पित्त की थैली में पथरी के लक्षण, जांच और ऑपरेशन कब ज़रूरी है

पित्त की थैली में पथरी के लक्षण, जांच और ऑपरेशन कब ज़रूरी है

खाने के बाद पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द पित्त की थैली में पथरी का संकेत हो सकता है। हमारे सर्जन बता रहे हैं इसके लक्षण, जांच, आम भ्रम और यह कि ऑपरेशन कब ज़रूरी होता है।

मुख्य बातें

  • तला हुआ खाना खाने के बाद, अक्सर रात में, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द पित्त की थैली में पथरी का आम लक्षण है।
  • पेट का अल्ट्रासाउंड मुख्य जांच है। खून की जांच से इन्फेक्शन, पीलिया और पैंक्रियाटाइटिस का पता चलता है।
  • जिस पथरी से दर्द हो, उसका इलाज आम तौर पर पूरी थैली निकालना है, जो ज़्यादातर दूरबीन से किया जाता है।
  • घरेलू नुस्खों से पथरी नहीं गलती, और सिर्फ़ पथरी निकालकर थैली छोड़ देना मान्य इलाज नहीं है।
  • बुखार, आंखों में पीलापन या उल्टी के साथ तेज़ दर्द हो तो तुरंत अस्पताल आएं।

पित्त की थैली में पथरी एक बहुत आम समस्या है, जिसके लिए गोपालगंज और आसपास के ज़िलों से लोग सर्जन के पास आते हैं। कई लोगों को इसका पता किसी और वजह से कराए गए अल्ट्रासाउंड में चलता है, तो कुछ लोग रात में पेट के ऊपरी हिस्से में तेज़ दर्द के बाद आते हैं। यहां हमारी सर्जिकल टीम आसान भाषा में बता रही है कि पित्त की थैली में पथरी के लक्षण क्या हैं, कौन सी जांच होती है और ऑपरेशन कब ज़रूरी है।

पित्त की थैली क्या है और पथरी क्यों बनती है?

पित्त की थैली (गॉलब्लैडर) लिवर के नीचे, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में एक छोटी थैली है। इसमें पित्त जमा रहता है, जो लिवर में बनने वाला रस है और चिकनी चीज़ें पचाने में मदद करता है।

जब पित्त गाढ़ा हो जाता है, तो छोटे कण बनते हैं जो धीरे धीरे पथरी बन जाते हैं। पथरी रेत के दाने जितनी छोटी भी हो सकती है और कंचे जितनी बड़ी भी। यह महिलाओं में, 40 साल से ज़्यादा उम्र में, मोटापे में, डिलीवरी के बाद और शुगर के मरीज़ों में ज़्यादा देखी जाती है, लेकिन किसी को भी हो सकती है।

पित्त की थैली में पथरी के लक्षण

बहुत से लोगों को पथरी होने पर भी कोई तकलीफ़ नहीं होती। इसे साइलेंट पथरी कहते हैं। जब लक्षण होते हैं, तो आम तौर पर ये होते हैं:

  • पेट के ऊपरी दाहिने या बीच वाले हिस्से में दर्द, अक्सर भारी या तला हुआ खाना खाने के बाद, और कई बार रात में।
  • दर्द का पीठ या दाहिने कंधे की तरफ़ जाना।
  • दर्द के साथ जी मिचलाना या उल्टी।
  • गैस, पेट फूलना और भारीपन, हालांकि ये पेट की दूसरी बीमारियों में भी होते हैं।

यह दर्द आधे घंटे से कुछ घंटों तक रहकर अपने आप कम हो सकता है। बहुत से लोग इसे गैस या एसिडिटी समझकर टाल देते हैं।

ख़तरे के संकेत

इनमें से कुछ भी हो तो कृपया बिना देर किए अस्पताल आएं:

  • कई घंटों तक दर्द कम न हो, ख़ासकर बुखार और कंपकंपी के साथ। यह थैली में इन्फेक्शन (कोलेसिस्टाइटिस) हो सकता है।
  • आंखें या त्वचा पीली होना, पेशाब गहरा पीला होना या पाखाना मटमैला सफ़ेद होना। यह पीलिया है, जो पथरी के पित्त की नली में फंसने से हो सकता है।
  • पेट के ऊपर तेज़ दर्द जो पीठ तक जाए और बार बार उल्टी हो। यह पैंक्रियाटाइटिस (पैंक्रियास में सूजन) हो सकता है।

कौन सी जांच होती है?

