हाइड्रोसील का मतलब है अंडकोष के चारों तरफ़ पानी भर जाना। इसमें अंडकोष की थैली एक या दोनों तरफ़ धीरे-धीरे फूलने लगती है। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह हर उम्र के पुरुषों में आम है, फिर भी बहुत लोग शर्म या गलत धारणाओं की वजह से इसे सालों तक छिपाए रखते हैं। यहां हमारी सर्जिकल टीम हाइड्रोसील का इलाज और उससे जुड़े आम भ्रम आसान भाषा में समझा रही है।
आइए, सबसे आम भ्रम और उनके पीछे का सच जानें।
हाइड्रोसील होता क्यों है?
हर अंडकोष के ऊपर एक पतली झिल्ली होती है, जिसमें सामान्य रूप से बहुत थोड़ा पानी रहता है। जब यह पानी ज़्यादा बनने लगे या कम सूखे, तो जमा होकर सूजन बढ़ती जाती है। बड़ी उम्र में अक्सर सही वजह पता नहीं चलती। जानी-पहचानी वजहें ये हैं:
- फाइलेरिया (हाथीपांव की बीमारी), जो मच्छर से फैलती है और बिहार व पूर्वी यूपी के कई इलाकों में आम है
- अंडकोष में चोट
- अंडकोष में इन्फेक्शन या सूजन
- छोटे बच्चों में पेट और अंडकोष के बीच का छोटा रास्ता, जो जन्म के बाद बंद नहीं हुआ
कभी-कभार हाइड्रोसील के साथ अंडकोष में भी कोई दिक्कत हो सकती है, इसलिए अक्सर अल्ट्रासाउंड की सलाह दी जाती है।
भ्रम 1: "सुई से पानी निकलवा लो, ठीक हो जाएगा"
सच: सुई से पानी निकालने से कुछ ही समय का आराम मिलता है। ज़्यादातर मामलों में कुछ हफ़्तों या महीनों में पानी फिर भर जाता है, क्योंकि पानी बनाने वाली झिल्ली वहीं की वहीं रहती है। बार-बार सुई लगवाने से थैली के अंदर इन्फेक्शन और खून जमने का खतरा रहता है, और बाद में ऑपरेशन भी मुश्किल हो सकता है। जो मरीज़ ऑपरेशन के लायक न हों, उनमें कभी-कभी यह किया जाता है, पर ज़्यादातर पुरुषों के लिए यह इलाज नहीं है।
भ्रम 2: "हाइड्रोसील से मर्दाना ताकत खत्म हो जाती है"
सच: ज़्यादातर मामलों में हाइड्रोसील से मर्दाना ताकत या बच्चा पैदा करने की क्षमता पर असर नहीं पड़ता। पानी अंडकोष के बाहर, उसके चारों तरफ़ होता है, अंदर नहीं। हां, बहुत बड़ा हाइड्रोसील भारीपन, चलने-बैठने में दिक्कत, शर्मिंदगी और संबंध बनाने में परेशानी कर सकता है। यह इलाज कराने की वजह है, डरने की नहीं। बच्चे को लेकर चिंता हो तो कृपया हमारे डॉक्टर को बताएं, वे अल्ट्रासाउंड से अंडकोष की जांच कर सकते हैं।
भ्रम 3: "यह भारी काम या गलत आदतों से होता है"
सच: हाइड्रोसील वज़न उठाने, संबंध बनाने या किसी "गलत आदत" से नहीं होता। इसमें शर्म की कोई बात नहीं है। यह पथरी या हर्निया जैसी ही एक बीमारी है, जिसे हम अपनी ओपीडी में नियमित रूप से देखते हैं।
भ्रम 4: "तेल मालिश, सेंक या जड़ी-बूटी से पानी सूख जाएगा"
सच: किसी तेल, मालिश या जड़ी-बूटी से हाइड्रोसील ठीक होना साबित नहीं हुआ है। सूजन को रगड़ने या सेंकने से चमड़ी को नुकसान हो सकता है। बड़ी उम्र में तकलीफ़ देने वाले हाइड्रोसील का भरोसेमंद इलाज छोटा सा ऑपरेशन ही है।
भ्रम 5: "हाइड्रोसील और हर्निया एक ही चीज़ है"
सच: दोनों में जांघ की जड़ या अंडकोष में सूजन हो सकती है, पर ये अलग हैं। हर्निया में पेट की कमज़ोर जगह से आंत या चर्बी बाहर उभर आती है, और आंत फंस जाए तो यह इमरजेंसी है। हाइड्रोसील में सिर्फ़ पानी होता है। डॉक्टर जांच और अल्ट्रासाउंड से फ़र्क बता देते हैं, और कभी-कभी दोनों साथ भी होते हैं। हर्निया के ऑपरेशन के बारे में अलग से पढ़ सकते हैं।
