पेट, बड़ी आंत और मलाशय (रेक्टम) के कैंसर का ऑपरेशन
हम पेट, बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर का इलाज करते हैं: बायोप्सी के साथ एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी, सीटी स्कैन से स्टेजिंग, ज़रूरत पर ऑपरेशन, और कीमोथेरेपी व रेडियोथेरेपी के लिए बड़े सेंटर से तालमेल।
गोपालगंज में पेट और आंत के कैंसर का ऑपरेशन हम डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हर कदम पर सावधान योजना के साथ करते हैं, जिसमें मलाशय (रेक्टम) का कैंसर भी शामिल है। ऑपरेशन की योजना से पहले हम एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी के साथ बायोप्सी, और फिर स्टेजिंग स्कैन से बीमारी की पूरी पहचान करते हैं। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के हमारे विज़िटिंग सीनियर कंसल्टेंट डॉ. (एक्स कैप्टन) फ़िरोज़ पाशा, जिन्हें 16+ साल का अनुभव है, हर महीने के पहले शनिवार को हमारी कैंसर ओपीडी लेते हैं, और हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर के नेतृत्व वाली सर्जिकल टीम के साथ काम करते हैं। एंडोस्कोपी, पैथोलॉजी लैब, आईसीयू, और आंत फंसने या फटने का 24x7 इमरजेंसी ऑपरेशन हमारे यहां उपलब्ध है। हमारे यहां रेडियोथेरेपी नहीं है, इसलिए आंत के कैंसर का इलाज पूरा करने के लिए कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी हम बड़े सेंटर से तालमेल करके कराते हैं, और हमारे सर्जन ईमानदारी से बताते हैं कि आपका ऑपरेशन यहां करना सही है या वहां। गोपालगंज, सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया और पास के उत्तर प्रदेश से मरीज़ हमारे पास आते हैं। कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सएप करें।
ऑपरेशन का समयआमतौर पर 3 से 5 घंटे, ऑपरेशन के हिसाब से
अस्पताल में रुकनाआमतौर पर 5 से 10 दिन, कभी कभी ज़्यादा
पेट, बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर का ऑपरेशन क्या है?
पेट और आंत (पाचन तंत्र) के कैंसर को जीआई कैंसर कहते हैं। यहां हम पेट (आमाशय), बड़ी आंत (कोलन) और मलाशय (रेक्टम), यानी आंत के आखिरी हिस्से, के कैंसर के इलाज की जानकारी दे रहे हैं। ये कैंसर अक्सर चुपचाप शुरू होते हैं। थकान, अपच या मल में खून जैसे शुरुआती लक्षणों को लोग गैस या बवासीर समझकर टाल देते हैं।
पहचान के लिए बायोप्सी के साथ कैमरे वाली जांच ज़रूरी है: पेट के लिए एंडोस्कोपी, और बड़ी आंत व मलाशय के लिए कोलोनोस्कोपी। बायोप्सी हिस्टोपैथोलॉजी जांच के लिए जाती है। फिर सीटी स्कैन से स्टेज पता चलती है, और मलाशय के कैंसर में अक्सर पेडू (पेल्विस) की एमआरआई भी चाहिए होती है।
ऑपरेशन में पेट या आंत का कैंसर वाला हिस्सा पास की गिल्टियों के साथ निकाला जाता है और स्वस्थ सिरों को जोड़ दिया जाता है। कभी कभी स्टोमा बनाना पड़ता है, यानी पेट पर एक रास्ता जिससे मल एक थैली में आता है। यह कुछ समय के लिए या स्थायी हो सकता है।
पेट के कैंसर के लक्षण और आंत के कैंसर के संकेत
बिना कारण वज़न घटना या भूख कम होना
मल में खून, या काला, तारकोल जैसा मल
खून की कमी: कमज़ोरी, थकान, सांस फूलना या चेहरा पीला पड़ना
निगलने में दिक्कत या खाना अटकने का एहसास
कुछ हफ्तों से ज़्यादा शौच की आदत में बदलाव (कब्ज़, दस्त या पतला मल)
लगातार अपच, उल्टी, जल्दी पेट भरना या पेट में गांठ
ऑपरेशन की ज़रूरत कब पड़ती है?
