) त्वचा के नीचे या गहरे हिस्से में पस का जमाव है, और पस वाले फोड़े का इलाज आमतौर पर चीरा लगाकर पस निकालना (आई एंड डी) होता है, जो एक छोटा ऑपरेशन है। डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में यह ऑपरेशन हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, एमएस (जनरल सर्जरी), और हमारी टीम करती है, और हम शुगर की जांच भी करते हैं, क्योंकि बेकाबू शुगर इसकी आम छिपी वजह है। ज़्यादातर छोटे फोड़े हम डे-केयर में निकालते हैं, और जो फोड़ा इंतज़ार नहीं कर सकता, उसके लिए हमारी 24x7 इमरजेंसी खुली है। गोपालगंज, सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया, कुशीनगर और देवरिया से मरीज़ हमारे पास आते हैं। मरीज़ डॉ. ठाकुर पर उनके 16 साल से ज़्यादा के सर्जरी अनुभव और 10,000 से ज़्यादा ऑपरेशन की वजह से भरोसा करते हैं। छोटे फोड़े के लिए कृपया ओपीडी (सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 से शाम 7 बजे) में आएं; तेज़ दर्द या बुखार हो तो हमारी इमरजेंसी में आएं या +91 72739 94786 पर कॉल करें।

ऑपरेशन का समयआमतौर पर 15 से 30 मिनट
अस्पताल में रुकनाआमतौर पर डे-केयर, बड़े फोड़े, बिना काबू की शुगर या तेज़ बुखार में 1 से 2 दिन

फोड़ा (एब्सेस) क्या है और चीरा लगाकर पस निकालना क्या है?

फोड़ा (एब्सेस) त्वचा के नीचे या गहराई में पस (मवाद) का दर्द भरा जमाव है, जो बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है। शुरुआत में लाल, गर्म और दुखने वाली सूजन होती है, जो पस भरने पर मुलायम हो जाती है। फोड़े अक्सर बगल, कूल्हे, गुदा (पखाने के रास्ते) के आसपास, दूध पिलाने वाली मां के स्तन में, और हाथ-पैर पर होते हैं। छोटी फुंसी अपने आप फूटकर ठीक हो सकती है, लेकिन बड़ा फोड़ा आमतौर पर सिर्फ़ एंटीबायोटिक से ठीक नहीं होता।

चीरा लगाकर पस निकालना (इंसिज़न और ड्रेनेज, आई एंड डी) एक छोटा ऑपरेशन है, जिसमें हमारे सर्जन फोड़े पर चीरा लगाकर पूरा पस निकालते हैं, अंदर की जेबों को तोड़ते हैं और खाली जगह साफ़ करते हैं। फिर हम उस जगह में गॉज़ भरकर ड्रेसिंग करते हैं, ताकि घाव अंदर से बाहर की ओर भरे।

जिन लोगों को बार-बार फोड़े होते हैं, या जिन्हें शुगर है, उन्हें खास ध्यान चाहिए। हम शुगर की जांच करते हैं, क्योंकि बिना काबू की शुगर फोड़ों की एक आम छिपी वजह है।

फोड़े का आई एंड डी: डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में 1
फोड़े का आई एंड डी: डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में 2

पस वाले फोड़े के लक्षण

  • लाल, गर्म, दर्द भरी सूजन जो बढ़ती जा रही हो
  • सूजन का बीच में मुलायम हो जाना, कभी पीला या सफ़ेद मुंह बनना
  • टीस वाला दर्द जिससे नींद न आए
  • बुखार या कंपकंपी
  • सूजन से पस निकलना
  • बार-बार फोड़े होना, खासकर शुगर वालों में

फोड़े में ऑपरेशन कब ज़रूरी होता है?

