पित्त की थैली में पथरी एक बहुत आम समस्या है, जिसके लिए गोपालगंज और आसपास के ज़िलों से लोग सर्जन के पास आते हैं। कई लोगों को इसका पता किसी और वजह से कराए गए अल्ट्रासाउंड में चलता है, तो कुछ लोग रात में पेट के ऊपरी हिस्से में तेज़ दर्द के बाद आते हैं। यहां हमारी सर्जिकल टीम आसान भाषा में बता रही है कि पित्त की थैली में पथरी के लक्षण क्या हैं, कौन सी जांच होती है और ऑपरेशन कब ज़रूरी है।
पित्त की थैली क्या है और पथरी क्यों बनती है?
पित्त की थैली (गॉलब्लैडर) लिवर के नीचे, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में एक छोटी थैली है। इसमें पित्त जमा रहता है, जो लिवर में बनने वाला रस है और चिकनी चीज़ें पचाने में मदद करता है।
जब पित्त गाढ़ा हो जाता है, तो छोटे कण बनते हैं जो धीरे धीरे पथरी बन जाते हैं। पथरी रेत के दाने जितनी छोटी भी हो सकती है और कंचे जितनी बड़ी भी। यह महिलाओं में, 40 साल से ज़्यादा उम्र में, मोटापे में, डिलीवरी के बाद और शुगर के मरीज़ों में ज़्यादा देखी जाती है, लेकिन किसी को भी हो सकती है।
पित्त की थैली में पथरी के लक्षण
बहुत से लोगों को पथरी होने पर भी कोई तकलीफ़ नहीं होती। इसे साइलेंट पथरी कहते हैं। जब लक्षण होते हैं, तो आम तौर पर ये होते हैं:
- पेट के ऊपरी दाहिने या बीच वाले हिस्से में दर्द, अक्सर भारी या तला हुआ खाना खाने के बाद, और कई बार रात में।
- दर्द का पीठ या दाहिने कंधे की तरफ़ जाना।
- दर्द के साथ जी मिचलाना या उल्टी।
- गैस, पेट फूलना और भारीपन, हालांकि ये पेट की दूसरी बीमारियों में भी होते हैं।
यह दर्द आधे घंटे से कुछ घंटों तक रहकर अपने आप कम हो सकता है। बहुत से लोग इसे गैस या एसिडिटी समझकर टाल देते हैं।
ख़तरे के संकेत
इनमें से कुछ भी हो तो कृपया बिना देर किए अस्पताल आएं:
- कई घंटों तक दर्द कम न हो, ख़ासकर बुखार और कंपकंपी के साथ। यह थैली में इन्फेक्शन (कोलेसिस्टाइटिस) हो सकता है।
- आंखें या त्वचा पीली होना, पेशाब गहरा पीला होना या पाखाना मटमैला सफ़ेद होना। यह पीलिया है, जो पथरी के पित्त की नली में फंसने से हो सकता है।
- पेट के ऊपर तेज़ दर्द जो पीठ तक जाए और बार बार उल्टी हो। यह पैंक्रियाटाइटिस (पैंक्रियास में सूजन) हो सकता है।
कौन सी जांच होती है?
- पेट का अल्ट्रासाउंड: यह मुख्य जांच है। इसमें पथरी, थैली की दीवार और पित्त की नली दिख जाती है। आम तौर पर खाली पेट आने को कहा जाता है।
- खून की जांच: लिवर फंक्शन टेस्ट, CBC और ज़रूरत पर पैंक्रियास की जांच, ताकि इन्फेक्शन, पीलिया या पैंक्रियाटाइटिस का पता चले।
- ज़रूरत पर दूसरी जांच: नली चौड़ी दिखे या पीलिया हो, तो डॉक्टर MRCP जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।
- ऑपरेशन से पहले फिटनेस जांच: जैसे शुगर, ईसीजी और छाती का एक्स-रे, उम्र और सेहत के हिसाब से।
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी जांच, डिजिटल एक्स-रे और ईसीजी, सब हमारे यहां एक ही जगह होते हैं। कृपया अपनी सभी पुरानी रिपोर्ट साथ लाएं।
ऑपरेशन कब ज़रूरी है?