  • पेट का अल्ट्रासाउंड: यह मुख्य जांच है। इसमें पथरी, थैली की दीवार और पित्त की नली दिख जाती है। आम तौर पर खाली पेट आने को कहा जाता है।
  • खून की जांच: लिवर फंक्शन टेस्ट, CBC और ज़रूरत पर पैंक्रियास की जांच, ताकि इन्फेक्शन, पीलिया या पैंक्रियाटाइटिस का पता चले।
  • ज़रूरत पर दूसरी जांच: नली चौड़ी दिखे या पीलिया हो, तो डॉक्टर MRCP जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।
  • ऑपरेशन से पहले फिटनेस जांच: जैसे शुगर, ईसीजी और छाती का एक्स-रे, उम्र और सेहत के हिसाब से।

डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी जांच, डिजिटल एक्स-रे और ईसीजी, सब हमारे यहां एक ही जगह होते हैं। कृपया अपनी सभी पुरानी रिपोर्ट साथ लाएं।

ऑपरेशन कब ज़रूरी है?

जिस पथरी से तकलीफ़ हो रही हो, उसका मान्य इलाज पित्त की थैली को निकालना है, जिसे कोलेसिस्टेक्टॉमी कहते हैं। ज़्यादातर मरीज़ों में यह लेप्रोस्कोपी (दूरबीन से ऑपरेशन) द्वारा कुछ छोटे छेदों से किया जाता है।

ऑपरेशन की सलाह आम तौर पर तब दी जाती है जब:

  • एक या ज़्यादा बार पथरी का दर्द उठ चुका हो।
  • इन्फेक्शन, पथरी से पीलिया या पैंक्रियाटाइटिस हो चुका हो।
  • अल्ट्रासाउंड में पॉलिप या मोटी दीवार जैसी कोई बात दिखे और सर्जन को थैली निकालना ज़्यादा सुरक्षित लगे।

अगर पथरी संयोग से मिली है और कोई तकलीफ़ नहीं है, तो हर बार ऑपरेशन ज़रूरी नहीं होता। हमारे सर्जन आपकी उम्र, सेहत और अल्ट्रासाउंड देखकर सिर्फ़ नज़र रखने की सलाह भी दे सकते हैं।

अगर पथरी खिसक कर पित्त की मुख्य नली (CBD) में चली गई हो, तो उसे भी निकालना पड़ता है। हालत के हिसाब से यह एंडोस्कोपी वाली प्रक्रिया से या CBD एक्सप्लोरेशन से किया जाता है, यानी ऑपरेशन करके नली खोलकर पथरी निकालना। हमारे सर्जन बताएंगे कि आपके लिए कौन सा तरीका ठीक है।

पथरी से जुड़े आम भ्रम

भ्रम: घरेलू नुस्खों से पथरी गल जाएगी

लोग अक्सर कहते हैं कि नींबू पानी, सेब का रस, जैतून का तेल, कुल्थी की दाल या कोई चूर्ण पथरी गला देगा। इसका कोई भरोसेमंद सबूत नहीं है। तेल वाले नुस्खे के बाद पाखाने में जो गोलियां दिखती हैं, वे ज़्यादातर पथरी नहीं बल्कि तेल से बने गोले होते हैं। इस बीच पथरी अंदर ही रहती है और परेशानी बढ़ा सकती है।

कुछ दवाएं चुने हुए मरीज़ों में कुछ छोटी कोलेस्ट्रॉल वाली पथरी को धीरे धीरे घोल सकती हैं, लेकिन इनमें कई महीने लगते हैं और दवा बंद करने पर पथरी अक्सर फिर बन जाती है।