जब सूजन मुलायम होकर पस से भर जाए, या अल्ट्रासाउंड में पस का जमाव दिखे, तब हम आई एंड डी की सलाह देते हैं। शुरुआती दौर में, जब सिर्फ़ लाली और सख्ती हो और पस न बना हो, तो एंटीबायोटिक, गर्म सिकाई और आराम काफ़ी हो सकता है। हमारे डॉक्टर जांच करके तय करते हैं।

अगर सूजन फैल रही हो, बुखार या कंपकंपी हो, फोड़ा चेहरे पर, गुदा के पास या स्तन में हो, या आपको शुगर हो, तो कृपया जल्दी हमारे पास आएं। घर पर फोड़े को दबाएं, निचोड़ें या काटें नहीं, और उस पर घरेलू नुस्खे न लगाएं, इससे संक्रमण फैल सकता है।

फोड़े से पस कैसे निकाला जाता है?

  1. जांच, शुगर की जांच और गहरे फोड़े में अल्ट्रासाउंड
  2. छोटे फोड़े में सुन्न करने वाली सुई, बड़े, गहरे या गुदा के फोड़े में रीढ़ में सुई या पूरी बेहोशी
  3. फोड़े पर चीरा लगाकर पूरा पस निकालना
  4. अंदर की जेबें तोड़कर खाली जगह की धुलाई
  5. खाली जगह में गॉज़ भरकर ड्रेसिंग, और ज़रूरत पर पस को कल्चर जांच के लिए भेजना

फोड़े का घाव भरने में कितना समय लगता है?

पस निकलते ही दर्द आमतौर पर जल्दी कम हो जाता है। हमारे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ड्रेसिंग आमतौर पर रोज़ या एक दिन छोड़कर बदली जाती है, जब तक घाव अंदर से भर न जाए। छोटे घाव 1 से 2 हफ्ते में और बड़े 2 से 4 हफ्ते में भर सकते हैं। जगह साफ़ रखें, एंटीबायोटिक और दर्द की दवा बताए अनुसार लें, और शुगर काबू में रखें। बुखार लौटे, दर्द बढ़े या पस फिर भरने लगे तो कृपया जल्दी दिखाएं।

ड्रेसिंग, खाना और सावधानियां

पस निकलते ही आमतौर पर दर्द जल्दी कम हो जाता है। फिर घाव भरना सही देखभाल पर निर्भर करता है:

  • ड्रेसिंग: आमतौर पर रोज़ या एक दिन छोड़कर, जैसा बताया जाए, जब तक घाव अंदर से न भर जाए। कुछ मरीज़ों को हम घर पर या नज़दीकी नर्स से सुरक्षित ड्रेसिंग करना सिखाते हैं।
  • सफ़ाई: उस जगह को साफ़ रखें और ढीले सूती कपड़े पहनें। मलद्वार के पास फोड़ा हो, तो सलाह के अनुसार गुनगुने पानी में बैठकर सिकाई (सिट्ज़ बाथ) करें।
  • क्या खाएं: घर का सामान्य खाना, जिसमें दाल, दूध, दही, अंडा या पनीर जैसा प्रोटीन, सब्ज़ी, फल और भरपूर पानी हो।
  • शुगर: शुगर है तो उसे कंट्रोल में रखना घाव भरने और नए फोड़े रोकने के लिए सबसे ज़रूरी है।
  • दवाइयां: एंटीबायोटिक और दर्द की दवा ठीक वैसे ही लें जैसे बताई गई है।
  • परहेज: घाव को दबाना, घरेलू नुस्खे लगाना, बीड़ी-सिगरेट और शराब से बचें।
  • कृपया जल्दी दिखाएं अगर बुखार लौट आए, दर्द बढ़े, लाली फैले या फिर से पस जमा होने लगे।

फायदे

  • दर्द और दबाव से जल्दी राहत
  • पस निकलने से संक्रमण ठीक हो पाता है
  • शुगर जांच से छिपी हुई डायबिटीज़ का पता चलता है
  • सही तरह घाव भरने के लिए ड्रेसिंग का साफ़ शेड्यूल
  • संक्रमण को गहराई में या खून में फैलने से रोकता है
संभावित जोखिम:

आई एंड डी छोटा ऑपरेशन है, लेकिन इसमें खून बहना, ड्रेसिंग के समय दर्द, घाव का धीरे भरना और निशान रहना जैसे खतरे हो सकते हैं। अगर पस फिर भर जाए, या शुगर या गुदा के पास भगंदर (फिस्टुला) जैसी असली वजह का इलाज न हो, तो फोड़ा दोबारा हो सकता है। बहुत कम मामलों में संक्रमण फैल सकता है। पूरा पस निकालकर, नियमित ड्रेसिंग, शुगर कंट्रोल और फॉलो-अप से हम इन खतरों को कम करते हैं।

फोड़े के ऑपरेशन का खर्च और आयुष्मान कार्ड

फोड़े से पस निकालने का खर्च सबके लिए एक जैसा नहीं होता। यह मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है:

  • फोड़े का साइज़, गहराई और जगह (जैसे बांह पर छोटा फोड़ा या मलद्वार के पास गहरा फोड़ा)
  • सिर्फ़ उस जगह को सुन्न करके, या बड़े, गहरे या मलद्वार के फोड़े में कमर के नीचे सुन्न करके या पूरी बेहोशी में ऑपरेशन
  • शुगर की जांच, गहरे फोड़े में अल्ट्रासाउंड और ज़रूरत हो तो पस का कल्चर
  • डे-केयर या भर्ती, खासकर तेज़ बुखार या बेकाबू शुगर में
  • कितनी बार ड्रेसिंग होगी, और दवाइयां

जांच के बाद ऑपरेशन से पहले हम आपको साफ़ अनुमान देते हैं, और आप पहले अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप पर भी भेज सकते हैं। हमारा हॉस्पिटल आयुष्मान भारत पीएम-जय में जनरल सर्जरी पैकेज के लिए सूचीबद्ध है, और चीरा लगाकर पस निकालना हमारी ऑपरेशन सूची में है। आपका इलाज कवर है या नहीं और किस पैकेज में आता है, यह हमारा आयुष्मान सहायता केंद्र पक्का करता है, इसलिए कृपया आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड साथ लाएं।

गोपालगंज में फोड़े का ऑपरेशन: मरीज़ हमें क्यों चुनते हैं

आई एंड डी डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हमारा नियमित ऑपरेशन है, और जो दर्द भरे फोड़े इंतज़ार नहीं कर सकते, उनके लिए हमारी 24x7 इमरजेंसी खुली है। डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, एमएस (जनरल सर्जरी), 16 साल से ज़्यादा के सर्जरी अनुभव के साथ, और हमारी सर्जिकल टीम फोड़े को ठीक से खाली करती है, ताकि पस बार-बार न भरे, और आपके साथ मिलकर ड्रेसिंग का शेड्यूल तय करती है। हमारी पैथोलॉजी लैब में शुगर की जांच होती है, और ज़रूरत पर सही एंटीबायोटिक चुनने के लिए हम पस को कल्चर जांच के लिए भेजते हैं। हमारी अपनी दवा की दुकान में ड्रेसिंग का सामान और दवाएं मिल जाती हैं।

फोड़े से जुड़े सवाल

पस वाले फोड़े का इलाज क्या है, क्या सिर्फ़ एंटीबायोटिक काफ़ी है?

शुरुआत में, जब सिर्फ़ लाली और सख्ती हो, तब एंटीबायोटिक और गर्म सिकाई से फायदा हो सकता है। एक बार पस भर जाए, तो आमतौर पर सिर्फ़ एंटीबायोटिक से फोड़ा ठीक नहीं होता, क्योंकि दवा पस के अंदर ठीक से नहीं पहुंचती। पस निकालना ज़रूरी होता है। देर करने से फोड़ा और बड़ा और ज़्यादा दर्द वाला हो सकता है।

क्या फोड़े को घर पर फोड़ना या दबाना ठीक है?

नहीं। घर पर फोड़े को दबाने, सुई से फोड़ने या उस पर घरेलू नुस्खे लगाने से इन्फेक्शन आसपास और गहराई तक फैल सकता है। शुरुआत के छोटे फोड़े में गुनगुनी सिकाई, सफ़ाई और डॉक्टर की सलाह हो तो एंटीबायोटिक से आराम मिल सकता है। जब फोड़ा मुलायम होकर पस से भर जाए, तो उसे साफ़ जगह पर छोटा चीरा लगाकर ठीक से निकालना ही सुरक्षित है।

फोड़े से पस कैसे निकाला जाता है और कितना समय लगता है?

