गोपालगंज, सीवान, छपरा और चंपारण के इलाके में किडनी की पथरी (गुर्दे की पथरी) बहुत आम बीमारी है। इसका दर्द अक्सर अचानक और बहुत तेज़ उठता है, जो कमर या बगल से शुरू होकर पेट के निचले हिस्से की तरफ़ जाता है। यहां हमारी सर्जिकल टीम बता रही है कि कितने mm की पथरी का ऑपरेशन होता है, पानी और खान-पान से क्या फ़र्क पड़ता है, और इलाज के कौन से तरीके हैं।
हर पथरी में ऑपरेशन ज़रूरी नहीं होता। पथरी का साइज़, उसकी जगह और किडनी की हालत देखकर तय होता है कि दवा काफ़ी है या URSL, PCNL या DJ स्टेंट की ज़रूरत है। आपका इलाज हमेशा आपकी रिपोर्ट और हमारे सर्जन की जांच से ही तय होता है।
पथरी बनती कैसे है?
पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सलेट और यूरिक एसिड जैसे खनिज घुले रहते हैं। शरीर में पानी कम और नमक ज़्यादा हो, तो पेशाब गाढ़ा हो जाता है और ये कण चिपककर धीरे-धीरे पथरी बना लेते हैं। पथरी सालों तक किडनी में चुपचाप पड़ी रह सकती है। दिक्कत तब होती है जब वह खिसककर पेशाब की नली (यूरेटर) में फंस जाती है और पेशाब का रास्ता रोक देती है।
हमारे इलाके में लंबी गर्मी, खेत और बाहर के काम में खूब पसीना, कम पानी पीना, अचार, पापड़ और नमकीन जैसा नमकीन खाना, और परिवार में पथरी का इतिहास, ये सब खतरा बढ़ाते हैं।
पथरी कितने mm की हो तो अपने आप निकल जाती है?
साइज़ सबसे ज़रूरी बातों में से एक है। साथ में यह भी देखा जाता है कि पथरी कहां फंसी है, किडनी में सूजन है या नहीं, और इन्फेक्शन तो नहीं है:
- लगभग 5 mm तक: ऐसी बहुत सी पथरी खूब पानी और डॉक्टर की दवा से कुछ हफ़्तों में अपने आप निकल जाती है।
- लगभग 5 से 10 mm: कुछ निकल जाती हैं, पर साइज़ जितना बड़ा, संभावना उतनी कम। डॉक्टर पहले दवा देकर दोबारा जांच करा सकते हैं।
- लगभग 10 mm से बड़ी: यह आमतौर पर अपने आप नहीं निकलती और अक्सर ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ती है।
नली में नीचे, थैली के पास वाली पथरी आसानी से निकलती है। अगर पथरी से किडनी में सूजन (हाइड्रोनेफ्रोसिस) है, तो छोटी पथरी को भी ज़्यादा दिन न छोड़ें, क्योंकि किडनी चुपचाप खराब हो सकती है।
जांच में आमतौर पर अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, पेशाब की जांच और किडनी की खून जांच होती है। कभी-कभी सीटी स्कैन भी कराया जाता है।
पानी: पथरी की सबसे बड़ी दवा
पथरी वाले ज़्यादातर बड़े लोगों को दिन भर में थोड़ा-थोड़ा करके लगभग 2.5 से 3 लीटर पानी और तरल पीने की सलाह दी जाती है। गर्मी में और मेहनत का काम करने वालों को इससे ज़्यादा।
- काम पर, खेत में और सफ़र में पानी की बोतल साथ रखें।
- पेशाब का रंग देखें: हल्का पीला ठीक है, गाढ़ा पीला मतलब पानी कम है।
- सादा पानी सबसे अच्छा है। नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ भी ठीक हैं। कोल्ड ड्रिंक और मीठे जूस से बचें।
अगर दिल या किडनी की बीमारी की वजह से डॉक्टर ने पानी कम पीने को कहा है, तो वही सलाह मानें।
खान-पान: क्या खाएं, क्या कम करें
- नमक कम करें: अचार, पापड़, नमकीन, चिप्स और ऊपर से डाला नमक कम करें।
- दूध-दही बंद न करें: खाने का सामान्य कैल्शियम कुछ तरह की पथरी से बचाता है। कैल्शियम की गोली डॉक्टर के कहने पर ही लें।
- ज़्यादा ऑक्सलेट वाली चीज़ें ज़्यादा न खाएं: जैसे बहुत सारा पालक, चुकंदर और मेवे, या दिन में कई बार कड़क चाय।
- मीट और कलेजी सीमित रखें: इनसे पेशाब में यूरिक एसिड बढ़ता है।
- वज़न और शुगर काबू में रखें: मोटापा और डायबिटीज़ से खतरा बढ़ता है।
बहुत लोग टमाटर पूरी तरह छोड़ देते हैं, जबकि ज़्यादातर लोगों के लिए सामान्य मात्रा में टमाटर ठीक है; पानी और नमक का ध्यान कहीं ज़्यादा ज़रूरी है। चूर्ण और देसी दवाओं से ज़्यादातर पथरी नहीं घुलती। यूरिक एसिड वाली कुछ पथरी दवा से घुल सकती है, पर यह डॉक्टर जांच के बाद ही तय करते हैं, इसलिए नुस्खों में इलाज की देर न करें।
ऑपरेशन कब ज़रूरी होता है?