भ्रम: सिर्फ़ पथरी निकाल दें, थैली रहने दें

कुछ मरीज़ हमसे पूछते हैं कि क्या सिर्फ़ पथरी निकालकर थैली बचाई जा सकती है। जिस थैली में एक बार पथरी बन चुकी है, उसमें दोबारा पथरी बनने की संभावना ज़्यादा रहती है। इसीलिए मान्य इलाज पथरी समेत पूरी थैली निकालना है।

भ्रम: थैली निकलने के बाद आदमी सामान्य नहीं रह पाता

थैली निकलने के बाद भी लिवर पित्त बनाता रहता है, जो सीधे आंत में जाता है। ज़्यादातर लोग कुछ हफ़्तों में सामान्य खाना खाने लगते हैं।

ऑपरेशन में क्या होता है?

दूरबीन से यह ऑपरेशन बेहोशी (जनरल एनेस्थीसिया) देकर 3 या 4 छोटे छेदों से होता है। ज़्यादातर मरीज़ हालत के हिसाब से 1 से 2 दिन में घर चले जाते हैं। कभी कभी ज़्यादा सूजन या खून बहने पर सुरक्षा के लिए सर्जन को चीरे वाला (ओपन) ऑपरेशन करना पड़ता है। और जानने के लिए पढ़ें: दूरबीन और चीरे वाले ऑपरेशन में अंतर और दूरबीन ऑपरेशन के बाद रिकवरी।

डॉक्टर को कब दिखाएं?

  • खाने के बाद बार बार पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द उठता हो।
  • अल्ट्रासाउंड में पथरी आई है और आप तय नहीं कर पा रहे कि आगे क्या करें।
  • आपको शुगर या कोई और पुरानी बीमारी है और पथरी का पता चला है।
  • बुखार, आंखों में पीलापन या उल्टी के साथ तेज़ दर्द हो। यह इमरजेंसी है, और हमारी इमरजेंसी 24x7 खुली रहती है।

गोपालगंज में पित्त की पथरी का इलाज कराने के लिए गोपालगंज, सीवान, छपरा और आसपास के ज़िलों के मरीज़ डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हमारे पास आते हैं। निकलने से पहले आप अपनी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट हमें व्हाट्सऐप पर भेज सकते हैं। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: दूरबीन से पित्त की थैली की पथरी का ऑपरेशन।

हमारे यहां पित्त की थैली की पथरी की जांच और इलाज हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर करते हैं, जो 16 साल से ज़्यादा अनुभव वाले लेप्रोस्कोपिक और जनरल सर्जन हैं। ओपीडी में दिखाने के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें, या हमारा संपर्क पेज देखें। आयुष्मान कार्ड वाले मरीज़ हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पूछ सकते हैं कि उनका इलाज कार्ड में कवर है या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पित्त की थैली की पथरी अपने आप ख़त्म हो जाती है?

आम तौर पर नहीं। पित्त की थैली की पथरी अपने आप गायब नहीं होती और घरेलू नुस्खों से इसके गलने का कोई भरोसेमंद सबूत नहीं है। छोटी पथरी कभी कभी खिसक कर पित्त की नली में चली जाती है, लेकिन इससे पीलिया या पैंक्रियाटाइटिस हो सकता है, इलाज नहीं। अगर पथरी से दर्द हो रहा है तो सर्जन आम तौर पर थैली निकालने की सलाह देते हैं। तकलीफ़ न हो तो नियमित जांच काफ़ी हो सकती है।

क्या पित्त की थैली के बिना जीना सुरक्षित है?

हां। पित्त की थैली सिर्फ़ पित्त को जमा करके रखती है। थैली निकलने के बाद भी लिवर पित्त बनाता रहता है, जो सीधे आंत में जाकर खाना पचाने में मदद करता है। ज़्यादातर लोग ऑपरेशन के कुछ हफ़्तों में सामान्य खाना खाने लगते हैं। कुछ लोगों को कुछ समय तक तला हुआ खाने के बाद पतला पाखाना हो सकता है, जो समय के साथ और खाने में थोड़े बदलाव से ठीक हो जाता है।

दूरबीन से पथरी के ऑपरेशन के बाद कितने दिन अस्पताल में रहना पड़ता है?

