पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद लगभग हर मरीज़ और परिवार हमसे एक ही सवाल पूछता है: अब क्या खाएं? अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर लोग कुछ हफ़्तों में सामान्य और सेहतमंद खाना खाने लगते हैं। नीचे हम सरल शब्दों में बता रहे हैं कि पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद क्या खाना चाहिए, कुछ समय किन चीज़ों का परहेज करें, और पतला पाखाना हो तो क्या करें। हमने उदाहरण घर के रोज़ के बिहारी खाने से लिए हैं।
पित्त की थैली निकालने के बाद डाइट क्यों मायने रखती है?
पित्त की थैली (गॉलब्लैडर) लिवर के नीचे एक छोटी थैली है। इसमें पित्त जमा रहता है, जो लिवर में बनने वाला रस है और चिकनाई वाला खाना पचाने में मदद करता है। जब आप तला या चिकना खाना खाते हैं, तो थैली एक साथ ज़्यादा पित्त छोड़ती है।
थैली निकलने के बाद (इस ऑपरेशन को कोलेसिस्टेक्टॉमी कहते हैं) भी लिवर पित्त बनाता रहता है। अब पित्त जमा होने की जगह धीरे धीरे और लगातार आंत में जाता है। यानी शरीर चिकनाई पचा सकता है, लेकिन शुरू के हफ़्तों में बहुत भारी और तला हुआ खाना मुश्किल से पच सकता है। कुछ लोगों को ऐसे खाने के बाद पेट फूलना, गैस या पतला पाखाना होता है। ज़्यादातर लोगों में शरीर के आदी होने के साथ यह ठीक हो जाता है।
ऑपरेशन के बाद पहले कुछ दिनों का खाना
हमारी टीम आपको हर कदम पर बताएगी। आम तौर पर तरीका यह होता है:
- ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद: जी न मिचला रहा हो तो पहले पानी के घूंट, फिर दाल का पानी, नारियल पानी या पतला सूप।
- उसी शाम या अगले दिन: हल्का, नरम खाना, जैसे खिचड़ी, दलिया, पतली दाल के साथ चावल, दही चावल या लौकी की सब्ज़ी के साथ नरम रोटी।
- घर पर पहले हफ़्ते: समय पर थोड़ा थोड़ा खाना, कम तेल वाला सादा घर का खाना।
धीरे धीरे और चबाकर खाएं, भूख न हो तो ज़बरदस्ती न खाएं, और दिन भर में भरपूर पानी पिएं।
पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद क्या खाना चाहिए: घर के खाने के उदाहरण
किसी ख़ास या महंगे खाने की ज़रूरत नहीं है। कम तेल में बना घर का सामान्य खाना सबसे अच्छा है।
- दाल: मूंग, मसूर या अरहर की पतली दाल, बहुत हल्के छौंक के साथ।
- रोटी और चावल: बिना ऊपर से घी लगी रोटी, सादा उबला चावल, या कम तेल में बना जीरा चावल।
- सब्ज़ी: लौकी, तोरई, परवल, कद्दू, टिंडा, गाजर, बीन्स और पालक, उबली या कम तेल में बनी।
- दही और मट्ठा: सादा दही, मट्ठा (छाछ) और टोंड या कम मलाई वाला दूध।
- फल: पपीता, केला, सेब, अमरूद, अनार और मौसमी फल।
- चूड़ा दही: भिगोया हुआ चूड़ा और दही हल्का बिहारी खाना है, जो बहुत से मरीज़ों को आसानी से पचता है।
- सत्तू: सत्तू का शरबत प्रोटीन और रेशा देता है, लेकिन शुरू में थोड़ी मात्रा में लें, जैसे एक छोटा गिलास, क्योंकि कुछ लोगों को इससे गैस होती है।
- प्रोटीन: लगभग एक हफ़्ते बाद, अगर आप मांसाहारी हैं, तो उबला अंडा, कम तेल वाली मछली या हल्की घर जैसी चिकन करी। पनीर थोड़ी मात्रा में।
शुरू के हफ़्तों का एक दिन कैसा हो
- सुबह: चाय या दूध के साथ रोटी या एक कटोरी दलिया, या छोटा गिलास सत्तू।
- दोपहर से पहले: पपीता या केला जैसा कोई फल।
- दोपहर का खाना: चावल, पतली दाल, उबली या कम तेल वाली सब्ज़ी और दही।
- शाम: मट्ठा, चूड़ा दही, या थोड़ा भुना चना।
- रात का खाना: दो नरम रोटी, सब्ज़ी और दाल, सोने से दो घंटे पहले।
पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद परहेज: 4 से 6 हफ़्ते क्या कम खाएं
- तला हुआ खाना: समोसा, पकौड़ी, पूड़ी, कचौड़ी, भुजिया और दूसरे तले नमकीन।
- ज़्यादा घी और तेल: रोटी या दाल पर ऊपर से घी, गाढ़ी तरी वाली सब्ज़ी, घी में डुबोई लिट्टी, और ऊपर तेल तैरने वाले पकवान।
- भारी और मलाईदार चीज़ें: मलाई, रबड़ी, क्रीम और खोए की मिठाई।
- बहुत तीखा खाना और अचार ज़्यादा मात्रा में।
- मटन करी और भारी बिरयानी, जो बहुत चिकनी होती हैं।
- पैकेट वाला और बाहर का खाना, जैसे चिप्स, नमकीन, मैगी और ठेले का तला खाना।
- शराब, और बहुत ज़्यादा चाय या कॉफ़ी।
परहेज का मतलब हमेशा के लिए बंद करना नहीं है। कुछ हफ़्तों बाद ज़्यादातर लोग इन्हें थोड़ी मात्रा में फिर से शुरू करके देख सकते हैं कि शरीर कैसे लेता है।
गॉलब्लैडर ऑपरेशन के बाद दस्त हो तो क्या करें?
