दूरबीन से ऑपरेशन (लेप्रोस्कोपिक सर्जरी) में आम तौर पर चीरे वाले ऑपरेशन से छोटे घाव, कम दर्द और जल्दी रिकवरी होती है। लेकिन शरीर को अंदर से भरने में फिर भी समय लगता है। दूरबीन ऑपरेशन के बाद रिकवरी के बारे में यहां हमारी सर्जिकल टीम बता रही है कि ऑपरेशन के बाद क्या सामान्य है, कैसे खाएं, चलें और घाव की देखभाल करें, और खेती या मज़दूरी समेत काम पर कब लौटें। आपके अपने मामले में हमारे सर्जन की सलाह सबसे पहले मानें।
पहले एक दो दिन
- आपको सुस्ती और नींद लग सकती है, और बेहोशी के समय लगी सांस की नली से गले में हल्की ख़राश हो सकती है।
- हल्का जी मिचलाना आम है और आम तौर पर एक दिन में ठीक हो जाता है।
- डॉक्टर की अनुमति के बाद पहले पानी के घूंट, फिर हल्का खाना शुरू किया जाता है।
- छेदों की जगह दर्द सामान्य है और बताई गई दवा से काबू में रहता है।
आम दूरबीन ऑपरेशनों के बाद ज़्यादातर मरीज़ हालत के हिसाब से 1 से 2 दिन में घर चले जाते हैं।
कंधे में दर्द क्यों होता है?
पेट के ऑपरेशन के बाद कंधे में दर्द आम है और आम तौर पर किसी गड़बड़ी का संकेत नहीं है।
दूरबीन के ऑपरेशन में पेट में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरी जाती है ताकि सर्जन अंदर देख सकें। कुछ गैस थोड़े समय तक अंदर रह जाती है और छाती और पेट के बीच की मांसपेशी (डायाफ्राम) को परेशान करती है। इस जगह की नसें कंधे से जुड़ी होती हैं, इसलिए दर्द कंधे में महसूस होता है।
गैस सोख लिए जाने पर यह दर्द आम तौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। चलना, करवट बदलना और बताई गई दर्द की दवा लेना मदद करता है। सीने में दर्द या सांस फूलना अलग बात है: ऐसा हो तो तुरंत बताएं।
ऑपरेशन के बाद खाना
- हल्के, घर के बने खाने से शुरू करें, जैसे खिचड़ी, दाल चावल, दलिया, दही, सूप, नरम रोटी और उबली सब्ज़ी।
- एक बार में ज़्यादा खाने की जगह थोड़ा थोड़ा कई बार खाएं।
- पहले एक दो हफ़्ते ज़्यादा तला हुआ, चिकना और मसालेदार खाना न खाएं। पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद कुछ हफ़्तों तक चिकनाई धीरे धीरे बढ़ाएं।
- भरपूर पानी पिएं, जब तक डॉक्टर ने पानी कम करने को न कहा हो।
- शुगर हो तो जांच करते रहें और दवा बताए अनुसार लें।
- शराब, तंबाकू और बीड़ी सिगरेट से दूर रहें, इनसे घाव देर से भरता है।
चलना फिरना और आराम
ऑपरेशन के बाद चलना बहुत फ़ायदेमंद है। हमारी नर्सिंग टीम ज़्यादातर मरीज़ों को उसी दिन या अगले दिन चलने में मदद करती है।
- घर या आंगन में दिन में कई बार थोड़ा थोड़ा टहलें, और धीरे धीरे बढ़ाएं।
- चलने से पैरों में खून का थक्का, छाती का इन्फेक्शन और कब्ज़ से बचाव होता है। गैस का दर्द भी जल्दी ठीक होता है।
- हर घंटे कुछ बार गहरी सांस लें।
- थकान हो तो आराम करें, लेकिन पूरा दिन बिस्तर पर न पड़े रहें।
घाव और टांकों की देखभाल
- आम तौर पर पेट पर 3 या 4 छोटे घाव होते हैं। पट्टी साफ़ और सूखी रखें।
- घाव पर हल्दी, घी, तेल, पाउडर या कोई घरेलू लेप न लगाएं।
- रोज़ घाव देखें। हल्का नीलापन और छूने पर थोड़ा दर्द सामान्य है।
- कुछ टांके अपने आप घुल जाते हैं। बाकी टांके दोबारा दिखाने पर, अक्सर ऑपरेशन के लगभग 7 से 10 दिन बाद, काटे जाते हैं। आपके टांके किस तरह के हैं, यह हमारे सर्जन बताएंगे।
नहाना
- ज़्यादातर मरीज़ 2 से 3 दिन बाद नहा सकते हैं, अगर पट्टी वॉटरप्रूफ़ हो या हमारे सर्जन ने अनुमति दी हो। छुट्टी के समय दी गई सलाह मानें।
