हाइड्रोसील का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए, यह सवाल बहुत से पुरुष और छोटे बच्चों के माता-पिता हमसे पूछते हैं। कुछ हाइड्रोसील में इंतज़ार किया जा सकता है, कुछ में ऑपरेशन ज़रूरी है, और कुछ लक्षणों में उसी दिन डॉक्टर को दिखाना चाहिए। बड़ों और बच्चों में यह फ़ैसला अलग तरह से होता है, और सुई से पानी निकालना स्थायी हल नहीं है। फ़ैसला कैसे होता है, ऑपरेशन कैसे होता है और उसके बाद क्या ध्यान रखना है, यह जानकर आप सही समय भरोसे के साथ तय कर सकते हैं।
हाइड्रोसील क्या है?
हाइड्रोसील का मतलब है अंडकोष के चारों तरफ़ की पतली झिल्ली में पानी भर जाना, जिससे अंडकोष की थैली एक या दोनों तरफ़ फूल जाती है। इसमें आमतौर पर दर्द नहीं होता। बड़ों में अक्सर साफ़ वजह नहीं मिलती, हालांकि हमारे इलाके में फाइलेरिया, चोट और इन्फेक्शन जानी-पहचानी वजहें हैं। छोटे बच्चों में यह इसलिए होता है क्योंकि पेट और अंडकोष के बीच का एक छोटा रास्ता जन्म के बाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ। अगर आपने सुना है कि हाइड्रोसील से मर्दाना ताकत कम होती है या यह गलत आदतों से होता है, तो कृपया हमारा हाइड्रोसील: भ्रम और सच वाला लेख पढ़ें।
बड़ों में हाइड्रोसील का ऑपरेशन कब करवाना चाहिए?
बड़ों में हाइड्रोसील अपने आप बहुत कम जाता है और धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। ऑपरेशन आमतौर पर तब सलाह दिया जाता है जब:
- सूजन बड़ी, भारी हो या नीचे की ओर खिंचाव हो
- चलते, साइकिल चलाते, खेत में काम करते या देर तक बैठते समय रगड़ या दर्द हो
- महीनों में सूजन बढ़ती जा रही हो
- संबंध बनाने में दिक्कत, कपड़े पहनने में परेशानी या शर्मिंदगी हो
- ऊपर की चमड़ी में घाव या इन्फेक्शन हो जाए
- साथ में हर्निया भी हो (देखें हर्निया का ऑपरेशन), या पक्का पता न हो कि सूजन किस चीज़ की है
कब इंतज़ार किया जा सकता है: छोटा, मुलायम हाइड्रोसील जो तकलीफ़ न दे और बढ़ न रहा हो, उसमें अक्सर नज़र रखी जा सकती है। बढ़ने लगे या परेशान करे तो कृपया फिर से दिखाएं। बहुत बड़े और सालों पुराने हाइड्रोसील के ऑपरेशन के बाद सूजन ज़्यादा रह सकती है, इसलिए हम इसके बहुत बड़ा होने तक इंतज़ार न करने की सलाह देते हैं।
बच्चों में हाइड्रोसील: इंतज़ार करें या ऑपरेशन?
बच्चों में हाइड्रोसील आम है, ख़ासकर नवजात लड़कों में। इसमें सलाह बड़ों से अलग होती है:
- छोटे बच्चों में बहुत से हाइड्रोसील लगभग 1 से 2 साल की उम्र तक, रास्ता बंद होने पर, अपने आप ठीक हो जाते हैं। हम आमतौर पर नज़र रखने की सलाह देते हैं।
- ऑपरेशन पर विचार तब किया जाता है जब 1 से 2 साल के बाद भी हाइड्रोसील बना रहे, दिन में घटता-बढ़ता हो (जिसका मतलब है कि रास्ता अभी खुला है), या साथ में हर्निया हो।
- बच्चों का ऑपरेशन बड़ों से अलग होता है: जांघ की जड़ (ग्रोइन) में छोटे चीरे से, जनरल एनेस्थीसिया में, खुले रास्ते को बंद किया जाता है।
बच्चे की जांघ की जड़ में सूजन सख्त हो जाए, दर्द करे या अंदर न जाए, और साथ में बच्चा रोए या उल्टी करे, तो यह फंसा हुआ हर्निया हो सकता है। यह इमरजेंसी है। ज़्यादा जानकारी के लिए कृपया हमारा बच्चों की सर्जरी पेज देखें।
सुई से पानी निकालना सही हल क्यों नहीं
सुई से पानी निकालने (टैपिंग) से कुछ समय के लिए सूजन कम हो जाती है। लेकिन पानी बनाने वाली झिल्ली वहीं रहती है, इसलिए ज़्यादातर मामलों में कुछ हफ़्तों या महीनों में पानी फिर भर जाता है। बार-बार सुई लगवाने से थैली के अंदर इन्फेक्शन और खून जमने का खतरा रहता है, और बाद में ऑपरेशन भी मुश्किल हो सकता है। जो मरीज़ ऑपरेशन के लायक न हों, उनमें कभी-कभी यह किया जाता है, पर ज़्यादातर पुरुषों के लिए यह इलाज नहीं है।
पहले अल्ट्रासाउंड क्यों ज़रूरी है?