कुछ लोगों को ऑपरेशन के बाद कुछ हफ़्तों तक, ख़ासकर चिकना खाना खाने के बाद, पतला पाखाना होता है। ज़्यादातर लोगों में यह समय के साथ ठीक हो जाता है। ये उपाय मदद करते हैं:
- दिन में 2 या 3 बार भरपेट खाने की जगह 5 से 6 बार थोड़ा थोड़ा खाएं।
- तला, चिकना और बहुत तीखा खाना कम करें।
- पाखाना बांधने वाली चीज़ें लें, जैसे केला, दही, चावल, दलिया और ओट्स।
- भरपूर पानी पिएं, और बार बार पाखाना हो तो ORS लें, ताकि कमज़ोरी और पानी की कमी न हो।
- किस खाने से पेट ख़राब होता है, यह लिख लें और कुछ समय उससे बचें।
अगर पतला पाखाना कुछ हफ़्तों से ज़्यादा चले, बहुत बार हो, रात में नींद से उठाए, या उसके साथ खून, बुखार या वज़न घटना हो, तो कृपया हमें दिखाएं। दवा से मदद मिल सकती है, और दूसरी वजहों की जांच भी ज़रूरी हो सकती है। कृपया अपने मन से दवा शुरू न करें।
लंबे समय तक खानपान कैसा रखें
लंबे समय में ज़्यादातर लोग सामान्य खाना खाते हैं। अच्छी आदतें पाचन और पूरी सेहत के लिए फ़ायदेमंद हैं:
- समय पर खाना खाएं, और लंबे समय भूखे रहकर फिर एक साथ ज़्यादा न खाएं।
- तला और बहुत चिकना खाना कभी कभार ही खाएं, रोज़ नहीं।
- रोज़ कुछ रेशे वाला खाना लें: दाल, सब्ज़ी, फल और मोटा अनाज।
- वज़न ठीक रखें और रोज़ टहलें।
- शुगर है तो शुगर वाली डाइट की सलाह मानते रहें।
रिकवरी में और क्या ध्यान रखें
खाना रिकवरी का सिर्फ़ एक हिस्सा है। चलना, घाव की देखभाल और काम पर लौटना हमारे लेख दूरबीन ऑपरेशन के बाद रिकवरी में बताया गया है। अगर आप अभी ऑपरेशन के बारे में सोच रहे हैं, तो कृपया पढ़ें पित्त की थैली में पथरी के लक्षण और ऑपरेशन कब ज़रूरी है, या देखें हमारा पेज पित्त की थैली की पथरी का दूरबीन से ऑपरेशन।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद इनमें से कुछ भी हो तो कृपया तुरंत हमसे संपर्क करें:
- आंखें या त्वचा पीली होना, पेशाब गहरा पीला या पाखाना मटमैला सफ़ेद होना।
- बुखार, कंपकंपी, या घाव पर लाली या मवाद।
- पेट दर्द जो बढ़ता जाए, या पेट फूलकर कस जाए।
- बार बार उल्टी, या कुछ भी खा पी न पाना।
- पतला पाखाना जो बहुत बार हो, खून वाला हो या हफ़्तों तक चले।
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद मरीज़ों का अपनी ओपीडी में फॉलो-अप करते हैं, जहां आप खाने से जुड़े सवाल हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर से पूछ सकते हैं। कृपया फॉलो-अप के लिए +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें, या हमारा संपर्क पेज देखें। हमारी इमरजेंसी 24 घंटे खुली रहती है।