जिस पथरी से तकलीफ़ हो रही हो, उसका मान्य इलाज पित्त की थैली को निकालना है, जिसे कोलेसिस्टेक्टॉमी कहते हैं। ज़्यादातर मरीज़ों में यह लेप्रोस्कोपी (दूरबीन से ऑपरेशन) द्वारा कुछ छोटे छेदों से किया जाता है।
ऑपरेशन की सलाह आम तौर पर तब दी जाती है जब:
- एक या ज़्यादा बार पथरी का दर्द उठ चुका हो।
- इन्फेक्शन, पथरी से पीलिया या पैंक्रियाटाइटिस हो चुका हो।
- अल्ट्रासाउंड में पॉलिप या मोटी दीवार जैसी कोई बात दिखे और सर्जन को थैली निकालना ज़्यादा सुरक्षित लगे।
अगर पथरी संयोग से मिली है और कोई तकलीफ़ नहीं है, तो हर बार ऑपरेशन ज़रूरी नहीं होता। हमारे सर्जन आपकी उम्र, सेहत और अल्ट्रासाउंड देखकर सिर्फ़ नज़र रखने की सलाह भी दे सकते हैं।
अगर पथरी खिसक कर पित्त की मुख्य नली (CBD) में चली गई हो, तो उसे भी निकालना पड़ता है। हालत के हिसाब से यह एंडोस्कोपी वाली प्रक्रिया से या CBD एक्सप्लोरेशन से किया जाता है, यानी ऑपरेशन करके नली खोलकर पथरी निकालना। हमारे सर्जन बताएंगे कि आपके लिए कौन सा तरीका ठीक है।
पथरी से जुड़े आम भ्रम
भ्रम: घरेलू नुस्खों से पथरी गल जाएगी
लोग अक्सर कहते हैं कि नींबू पानी, सेब का रस, जैतून का तेल, कुल्थी की दाल या कोई चूर्ण पथरी गला देगा। इसका कोई भरोसेमंद सबूत नहीं है। तेल वाले नुस्खे के बाद पाखाने में जो गोलियां दिखती हैं, वे ज़्यादातर पथरी नहीं बल्कि तेल से बने गोले होते हैं। इस बीच पथरी अंदर ही रहती है और परेशानी बढ़ा सकती है।
कुछ दवाएं चुने हुए मरीज़ों में कुछ छोटी कोलेस्ट्रॉल वाली पथरी को धीरे धीरे घोल सकती हैं, लेकिन इनमें कई महीने लगते हैं और दवा बंद करने पर पथरी अक्सर फिर बन जाती है।
भ्रम: सिर्फ़ पथरी निकाल दें, थैली रहने दें
कुछ मरीज़ हमसे पूछते हैं कि क्या सिर्फ़ पथरी निकालकर थैली बचाई जा सकती है। जिस थैली में एक बार पथरी बन चुकी है, उसमें दोबारा पथरी बनने की संभावना ज़्यादा रहती है। इसीलिए मान्य इलाज पथरी समेत पूरी थैली निकालना है।
भ्रम: थैली निकलने के बाद आदमी सामान्य नहीं रह पाता
थैली निकलने के बाद भी लिवर पित्त बनाता रहता है, जो सीधे आंत में जाता है। ज़्यादातर लोग कुछ हफ़्तों में सामान्य खाना खाने लगते हैं।
ऑपरेशन में क्या होता है?
दूरबीन से यह ऑपरेशन बेहोशी (जनरल एनेस्थीसिया) देकर 3 या 4 छोटे छेदों से होता है। ज़्यादातर मरीज़ हालत के हिसाब से 1 से 2 दिन में घर चले जाते हैं। कभी कभी ज़्यादा सूजन या खून बहने पर सुरक्षा के लिए सर्जन को चीरे वाला (ओपन) ऑपरेशन करना पड़ता है। और जानने के लिए पढ़ें: दूरबीन और चीरे वाले ऑपरेशन में अंतर और दूरबीन ऑपरेशन के बाद रिकवरी।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- खाने के बाद बार बार पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द उठता हो।
- अल्ट्रासाउंड में पथरी आई है और आप तय नहीं कर पा रहे कि आगे क्या करें।
- आपको शुगर या कोई और पुरानी बीमारी है और पथरी का पता चला है।
- बुखार, आंखों में पीलापन या उल्टी के साथ तेज़ दर्द हो। यह इमरजेंसी है, और हमारी इमरजेंसी 24x7 खुली रहती है।
गोपालगंज में पित्त की पथरी का इलाज कराने के लिए गोपालगंज, सीवान, छपरा और आसपास के ज़िलों के मरीज़ डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हमारे पास आते हैं। निकलने से पहले आप अपनी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट हमें व्हाट्सऐप पर भेज सकते हैं। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: दूरबीन से पित्त की थैली की पथरी का ऑपरेशन।
हमारे यहां पित्त की थैली की पथरी की जांच और इलाज हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर करते हैं, जो 16 साल से ज़्यादा अनुभव वाले लेप्रोस्कोपिक और जनरल सर्जन हैं। ओपीडी में दिखाने के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें, या हमारा संपर्क पेज देखें। आयुष्मान कार्ड वाले मरीज़ हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पूछ सकते हैं कि उनका इलाज कार्ड में कवर है या नहीं।