बिना कारण वज़न घटना, मल में खून या काला मल, खून की कमी, निगलने में दिक्कत, बार-बार उल्टी, थोड़ा खाते ही पेट भर जाना, या कुछ हफ्तों से ज़्यादा शौच की आदत बदली रहना हो, खासकर 40 साल से ऊपर की उम्र में, तो कृपया जांच में देर न करें।
इलाज बीमारी की स्टेज पर निर्भर करता है। कुछ मरीज़ों का सीधे ऑपरेशन होता है। कुछ को, खासकर मलाशय के कैंसर या पेट के बड़े कैंसर में, पहले कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी और बाद में ऑपरेशन दिया जाता है। बहुत बढ़े हुए कैंसर में ऑपरेशन सिर्फ़ रुकावट या खून बहना रोकने के लिए भी किया जा सकता है। आंत फंसने या फटने पर इमरजेंसी ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है। हमारा मानना है कि सबसे अच्छे फ़ैसले कई विशेषज्ञों की टीम मिलकर लेती है: सर्जन, कैंसर की दवा के डॉक्टर, रेडियोथेरेपी के डॉक्टर, पैथोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट।
पेट और आंत के कैंसर का ऑपरेशन कैसे होता है?
परामर्श, जांच और हीमोग्लोबिन समेत खून की जांच
बायोप्सी के साथ एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी, और हिस्टोपैथोलॉजी से पक्की पहचान
इलाज की योजना के लिए सीटी स्कैन से स्टेजिंग, और मलाशय के कैंसर में पेल्विस की एमआरआई
सलाह होने पर ऑपरेशन से पहले कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी, बड़े सेंटर के साथ तालमेल से
पूरी बेहोशी में पेट या आंत का प्रभावित हिस्सा पास की गिल्टियों के साथ निकालना और स्वस्थ सिरों को जोड़ना, ज़रूरत पर स्टोमा बनाना
ऑपरेशन के बाद कड़ी निगरानी, और निकाला गया हिस्सा हिस्टोपैथोलॉजी के लिए भेजना
विशेषज्ञों की टीम के साथ फॉलो-अप और आगे के इलाज की योजना
ऑपरेशन के बाद रिकवरी में कितना समय लगता है
एक दो दिन में हम आपको बैठने और चलने में मदद करते हैं, और सांस की कसरत से छाती का संक्रमण रोकने में मदद मिलती है। खाना पहले घूंट घूंट तरल से शुरू होता है, और आंत ठीक होने के साथ धीरे धीरे नरम खाने तक जाता है। स्टोमा बना हो तो हमारी टीम आपको और परिवार को उसकी देखभाल और थैली बदलना सिखाती है। ज़्यादातर लोग 4 से 6 हफ्ते में हल्के काम पर लौट आते हैं। कृपया हर फॉलो-अप पर आएं और सलाह होने पर कीमोथेरेपी या दूसरा इलाज पूरा करें, इससे कैंसर लौटने का खतरा कम करने में मदद मिलती है।
पेट के ऑपरेशन के बाद क्या खाना चाहिए और क्या परहेज करें
खाना: पेट या आंत के ऑपरेशन के बाद खाना धीरे धीरे शुरू होता है: पहले घूंट घूंट पानी, फिर दाल का पानी, चावल का माड़ और छाछ जैसी तरल चीज़ें, फिर खिचड़ी, दलिया, दही-चावल और अच्छी तरह पकी सब्ज़ी जैसा नरम खाना। दिन में 5 से 6 बार थोड़ा थोड़ा खाएं, अच्छी तरह चबाएं, और दाल, अंडा, पनीर या मछली जैसा प्रोटीन लें। पेट के ऑपरेशन के बाद एक बार में ज़्यादा खाना और बहुत मीठे पेय से बचें, इनसे बेचैनी हो सकती है। शुरू के हफ्तों में मसालेदार, तला और बाहर का खाना न खाएं, और तंबाकू व शराब छोड़ दें। चलना फिरना: दिन में कई बार टहलें, हमारी सिखाई सांस की कसरत करें, और लगभग 6 हफ्ते भारी वज़न न उठाएं। स्टोमा: स्टोमा बना हो तो हमारे सिखाए तरीके से थैली की देखभाल करें। खतरे के संकेत: बुखार, बढ़ता पेट दर्द, बार-बार उल्टी, पेट फूलना, या गैस और मल न निकलने पर कृपया तुरंत आएं।
