गोपालगंज, सीवान और आसपास के ज़िलों से हमारे पास आने वाले बहुत से मरीज़ों को जब दूरबीन से ऑपरेशन की सलाह मिलती है, तो वे समझ नहीं पाते कि इसका मतलब क्या है। कुछ सोचते हैं कि पूरा पेट खोला जाएगा, तो कुछ सोचते हैं कि दूरबीन का मतलब असली ऑपरेशन ही नहीं है। पहली ओपीडी से लेकर घर जाने तक दूरबीन से ऑपरेशन कैसे होता है, यह स्टेप बाय स्टेप जान लेने से मन की चिंता काफ़ी कम हो जाती है। उदाहरण के लिए हमने पित्त की थैली की पथरी जैसा प्लान किया गया ऑपरेशन लिया है; ज़्यादातर दूरबीन ऑपरेशन इसी तरह होते हैं।
दूरबीन विधि से ऑपरेशन क्या है, और दूरबीन से ऑपरेशन कैसे होता है?
लेप्रोस्कोपी (दूरबीन से ऑपरेशन) में सर्जन एक छोटे छेद से पेट के अंदर एक पतली दूरबीन डालते हैं, जिसमें कैमरा और रोशनी होती है। इसे लेप्रोस्कोप कहते हैं। कैमरा अंदर की बड़ी तस्वीर स्क्रीन पर दिखाता है। फिर सर्जन 2 या 3 और छोटे छेदों से लंबे, पतले औज़ार डालकर, स्क्रीन देखते हुए ऑपरेशन करते हैं। यह असली ऑपरेशन है, जो बेहोशी देकर होता है, लेकिन एक बड़े चीरे की जगह छोटे छेदों से किया जाता है।
स्टेप 1: ओपीडी में परामर्श
आप ओपीडी में हमारे सर्जन से मिलते हैं। वे आपकी तकलीफ़ पूछते हैं, जांच करते हैं और अल्ट्रासाउंड जैसी रिपोर्ट देखते हैं। अगर ऑपरेशन ज़रूरी है, तो वे बताते हैं कि क्यों, क्या विकल्प हैं, ऑपरेशन किस तरीके से होगा, कितने दिन रुकना होगा और रिकवरी कैसी होगी। डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर दूरबीन के ऑपरेशन से पहले हर मरीज़ के परिवार के एक सदस्य को पूरी प्रक्रिया समझाते हैं, ताकि परिवार को पता रहे कि क्या होने वाला है। भर्ती से पहले हम खर्च की पूरी जानकारी देते हैं, और आयुष्मान कार्ड वाले मरीज़ हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पूछ सकते हैं कि उनका ऑपरेशन कवर है या नहीं।
स्टेप 2: जांच और फिटनेस
ऑपरेशन से पहले हम कुछ जांच कराते हैं, ताकि पता चले कि आप बेहोशी के लिए फिट हैं और ऑपरेशन सुरक्षित तरीके से प्लान हो सके। आम तौर पर ये जांच होती हैं:
- खून की जांच, जैसे CBC, शुगर, किडनी और लिवर की जांच, और हेपेटाइटिस जैसे इन्फेक्शन की जांच।
- उम्र और सेहत के हिसाब से ईसीजी और छाती का एक्स-रे।
- ज़रूरत पर और जांच, जैसे दिल के मरीज़ों में ECHO।
- बेहोशी के डॉक्टर द्वारा जांच, जिसे प्री-एनेस्थेटिक चेकअप कहते हैं।
पैथोलॉजी लैब, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी और ECHO की सुविधा हमारे अस्पताल में ही है। शुगर, बीपी या दिल की बीमारी हो तो ऑपरेशन से पहले दवा बदली जा सकती है। कृपया अपनी हर दवा के बारे में हमारे डॉक्टर को बताएं, ख़ासकर खून पतला करने की दवा।
स्टेप 3: ऑपरेशन की तैयारी
- खाली पेट रहना: हम आपको बताएंगे कि ऑपरेशन से पहले कितने घंटे कुछ भी खाना पीना नहीं है, सुबह के ऑपरेशन में आम तौर पर रात से। कृपया बताए गए समय का ठीक से पालन करें, क्योंकि खाली पेट बेहोशी को सुरक्षित बनाता है।
- सहमति: आपके सभी सवालों के जवाब देने के बाद आप और परिवार का एक सदस्य सहमति पत्र पर दस्तख़त करते हैं। इसमें लिखा होता है कि सुरक्षा के लिए ज़रूरत पड़ने पर चीरे वाला ऑपरेशन करना पड़ सकता है।
- तैयारी: आप नहाते हैं, गहने उतारते हैं और अस्पताल का गाउन पहनते हैं। पानी और दवा के लिए हाथ में ड्रिप (आईवी लाइन) लगाई जाती है।
अगर आप दूर से आ रहे हैं, तो क्या क्या साथ लाना है, यह हमारी ऑपरेशन की तैयारी की चेकलिस्ट में देखें।
स्टेप 4: बेहोशी
हमारे ऑपरेशन थिएटर में दिल की धड़कन, बीपी और ऑक्सीजन देखने के लिए मशीनें लगाई जाती हैं। ज़्यादातर दूरबीन ऑपरेशन जनरल एनेस्थीसिया में होते हैं, यानी आप पूरी तरह बेहोश रहते हैं और ऑपरेशन महसूस नहीं करते। बेहोश होने के बाद सांस की नली लगाई जाती है, और हमारे बेहोशी के डॉक्टर पूरे समय आप पर नज़र रखते हैं।
स्टेप 5: थिएटर के अंदर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कैसे होती है
- पहला छोटा छेद: हमारे सर्जन आम तौर पर नाभि पर या उसके पास एक छोटा छेद करते हैं।