ज़्यादातर मरीज़ दूरबीन से पित्त की थैली के ऑपरेशन के बाद 1 से 2 दिन में घर चले जाते हैं, जब वे चलने फिरने लगें, खाना खाने लगें और दर्द काबू में हो। जिन मरीज़ों को गंभीर इन्फेक्शन या पीलिया था, या जिनका ऑपरेशन चीरे से करना पड़ा, उन्हें ज़्यादा दिन रुकना पड़ सकता है। छुट्टी का दिन सर्जन आपकी हालत देखकर तय करते हैं।

अल्ट्रासाउंड में संयोग से पथरी मिली है, क्या ऑपरेशन कराना ज़रूरी है?

हमेशा नहीं। जिस पथरी से कोई तकलीफ़ नहीं है, उसमें अक्सर तुरंत ऑपरेशन की जगह नज़र रखी जाती है। सर्जन आपकी उम्र, सेहत, पथरी का आकार और संख्या और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर सलाह देते हैं। आपको बताया जाएगा कि खाने के बाद दर्द, बुखार या आंखों में पीलापन जैसे कौन से लक्षण हों तो जल्दी दोबारा दिखाना है।

ऑपरेशन के इंतज़ार में क्या खाना चाहिए?

समय पर हल्का, घर का बना खाना खाएं और ज़्यादा तला हुआ, चिकना और भारी खाना न खाएं, क्योंकि इससे दर्द उठ सकता है। दाल, चावल, रोटी, हरी सब्ज़ी, फल और दही आम तौर पर ठीक हैं। लंबे समय तक भूखे रहकर फिर एक साथ बहुत ज़्यादा न खाएं। सही खानपान से दर्द के दौरे कम हो सकते हैं, लेकिन पथरी नहीं निकलती, इसलिए सर्जन से मिलना न टालें।

पित्त की थैली में पथरी के लक्षण सबसे पहले कैसे दिखते हैं?

बहुत से लोगों में शुरू में कोई लक्षण नहीं होता। जब तकलीफ़ शुरू होती है, तो पहला संकेत आम तौर पर पेट के ऊपरी दाहिने या बीच वाले हिस्से में दर्द होता है, अक्सर भारी या तला हुआ खाना खाने के बाद या रात में। दर्द पीठ या दाहिने कंधे तक जा सकता है और जी मिचला सकता है। अल्ट्रासाउंड से पक्का होता है कि दर्द पथरी का है या नहीं।

पित्त की थैली में पथरी हो तो क्या करना चाहिए?

घबराएं नहीं और घरेलू नुस्खों में समय न गंवाएं। अल्ट्रासाउंड और खून की रिपोर्ट लेकर सर्जन को दिखाएं। तब तक हल्का, कम तला हुआ खाना समय पर खाएं। अगर पथरी से दर्द हो रहा है तो सर्जन आम तौर पर दूरबीन से थैली निकालने की सलाह देते हैं। बुखार, आंखों में पीलापन या उल्टी के साथ तेज़ दर्द हो तो तुरंत अस्पताल आएं।

क्या पित्त की पथरी का इलाज बिना ऑपरेशन हो सकता है?

जिस पथरी से कोई तकलीफ़ नहीं है, उसमें सर्जन सिर्फ़ नज़र रखने और समय-समय पर जांच की सलाह दे सकते हैं। लेकिन जिस पथरी से दर्द हो, उसका बिना ऑपरेशन कोई भरोसेमंद इलाज नहीं है। घरेलू नुस्खों से पथरी नहीं गलती, और दवा सिर्फ़ कुछ चुने हुए मरीज़ों में, कई महीनों में असर करती है, फिर भी पथरी अक्सर लौट आती है। मान्य इलाज दूरबीन से थैली निकालना ही है।

स्रोत और आगे पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

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डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल मेडिकल टीम
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल मेडिकल टीम

डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज की मेडिकल टीम की ओर से स्वास्थ्य जानकारी। अपनी बीमारी के बारे में सलाह के लिए कृपया हमारे डॉक्टर से मिलें।

यह जानकारी सिर्फ़ जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं। इलाज हर मरीज़ की हालत देखकर तय होता है।

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