फायदे
पास की गिल्टियों के साथ कैंसर निकालना, जिससे सही स्टेज पता चलती है
खून बहना, रुकावट और खाने में दिक्कत से राहत मिल सकती है
घर के पास एंडोस्कोपी और बायोप्सी से पहचान
कैंसर और रेडियोथेरेपी विशेषज्ञों के साथ मिलकर इलाज की योजना
जब बड़ा सेंटर आपके लिए बेहतर हो, तब ईमानदारी से रेफर की सलाह
संभावित जोखिम:
ये बड़े ऑपरेशन हैं। संभावित जोखिमों में खून आना, घाव में संक्रमण, छाती का संक्रमण, पैरों की नसों में खून का थक्का, आंत का देर से काम शुरू करना, और आंत के जोड़ से रिसाव शामिल हैं, जिसके लिए दोबारा ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ सकती है। कुछ मरीज़ों को कुछ समय आईसीयू में रखना पड़ता है। बुज़ुर्ग या कमज़ोर मरीज़ों में बेहोशी का जोखिम ज़्यादा होता है। ध्यान से फिटनेस जांच, पोषण पर ध्यान, जल्दी चलना, कड़ी निगरानी, और समस्या दिखते ही तुरंत कदम उठाकर हमारी टीम इन जोखिमों को कम रखती है।
गोपालगंज में पेट और आंत के कैंसर का ऑपरेशन: खर्च और आयुष्मान कार्ड
पेट, बड़ी आंत या मलाशय के कैंसर के इलाज का खर्च हर मरीज़ में बहुत अलग होता है। मुख्य बातें ये हैं: पहले होने वाली जांच, जैसे बायोप्सी के साथ एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी, हिस्टोपैथोलॉजी, सीटी स्कैन और कभी कभी एमआरआई; ऑपरेशन का प्रकार और कितना बड़ा है, स्टोमा बनाना है या नहीं, और ऑपरेशन पहले से तय है या इमरजेंसी; बेहोशी; अस्पताल में कितने दिन, अक्सर 5 से 10 दिन, और कौन सा कमरा; ज़रूरत पर आईसीयू; खून चढ़ाना, पोषण और दवाइयां। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का खर्च अलग है, और ये आमतौर पर बड़े सेंटर पर होती हैं। परामर्श और रिपोर्ट के बाद, भर्ती से पहले हम साफ़ लिखित अनुमान देते हैं, और आप पहले रिपोर्ट +91 72739 94786 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं। हमारे अस्पताल का आयुष्मान भारत PM-JAY पैनल जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के पैकेज के लिए है। आपके इलाज का कवरेज योजना के नियमों और बीमारी पर निर्भर है, इसलिए कृपया आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड लेकर हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पक्का कर लें।
आंत के कैंसर का इलाज शुरू करने मरीज़ हमारी कैंसर ओपीडी पर क्यों भरोसा करते हैं
मरीज़ों की जांच हमारी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ओपीडी में हर महीने के पहले शनिवार को डॉ. (एक्स कैप्टन) फ़िरोज़ पाशा, सीनियर कंसल्टेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी करते हैं। एंडोस्कोपी, पैथोलॉजी लैब, आईसीयू, और आंत फंसने या फटने का इमरजेंसी ऑपरेशन हमारे यहां उपलब्ध है। हमारे यहां रेडियोथेरेपी नहीं है। ऑपरेशन की योजना बनने पर हमारे सर्जन बताते हैं कि यह यहां करना सही है या बड़े सेंटर पर, और ज़रूरत पर कीमोथेरेपी व रेडियोथेरेपी के लिए हम बड़े सेंटर से तालमेल करते हैं।
पेट और आंत के कैंसर का ऑपरेशन: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गोपालगंज में पेट और आंत के कैंसर का ऑपरेशन कहां और कैसे होता है?