- जगह बनाने के लिए गैस: पेट में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भरी जाती है। यह पेट की दीवार को तंबू की तरह ऊपर उठा देती है, जिससे सर्जन को देखने और काम करने की जगह मिलती है।
- कैमरा अंदर: दूरबीन अंदर डाली जाती है और पेट के अंदर की बड़ी तस्वीर स्क्रीन पर दिखती है।
- और छोटे छेद: औज़ारों के लिए आम तौर पर 2 या 3 और छेद किए जाते हैं, हर एक लगभग आधे से एक सेंटीमीटर का।
- असली ऑपरेशन: सर्जन स्क्रीन देखते हुए ज़रूरी काम करते हैं। पित्त की थैली के ऑपरेशन में थैली की नली और नस को क्लिप से बंद करके थैली को लिवर से अलग किया जाता है। अपेंडिक्स के ऑपरेशन में अपेंडिक्स को बांधकर निकाला जाता है। डायग्नोस्टिक लेप्रोस्कोपी में सर्जन बीमारी की वजह जानने के लिए अंगों को ध्यान से देखते हैं और ज़रूरत पर छोटा टुकड़ा (बायोप्सी) लेते हैं।
- बाहर निकालना: निकाला गया हिस्सा किसी एक छेद से, अक्सर एक छोटी थैली में, बाहर लाया जाता है और आम तौर पर हिस्टोपैथोलॉजी यानी माइक्रोस्कोप जांच के लिए भेजा जाता है।
- छेद बंद करना: सर्जन देखते हैं कि कहीं खून तो नहीं बह रहा, गैस बाहर निकालते हैं और छोटे छेदों को टांके, क्लिप या स्किन ग्लू से बंद करके छोटी पट्टी लगाते हैं।
अगर अंदर ज़्यादा सूजन, खून बहना या घना चिपकाव मिले, तो हमारे सर्जन आपकी सुरक्षा के लिए चीरे वाला ऑपरेशन कर सकते हैं। इसे कन्वर्ज़न कहते हैं। ऐसा कुछ ही मरीज़ों में होता है और यह सोच समझकर लिया गया फ़ैसला है, नाकामी नहीं।
दूरबीन के ऑपरेशन में कितना समय लगता है?
थिएटर का समय ऑपरेशन और बीमारी की जटिलता पर निर्भर करता है। मोटे तौर पर, अपेंडिक्स का दूरबीन से ऑपरेशन आम तौर पर 30 से 60 मिनट, पित्त की थैली का 45 से 90 मिनट, और हर्निया का 45 मिनट से 2 घंटे लेता है। परिवार को इससे ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ता है, क्योंकि तैयारी, बेहोशी और होश में आने में भी समय लगता है।
स्टेप 6: होश में आना और वार्ड
ऑपरेशन के बाद आपको होश में लाया जाता है और पूरी तरह जागने तक रिकवरी एरिया में देखा जाता है, फिर वार्ड या कमरे में भेजा जाता है। जिन मरीज़ों को कड़ी निगरानी चाहिए, उन्हें कुछ समय हमारे आईसीयू में रखा जा सकता है। पहले कुछ घंटों में ये महसूस हो सकता है:
- छोटे छेदों पर दर्द।
- पेट फूलना, और गैस से कंधे में दर्द, जो आम तौर पर 1 से 3 दिन में ठीक हो जाता है।
- सांस की नली से गले में ख़राश, या हल्का जी मिचलाना।
ज़्यादातर मरीज़ कुछ घंटों में, पहले सहारे से, चलने लगते हैं। हमारी टीम की अनुमति पर पानी के घूंट, फिर तरल और हल्का खाना शुरू होता है।
स्टेप 7: छुट्टी और फॉलो-अप
प्लान किए गए दूरबीन ऑपरेशन के बाद ज़्यादातर मरीज़ 1 से 2 दिन में घर चले जाते हैं, जब वे चलने और खाने लगें और दर्द काबू में हो। जाने से पहले हमारी टीम दवा, घाव की देखभाल, नहाना, खाना और फॉलो-अप की तारीख़ समझाती है। फॉलो-अप पर, आम तौर पर लगभग एक हफ़्ते बाद, घाव देखे जाते हैं, ज़रूरत हो तो टांके खोले जाते हैं और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट पर बात होती है। ऑपरेशन के बाद के हफ़्तों की जानकारी के लिए कृपया हमारा लेख पढ़ें: दूरबीन ऑपरेशन के बाद रिकवरी।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- आपको पित्त की थैली की पथरी, अपेंडिक्स, हर्निया या किसी और समस्या में ऑपरेशन की सलाह मिली है और आप जानना चाहते हैं कि यह दूरबीन से हो सकता है या नहीं।
- बार बार पेट दर्द होता है और जांच में वजह नहीं मिली।
- ऑपरेशन के बाद बुखार, घाव से मवाद, बढ़ता दर्द, बार बार उल्टी, आंखें पीली होना या सांस फूलना हो। कृपया तुरंत हमसे संपर्क करें।
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में डॉ. ठाकुर सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक हमारी ओपीडी में मरीज़ देखते हैं, और हमारी इमरजेंसी 24 घंटे खुली रहती है। कृपया ओपीडी के लिए या पहले रिपोर्ट भेजने के लिए +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें। फ़ैसला लेने से पहले हम आपको आपका ऑपरेशन स्टेप बाय स्टेप समझाएंगे।