- धीरे से पानी डालें, घाव को रगड़ें नहीं, और साफ़ तौलिये से हल्के हाथ से सुखाएं।
- घाव पूरी तरह भरने तक तालाब, नदी या पोखर में न नहाएं और टब में न बैठें।
कब्ज़
दर्द की दवा, कम चलने और कम खाने की वजह से ऑपरेशन के बाद कब्ज़ आम है। ज़ोर लगाने से तकलीफ़ होती है, ख़ासकर हर्निया के ऑपरेशन के बाद।
- नियमित पानी पिएं और पपीता जैसे फल, सब्ज़ी और सलाद खाएं।
- रोज़ टहलें।
- 2 से 3 दिन तक पाखाना न हो तो हमारे डॉक्टर से हल्की दवा पूछें। अपने मन से तेज़ दवा न लें।
वज़न उठाना, गाड़ी चलाना और काम पर लौटना
- वज़न उठाना: ज़्यादातर दूरबीन ऑपरेशनों के बाद लगभग 2 से 4 हफ़्ते तक भारी चीज़ें न उठाएं, जैसे पानी से भरी बाल्टी, गैस सिलेंडर, अनाज की बोरी या छोटा बच्चा। हर्निया के ऑपरेशन के बाद हमारे सर्जन ज़्यादा समय रुकने को कह सकते हैं।
- गाड़ी और मोटरसाइकिल: जब तक बिना दर्द के मुड़ न सकें और अचानक ब्रेक न लगा सकें, और नींद लाने वाली दर्द की दवा बंद न हो, तब तक गाड़ी या मोटरसाइकिल न चलाएं। बहुत से लोगों के लिए यह लगभग 1 से 2 हफ़्ते होता है। शुरू के दिनों में ख़राब सड़कों पर लंबा सफ़र न करें।
- दफ़्तर, दुकान या हल्का काम: बहुत से मरीज़ लगभग 1 से 2 हफ़्ते में लौट आते हैं।
- खेती, निर्माण और मज़दूरी: इनमें पेट पर ज़ोर पड़ता है। ऑपरेशन के प्रकार और घाव भरने के हिसाब से बहुत से मरीज़ लगभग 3 से 6 हफ़्ते में धीरे धीरे लौट सकते हैं। पहले हल्के काम से शुरू करें।
ये आम समय सीमाएं हैं। अगर ऑपरेशन चीरे वाले में बदलना पड़ा, या इन्फेक्शन या फटा अपेंडिक्स था, तो रिकवरी में ज़्यादा समय लगता है। आपकी हालत देखकर हमारे सर्जन तय करेंगे।
दोबारा दिखाने (फॉलो-अप) का दिन
बताई गई तारीख़ पर दिखाने ज़रूर आएं। छुट्टी के कागज़ और दवाएं साथ लाएं। अगर निकाला गया अंग, जैसे पित्त की थैली या अपेंडिक्स, जांच (बायोप्सी) के लिए भेजा गया था, तो उसकी रिपोर्ट लेकर हमारे डॉक्टर को दिखाएं।
डॉक्टर को कब दिखाएं: ख़तरे के संकेत
इनमें से कुछ भी हो तो कृपया हमें फ़ोन करें या हमारी इमरजेंसी में आएं:
- 100°F या उससे ज़्यादा बुखार, या कंपकंपी।
- दर्द कम होने की जगह बढ़ रहा हो, या बताई गई दवा से काबू में न आए।
- घाव में लाली, सूजन, पस या खून आना।
- बार बार उल्टी, या कुछ भी खा पी न पाना।
- पेट फूलना और सख़्त होना, या दर्द के साथ हवा और पाखाना न निकलना।
- आंखों या त्वचा में पीलापन, ख़ासकर पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद।
- सांस फूलना, सीने में दर्द, या एक पैर में सूजन और दर्द।
- पेशाब करने में दिक़्क़त।
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हम गोपालगंज, सीवान, छपरा और आसपास के ज़िलों के मरीज़ों की ऑपरेशन से पहले और बाद में पूरी देखभाल करते हैं। रिकवरी के दौरान कोई सवाल हो तो आप हमें बेझिझक फ़ोन कर सकते हैं। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: दूरबीन से पित्त की थैली की पथरी का ऑपरेशन, जो सबसे आम दूरबीन ऑपरेशनों में से एक है।
गोपालगंज में हमारी इमरजेंसी 24x7 खुली है। ऑपरेशन के बाद सलाह के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें। आप हमारी मरीज़ गाइड भी पढ़ सकते हैं, और पथरी का दूरबीन से ऑपरेशन, दूरबीन से हर्निया का ऑपरेशन और अपेंडिक्स का ऑपरेशन के बारे में जान सकते हैं। ऑपरेशन से पहले हमारी ओपीडी में हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर से अपनी रिकवरी की योजना समझें।