जांच गोपालगंज स्थित हमारे अस्पताल में हर महीने के पहले शनिवार को डॉ. (एक्स कैप्टन) फ़िरोज़ पाशा की कैंसर ओपीडी से शुरू होती है। बायोप्सी और स्टेजिंग के बाद, पूरी बेहोशी में पेट या आंत का कैंसर वाला हिस्सा पास की गिल्टियों के साथ निकाला जाता है और स्वस्थ सिरे जोड़े जाते हैं, ज़रूरत पर स्टोमा बनाया जाता है। ऑपरेशन में आमतौर पर 3 से 5 घंटे लगते हैं। हमारे सर्जन बताते हैं कि ऑपरेशन यहां करना सही है या बड़े सेंटर पर।
पेट के कैंसर के लक्षण क्या हैं?
शुरुआत में पेट का कैंसर अक्सर हल्की तकलीफ देता है: दवा से ठीक न होने वाली अपच या जलन, थोड़ा खाते ही पेट भर जाना, भूख कम होना, वज़न घटना, जी मिचलाना, काला मल, या खून की कमी से थकान। बाद में उल्टी या पेट के ऊपरी हिस्से में गांठ हो सकती है। इन लक्षणों की और भी आम वजहें होती हैं, लेकिन कुछ हफ्तों से ज़्यादा रहें, खासकर 40 साल के बाद, तो कृपया एंडोस्कोपी ज़रूर कराएं।
क्या मल में खून हमेशा बवासीर की वजह से आता है?
नहीं। बवासीर आम है, लेकिन खून बड़ी आंत या मलाशय के कैंसर, पॉलिप या दूसरी बीमारियों से भी आ सकता है। अगर खून के साथ वज़न घटे, खून की कमी हो, शौच की आदत बदले, या 40 साल की उम्र के बाद खून आना शुरू हो, तो कोलोनोस्कोपी ज़रूरी है। मलाशय के कई कैंसर को पहले बवासीर समझ लिया जाता है। एक जांच से जवाब मिल सकता है, इसलिए कृपया खुद से इलाज न करें।
क्या ऑपरेशन के बाद पेट पर थैली (स्टोमा) लगेगी?
हमेशा नहीं। पेट और बड़ी आंत के कैंसर के कई ऑपरेशनों में स्टोमा की ज़रूरत नहीं होती। मलाशय के कैंसर में कभी कभी जोड़ के भरने तक उसे बचाने के लिए कुछ समय का स्टोमा बनाया जाता है, जिसे बाद में बंद कर दिया जाता है। स्थायी स्टोमा सिर्फ़ कुछ बहुत नीचे वाले मलाशय के कैंसर में चाहिए होता है। ज़रूरत हो तो हमारी टीम सिखाती है कि इसके साथ आराम से कैसे रहें।
क्या कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी की ज़रूरत पड़ेगी?