जांच और शुगर टेस्ट के बाद उस जगह को सुन्न किया जाता है, या बड़े, गहरे या मलद्वार के फोड़े में कमर के नीचे सुन्न करके या पूरी बेहोशी में ऑपरेशन होता है। हमारे सर्जन फोड़े पर चीरा लगाकर सारा पस निकालते हैं, अंदर की जेबें तोड़ते हैं और गड्ढे को धोकर उसमें गॉज़ भरते हैं। इसमें आमतौर पर 15 से 30 मिनट लगते हैं और ज़्यादातर लोग उसी दिन घर चले जाते हैं।

फोड़े में मेरी शुगर की जांच क्यों होती है?

ज़्यादा शुगर से शरीर की संक्रमण से लड़ने की ताकत कम होती है और घाव धीरे भरता है। बहुत से लोगों को अपनी डायबिटीज़ का पता तभी चलता है जब उन्हें बार-बार फोड़े होते हैं या फोड़ा ठीक नहीं होता। शुगर जांच से हमारे डॉक्टर सिर्फ़ फोड़े का नहीं, उसकी वजह का भी इलाज कर पाते हैं, और फोड़ा दोबारा होने की संभावना कम होती है।

ड्रेसिंग कितनी बार बदलनी होगी?

आमतौर पर हमारे डॉक्टर की सलाह के अनुसार रोज़ या एक दिन छोड़कर। गॉज़ भरने से घाव नीचे से ऊपर की ओर भरता है, ताकि ऊपर से बंद होकर अंदर पस न रह जाए। कुछ मरीज़ ड्रेसिंग के लिए हमारे हॉस्पिटल आते हैं, और कुछ को हम घर पर या पास की नर्स से सुरक्षित ड्रेसिंग का तरीका सिखाते हैं। साइज़ के हिसाब से घाव भरने में 1 से 4 हफ्ते लग सकते हैं।

फोड़े का घाव भरने में कितना समय लगता है?

पस निकलने के बाद दर्द आमतौर पर जल्दी कम हो जाता है। फिर घाव नियमित ड्रेसिंग से धीरे-धीरे अंदर से भरता है। छोटे घाव आमतौर पर 1 से 2 हफ्ते में और बड़े या गहरे घाव 2 से 4 हफ्ते में भरते हैं। बेकाबू शुगर, बीड़ी-सिगरेट या कमज़ोर खानपान से घाव देर से भरता है। कृपया ड्रेसिंग के दिन न छोड़ें, और बुखार लौटे या फिर पस जमा हो तो जल्दी आएं।

पस निकलने के बाद क्या खाएं और क्या सावधानी रखें?

घर का सामान्य खाना खाएं, जिसमें दाल, दूध, दही, अंडा या पनीर जैसा प्रोटीन, सब्ज़ी, फल और भरपूर पानी हो, ताकि घाव जल्दी भरे। शुगर हो तो डॉक्टर की मदद से उसे कंट्रोल में रखना सबसे ज़रूरी है। उस जगह को साफ़ रखें, ढीले सूती कपड़े पहनें, एंटीबायोटिक बताए अनुसार लें, और घाव को न दबाएं और न उस पर घरेलू नुस्खे लगाएं।

बार-बार फोड़े होना किस बात का संकेत है?

बार-बार फोड़े बिना काबू की शुगर, सफ़ाई की कमी, तंग कपड़े, रगड़, त्वचा की बीमारी, या गुदा के पास भगंदर (फिस्टुला) या संक्रमित सिस्ट जैसी छिपी वजह से हो सकते हैं। कभी-कभी बैक्टीरिया त्वचा पर ही रहते हैं और बार-बार फोड़े करते हैं। हमारे डॉक्टर वजह ढूंढकर उसका इलाज करते हैं, ताकि समस्या बार-बार न लौटे।

फोड़े के ऑपरेशन का खर्च किन बातों पर निर्भर करता है?