आमतौर पर ऑपरेशन तब करना पड़ता है जब पथरी इतनी बड़ी हो कि न निकले, दर्द बार-बार उठे, किडनी में रुकावट या सूजन हो, बंद किडनी के साथ इन्फेक्शन हो, या दवा के बाद भी पथरी न हिले।
URSL (दूरबीन से नली की पथरी तोड़ना)
पेशाब के प्राकृतिक रास्ते से पतली दूरबीन नली तक पहुंचाई जाती है। लेज़र या दूसरी ऊर्जा से पथरी तोड़ी जाती है, और टुकड़े निकाल लिए जाते हैं या पेशाब में निकल जाते हैं। शरीर पर कोई चीरा नहीं लगता, और ज़्यादातर मरीज़ 1 से 2 दिन में घर चले जाते हैं।
PCNL (कमर में छोटे छेद से पथरी निकालना)
यह ज़्यादातर किडनी के अंदर की बड़ी पथरी के लिए होता है। कमर में लगभग 1 cm के छोटे चीरे से किडनी तक पहुंचकर पथरी तोड़कर निकाली जाती है। पुराने बड़े चीरे वाले ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं पड़ती। अस्पताल में आमतौर पर 2 से 4 दिन रहना होता है।
DJ स्टेंट
यह एक पतली, मुलायम नली है जो अंदर ही किडनी से पेशाब की थैली तक रखी जाती है। यह पेशाब का बहाव बनाए रखती है और ऑपरेशन के बाद घाव भरने में मदद करती है। स्टेंट रहने तक हल्की जलन, बार-बार पेशाब लगना या पेशाब में थोड़ा खून आ सकता है, जो निकालने के बाद आमतौर पर ठीक हो जाता है।
ज़्यादा जानकारी: किडनी की पथरी का इलाज, PCNL ऑपरेशन और URSL और DJ स्टेंटिंग।
सावधान: DJ स्टेंट निकलवाना कभी न भूलें
DJ स्टेंट कुछ समय के लिए ही डाला जाता है और आमतौर पर कुछ हफ़्तों बाद छोटी सी प्रक्रिया में निकाल दिया जाता है। अगर यह महीनों तक भूल से अंदर रह जाए, तो उस पर पथरी जम सकती है, इन्फेक्शन हो सकता है और किडनी का रास्ता बंद हो सकता है। तब इसे निकालने के लिए बड़ा ऑपरेशन भी करना पड़ सकता है। निकालने की तारीख लिखकर रखें और बाहर काम पर जाना हो तब भी समय पर आएं।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
- कमर या बगल में तेज़ दर्द जो साधारण दवा से ठीक न हो
- पथरी के दर्द के साथ ठंड लगकर बुखार, इसमें तुरंत इलाज चाहिए
- बार-बार उल्टी, या पेशाब बहुत कम होना
- पेशाब में खून आना
- अल्ट्रासाउंड में पथरी दिखी हो, भले ही दर्द न हो
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में हम गोपालगंज, सीवान, छपरा और आसपास के ज़िलों के मरीज़ों की जांच करके साफ़ बताते हैं कि उनकी पथरी दवा से निकल सकती है या इलाज की प्रक्रिया ज़रूरी है। ज़्यादा जानकारी के लिए पढ़ें: PCNL, URSL और DJ स्टेंट से किडनी की पथरी का इलाज।
हमारे यहां पथरी का इलाज हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर की देखरेख में होता है, जो 16 साल से ज़्यादा अनुभव वाले लेप्रोस्कोपिक, लेज़र, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन हैं। हमारे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे, पैथोलॉजी लैब और 24 घंटे इमरजेंसी की सुविधा है। ओपीडी के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें। आप अपनी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पहले से भी भेज सकते हैं।