यह कैंसर के प्रकार और स्टेज पर निर्भर करता है। पेट के कैंसर में अक्सर ऑपरेशन से पहले और बाद में कीमोथेरेपी दी जाती है। मलाशय के कैंसर में अक्सर ऑपरेशन से पहले कीमोथेरेपी के साथ रेडियोथेरेपी होती है। बड़ी आंत के कैंसर में गिल्टियों तक बीमारी हो तो ऑपरेशन के बाद कीमोथेरेपी दी जा सकती है। हमारे यहां रेडियोथेरेपी नहीं है, हम बड़े सेंटर से तालमेल करते हैं और फॉलो-अप यहां जारी रखते हैं।
क्या ऑपरेशन से कैंसर फैल जाता है?
यह एक आम गलतफ़हमी है। सही स्टेजिंग के बाद सही समय पर किया गया ऑपरेशन कैंसर को निकालता है, और कई मरीज़ों में बीमारी पर काबू पाने का सबसे अच्छा मौका देता है। डर के कारण इलाज टालने से कैंसर बढ़ता जाता है। कुछ कैंसर में पहले कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी दी जाती है, और हमारे डॉक्टर इसका कारण समझाते हैं। मन में जो भी सवाल हो, कृपया हमारी ओपीडी में ज़रूर पूछें।
पेट के ऑपरेशन के बाद क्या खाना चाहिए और कितने दिन आराम चाहिए?
खाना धीरे धीरे शुरू होता है: पहले घूंट घूंट पानी, फिर दाल का पानी और छाछ जैसी तरल चीज़ें, फिर खिचड़ी और दलिया जैसा नरम खाना। दिन में 5 से 6 बार थोड़ा थोड़ा खाएं, अच्छी तरह चबाएं, और दाल, अंडा, पनीर या मछली जैसा प्रोटीन लें। शुरू के हफ्तों में मसालेदार और तला खाना न खाएं, तंबाकू व शराब छोड़ दें। ज़्यादातर लोग 4 से 6 हफ्ते में हल्के काम पर लौट आते हैं, और हर फॉलो-अप पर हम आपका मार्गदर्शन करते हैं।
गोपालगंज में पेट और आंत के कैंसर का ऑपरेशन कराने में खर्च किन बातों पर निर्भर करता है?
मुख्य रूप से जांच (एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी, बायोप्सी, सीटी या एमआरआई), ऑपरेशन का प्रकार, स्टोमा की ज़रूरत, ऑपरेशन पहले से तय है या इमरजेंसी, अस्पताल के दिन, कमरा, आईसीयू, खून चढ़ाना और दवाइयों पर। बड़े सेंटर पर कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी का खर्च अलग है। मरीज़ को देखे बिना हम कोई तय रकम नहीं बताते, परामर्श के बाद, भर्ती से पहले हम साफ़ लिखित अनुमान देते हैं।
क्या आंत के कैंसर का इलाज बिना ऑपरेशन के हो सकता है?
जो पेट और आंत के कैंसर ज़्यादा नहीं फैले, उनका मुख्य इलाज ज़्यादातर ऑपरेशन ही है। बहुत शुरुआती कुछ गांठें खास सेंटर पर एंडोस्कोप से निकाली जा सकती हैं, और बहुत बढ़े हुए कैंसर में इलाज ज़्यादातर कीमोथेरेपी से होता है। मलाशय के कुछ कैंसर में कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के बाद योजना बदल सकती है। जड़ी-बूटी या घरेलू नुस्खों से ये कैंसर ठीक नहीं होते। हमारी टीम बताती है कि आपकी स्टेज में क्या सही है।
गोपालगंज में आंत के कैंसर के लिए सबसे अच्छा सर्जन कौन है?
हमारी सलाह है कि सर्जन को उनकी पढ़ाई और अनुभव से परखें। डॉ. (एक्स कैप्टन) फ़िरोज़ पाशा (MBBS, कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज; MS जनरल सर्जरी, आर्मी हॉस्पिटल R&R, दिल्ली) को 16+ साल का अनुभव है, और वे अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट हैं। वे डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर (16+ साल, 10,000+ ऑपरेशन) की हमारी टीम के साथ काम करते हैं, जो आंत फंसने या फटने का इमरजेंसी ऑपरेशन भी करती है।
मैं सीवान, छपरा या देवरिया से हूं। क्या जांच के लिए गोपालगंज आ सकता हूं?