खर्च फोड़े के साइज़, गहराई और जगह, सुन्न करके या बेहोशी में ऑपरेशन, शुगर, अल्ट्रासाउंड या पस कल्चर जैसी जांचों, डे-केयर या भर्ती, ड्रेसिंग की गिनती और दवाइयों पर निर्भर करता है। सुन्न करके निकाले गए छोटे फोड़े में भर्ती वाले बड़े फोड़े से बहुत कम साधन लगते हैं। जांच के बाद ऑपरेशन से पहले हम आपको साफ़ अनुमान देते हैं।

क्या गोपालगंज में फोड़े का ऑपरेशन आयुष्मान कार्ड से हो सकता है?

हमारा हॉस्पिटल आयुष्मान भारत पीएम-जय में जनरल सर्जरी पैकेज के लिए सूचीबद्ध है, और चीरा लगाकर पस निकालना हमारी ऑपरेशन सूची में है। आपका इलाज कवर है या नहीं और किस पैकेज में आता है, यह हमारा आयुष्मान सहायता केंद्र पक्का करता है। कृपया आयुष्मान कार्ड और आधार जैसा फोटो पहचान पत्र साथ लाएं, और दर्द वाले फोड़े में कागज़ों की वजह से आने में देर न करें।

मैं सीवान या बेतिया में रहता हूं। क्या गोपालगंज में फोड़े का ऑपरेशन करवा सकता हूं?

हां। सीवान, बेतिया, छपरा, मोतिहारी, कुशीनगर और देवरिया से मरीज़ नियमित रूप से हमारे पास आते हैं। बुखार के साथ दर्द वाले फोड़े में इंतज़ार न करें, हमारी 24x7 इमरजेंसी खुली है। छोटे फोड़े के लिए कृपया ओपीडी में सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 से शाम 7 बजे आएं। पस निकलने के बाद की ड्रेसिंग हमारी टीम की सलाह से अक्सर घर के पास भी जारी रखी जा सकती है, इसलिए रोज़ इतनी दूर आना ज़रूरी नहीं होता।

गोपालगंज में फोड़े के इलाज के लिए सबसे अच्छा डॉक्टर कौन है?

ऐसे सर्जन चुनें जो फोड़े का पूरा पस निकालें, शुगर या भगंदर जैसी वजह ढूंढें और आपके साथ ड्रेसिंग की योजना बनाएं। हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, एमएस (जनरल सर्जरी), को 16 साल से ज़्यादा का सर्जरी अनुभव है और वे 10,000 से ज़्यादा ऑपरेशन कर चुके हैं। हमारी पैथोलॉजी लैब शुगर की जांच करती है और पस का कल्चर भेज सकती है, और इंतज़ार न कर सकने वाले फोड़े के लिए हमारी 24x7 इमरजेंसी खुली है।

इससे जुड़े इलाज

घाव की देखभाल और डीब्राइडमेंट

हम शुगर के मरीज़ों के पैर के घाव और न भरने वाले या पस वाले घावों का इलाज करते हैं: मरा हुआ मांस हटाना (डीब्राइडमेंट), नियमित ड्रेसिंग, शुगर कंट्रोल और पैर बचाने की सलाह।

गांठ और सिस्ट का ऑपरेशन

हम त्वचा के नीचे की गांठें, जैसे सिबेशियस सिस्ट, डर्मॉइड सिस्ट और न्यूरोफाइब्रोमा निकालते हैं, और गांठ को हिस्टोपैथोलॉजी (बायोप्सी रिपोर्ट) के लिए भेजते हैं, ताकि पक्का पता चले कि वह क्या थी।

लिवर एब्सेस ड्रेनेज

हम लिवर में पस (मवाद) का इलाज दवाओं से, ज़रूरत पर अल्ट्रासाउंड की मदद से सुई या पतली नली द्वारा पस निकालकर, और फोड़ा फटने पर इमरजेंसी ऑपरेशन से करते हैं।

स्रोत और आगे पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

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यह जानकारी सिर्फ़ जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं। इलाज हर मरीज़ की हालत देखकर तय होता है।
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