भ्रम 6: "ऑपरेशन बड़ा और खतरनाक है"
सच: हाइड्रोसील का ऑपरेशन आम और अपेक्षाकृत आसान ऑपरेशन है। यह आमतौर पर स्पाइनल या लोकल एनेस्थीसिया (सुन्न करके) में अंडकोष की थैली पर छोटे चीरे से होता है। पानी निकालकर झिल्ली को या तो हटा दिया जाता है या उलटकर सिल दिया जाता है, ताकि पानी दोबारा न भरे। ज़्यादातर मरीज़ 1 से 2 दिन में घर चले जाते हैं।
हर ऑपरेशन की तरह इसमें भी सूजन, थोड़ा खून जमना या इन्फेक्शन जैसे खतरे हो सकते हैं। सही ऑपरेशन के बाद दोबारा होना कम ही देखा जाता है। ये सब बातें हमारे सर्जन ऑपरेशन से पहले आपको समझाते हैं।
भ्रम 7: "इंतज़ार करो, अपने आप ठीक हो जाएगा"
सच: छोटे बच्चों में हाइड्रोसील अक्सर पहले एक-दो साल में अपने आप ठीक हो जाता है। बड़ों में यह आमतौर पर अपने आप नहीं जाता और धीरे-धीरे बढ़ता है। छोटा और बिना तकलीफ़ वाला हाइड्रोसील देखा जा सकता है, पर बढ़ रहा हो या परेशान कर रहा हो तो बहुत बड़ा होने से पहले इलाज कराना बेहतर है।
ऑपरेशन के बाद
- कुछ हफ़्ते सपोर्ट वाला कसा अंडरवियर (लंगोट जैसा) पहनें।
- थोड़ी सूजन और नीलापन सामान्य है, जो 2 से 4 हफ़्ते में ठीक हो जाता है।
- घाव साफ़ और सूखा रखें, और पट्टी व नहाने के बारे में दी गई सलाह मानें।
- ज़्यादातर पुरुष लगभग एक हफ़्ते में हल्का काम और 2 से 3 हफ़्ते में भारी काम शुरू कर देते हैं, डॉक्टर की सलाह के अनुसार।
- टांके और फॉलो-अप की जांच के लिए बताई गई तारीख पर ज़रूर आएं।
फाइलेरिया से बचाव
हमारे इलाके में फाइलेरिया हाइड्रोसील की एक वजह है। इसलिए सरकारी अभियान में स्वास्थ्य कर्मी जो फाइलेरिया की दवा मुफ़्त खिलाते हैं, उसे ज़रूर खाएं, और मच्छरदानी व पूरे कपड़ों से मच्छरों से बचें।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- अंडकोष में कोई भी नई सूजन हो, ताकि पता चले कि वह क्या है
- सूजन बढ़ रही हो या चलने-फिरने और काम में दिक्कत हो
- अंडकोष में अचानक तेज़ दर्द, सूजन हो या न हो। यह अंडकोष का ऐंठ जाना (टॉर्शन) हो सकता है, जिसमें कुछ ही घंटों में इमरजेंसी इलाज चाहिए।
- पुरानी सूजन में लाली, बुखार या दर्द
- जांघ की जड़ में ऐसी सूजन जो घटती-बढ़ती हो, या दर्द के साथ सख्त हो जाए
- बच्चे के अंडकोष में सूजन जो 1 से 2 साल की उम्र के बाद भी बनी रहे, या दिन में घटती-बढ़ती हो
गोपालगंज में हाइड्रोसील का इलाज कराने के लिए गोपालगंज, सीवान, छपरा और आसपास के ज़िलों के पुरुष डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हमारे पास आते हैं। हमारे यहां जांच हमेशा पर्दे में होती है। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: हाइड्रोसील का ऑपरेशन।
हमारे यहां हाइड्रोसील का ऑपरेशन हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर करते हैं, जो 16 साल से ज़्यादा अनुभव वाले लेप्रोस्कोपिक, लेज़र, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन हैं। कृपया शर्माएं नहीं: हम ऐसी सूजन नियमित रूप से देखते हैं, और जांच पर्दे में होती है। अल्ट्रासाउंड हमारे अस्पताल में ही होता है। ज़्यादा जानकारी के लिए हाइड्रोसील का ऑपरेशन पेज देखें। ओपीडी के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें।