हां। सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया, कुशीनगर और देवरिया से बहुत से परिवार पहले कदम के लिए गोपालगंज में हमारे पास आते हैं: जांच, बायोप्सी के साथ एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी, और इलाज की योजना। कृपया अपनी रिपोर्ट +91 72739 94786 पर व्हाट्सएप करें, फिर महीने के पहले शनिवार को हमारी कैंसर ओपीडी में आएं। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के लिए हम बड़े सेंटर से तालमेल करते हैं, और फॉलो-अप यहीं जारी रह सकता है।
क्या आयुष्मान कार्ड से पेट या आंत के कैंसर का ऑपरेशन हो सकता है?
आयुष्मान भारत PM-JAY में कवरेज योजना के नियमों और आपकी बीमारी पर निर्भर करता है। अगर आपके पास कार्ड है, तो कृपया उसे आधार कार्ड के साथ लाएं और हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पूछें कि आपका इलाज कवर होता है या नहीं। बड़े सेंटर पर कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी के लिए वहां भी कवरेज के बारे में पूछें। बाकी मरीज़ों को हम भर्ती से पहले अनुमानित खर्च साफ़ साफ़ बताते हैं।
इससे जुड़े इलाज
पेट की दूरबीन जांच (एंडोस्कोपी)
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम एंडोस्कोपी करते हैं, जिसमें पतली कैमरे वाली नली से खाने की नली, पेट और छोटी आंत का शुरुआती हिस्सा देखा जाता है। यह आमतौर पर गले में स्प्रे से होती है, और ज़्यादातर लोग उसी दिन घर जाते हैं।
कोलोनोस्कोपी
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम कोलोनोस्कोपी करते हैं, जिसमें पतली कैमरे वाली नली से बड़ी आंत के अंदर देखा जाता है, ताकि पखाने में खून, पखाने की आदत में बदलाव या खून की कमी की वजह पता चले।
गांठ का ऑपरेशन और बायोप्सी
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम गांठ की जांच और इलाज करते हैं: एफएनएसी, बायोप्सी और हिस्टोपैथोलॉजी से पता चलता है कि गांठ साधारण है या कैंसर, फिर स्टेजिंग जांच और ज़रूरत पर ऑपरेशन।
I Recently Visited this Clinic in Gopalganj, Earlier I was a bit Hesitant, But Once I met the Doctor, I was so Sure & Confident that I am in Good Hands,
Very Well Experienced Doctor
Well Behaved Staffs
Nice Arrangements
& Most Important, Very Easy Procedure.
Would Always be Thankful to Mr. RK Thakur & His Team.
अनुवाद देखें
हाल ही में मैं गोपालगंज के इस क्लिनिक में आया। पहले थोड़ा झिझक रहा था, लेकिन डॉक्टर से मिलते ही मुझे पूरा भरोसा हो गया कि मैं सही हाथों में हूं। बहुत अनुभवी डॉक्टर, अच्छे व्यवहार वाला स्टाफ़, अच्छी व्यवस्था, और सबसे ज़रूरी, बहुत आसान प्रक्रिया। मैं श्री आर. के. ठाकुर और उनकी टीम का हमेशा आभारी रहूंगा।
My relative hernia surgery at Dr RK Thakur Hospital Went Very Well, Skilled Doctors, Caring Staff and Smooth recovery, Highly Satisfied.
अनुवाद देखें
मेरे रिश्तेदार का हर्निया का ऑपरेशन डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में बहुत अच्छे से हुआ। कुशल डॉक्टर, देखभाल करने वाला स्टाफ़ और आसानी से रिकवरी। हम बहुत संतुष्ट हैं।