फ़ैसले से पहले हम सूजन की जांच करते हैं और आमतौर पर अंडकोष का अल्ट्रासाउंड करवाते हैं, जो हमारे अस्पताल में ही होता है। इससे पक्का होता है कि सूजन पानी की है, नीचे अंडकोष ठीक है, और हर्निया तो नहीं है। यह ज़रूरी है क्योंकि कभी-कभार हाइड्रोसील के साथ अंडकोष में भी कोई दिक्कत हो सकती है। ऑपरेशन से पहले हम खून की जांच और फिटनेस जांच भी करते हैं।
हाइड्रोसील का ऑपरेशन कैसे होता है?
- सुन्न करना: बड़ों में आमतौर पर स्पाइनल या लोकल एनेस्थीसिया (वह हिस्सा सुन्न करके), और बच्चों में जनरल एनेस्थीसिया।
- अंडकोष की थैली पर छोटा चीरा लगाकर पानी निकाला जाता है।
- झिल्ली को उलटकर अंडकोष के पीछे सिल दिया जाता है (एवर्ज़न), या अतिरिक्त झिल्ली हटा दी जाती है (एक्सिज़न), ताकि पानी दोबारा न भरे।
- खून बहना ध्यान से रोका जाता है, कभी-कभी एक छोटी नली (ड्रेन) रखी जाती है, और चीरा टांकों से बंद किया जाता है।
- पट्टी और सपोर्ट लगाया जाता है।
ऑपरेशन में आमतौर पर 30 से 60 मिनट लगते हैं, और ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन या अगले दिन घर चले जाते हैं। ज़्यादा जानकारी के लिए कृपया हमारा हाइड्रोसील का ऑपरेशन पेज देखें।
हाइड्रोसील का ऑपरेशन कराने के बाद क्या ध्यान रखें?
बड़ों के लिए
- 1 से 2 हफ़्ते अंडकोष में सूजन सामान्य है, और पूरी तरह उतरने में कुछ हफ़्ते लग सकते हैं।
- लगभग 2 से 3 हफ़्ते सपोर्ट वाला कसा अंडरवियर (लंगोट जैसा) पहनें।
- अगले दिन से चलना-फिरना अच्छा है। घाव साफ़ और सूखा रखें, और नहाने के बारे में हमारी दी गई सलाह मानें।
- हल्का काम आमतौर पर लगभग एक हफ़्ते में शुरू हो सकता है।
- लगभग 2 से 4 हफ़्ते, या हमारे सर्जन की सलाह के अनुसार, भारी वज़न उठाना, साइकिल चलाना और संबंध बनाना टालें।
बच्चों के लिए
बच्चे आमतौर पर जल्दी ठीक हो जाते हैं, और ज़्यादातर बच्चे कुछ दिन से एक हफ़्ते में स्कूल जाने लगते हैं। हमारे सर्जन की सलाह के अनुसार कुछ हफ़्ते बच्चे को उछल-कूद, साइकिल चलाने और पेड़ पर चढ़ने से बचाएं।
ऑपरेशन के खतरे
हर ऑपरेशन की तरह इसमें भी कुछ खतरे हैं: अंडकोष की थैली में खून जमना, इन्फेक्शन, सामान्य से ज़्यादा दिन सूजन रहना और, कम ही, हाइड्रोसील का दोबारा होना। अंडकोष या उसकी नलियों को चोट बहुत कम होती है। ऑपरेशन अंडकोष के चारों तरफ़ होता है, अंडकोष पर नहीं, और आमतौर पर इससे मर्दाना ताकत या बच्चा पैदा करने की क्षमता पर असर नहीं पड़ता। आपके केस के खतरे हमारे सर्जन आपकी सहमति से पहले समझाते हैं।
खर्च और आयुष्मान कार्ड
खर्च ज़रूरी जांचों, एनेस्थीसिया के प्रकार, भर्ती के दिनों और कमरे पर निर्भर करता है, और हम भर्ती से पहले इसकी पूरी जानकारी देते हैं। हमारा अस्पताल आयुष्मान भारत PM-JAY में जनरल सर्जरी के पैकेज के लिए सूचीबद्ध है, और हाइड्रोसील का ऑपरेशन इन्हीं में आता है। कृपया आयुष्मान कार्ड और आधार लेकर आएं, हमारा आयुष्मान सहायता केंद्र आपके केस की पात्रता जांच देगा।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- अंडकोष में कोई भी नई सूजन, ताकि वजह पक्की हो
- सूजन बढ़ रही हो या चलने-फिरने और काम में दिक्कत हो
- अंडकोष में अचानक तेज़ दर्द, सूजन हो या न हो। यह अंडकोष का ऐंठ जाना (टॉर्शन) हो सकता है, जिसमें कुछ ही घंटों में इमरजेंसी इलाज चाहिए।
- बच्चे की जांघ की जड़ या अंडकोष में सूजन सख्त या दर्द वाली हो जाए, या साथ में उल्टी हो
- ऑपरेशन के बाद: लगातार बढ़ती सूजन या दर्द, बुखार, या घाव से मवाद
शर्माने की कोई ज़रूरत नहीं। डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में बड़ों और बच्चों का हाइड्रोसील का ऑपरेशन हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर करते हैं, जो 16 साल से ज़्यादा अनुभव वाले लेप्रोस्कोपिक, लेज़र, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन हैं। हम हर मरीज़ की जांच पर्दे में करते हैं, और हमारी इमरजेंसी 24 घंटे खुली रहती है। गोपालगंज के साथ सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया और पास के उत्तर प्रदेश से भी मरीज़ हमारे पास आते हैं। कृपया ओपीडी के लिए +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें।





