गोपालगंज में एंडोस्कोपी जांच: अपर जीआई एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी

एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी

डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम खाने की नली, पेट और बड़ी आंत की कैमरे से जांच करते हैं, बायोप्सी लेते हैं और बच्चों के निगले हुए सिक्के निकालते हैं।

गोपालगंज में एंडोस्कोपी जांच हम डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में करते हैं, जहां हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर की देखरेख में अपर जीआई एंडोस्कोपी (पेट की दूरबीन जांच) और कोलोनोस्कोपी की जाती है। हम उन लोगों को देखते हैं जिन्हें पुरानी एसिडिटी, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, निगलने में दिक्कत, खून की उल्टी, काला मल, गुदा से खून या शौच की आदत में बदलाव है, और उन माता पिता को भी जिनके बच्चे ने सिक्का निगल लिया है। जांच के दौरान हम बायोप्सी लेकर हिस्टोपैथोलॉजी के लिए भेज सकते हैं। ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड भी हमारे इसी अस्पताल में हैं, इसलिए अगला कदम आम तौर पर एक ही जगह तय हो जाता है। गोपालगंज, सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया और पास के उत्तर प्रदेश से मरीज़ हमारे पास आते हैं, और सीवान के पास एंडोस्कोपी चाहने वाले बहुत से लोग हमारे अस्पताल को चुनते हैं। नंबर लगाने के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें, हम आपको खाली पेट रहने और तैयारी के निर्देश देंगे।

एंडोस्कोपी एक जांच है जिसमें लाइट और कैमरे वाली एक पतली, मुड़ने वाली नली से शरीर के अंदर देखा जाता है। इससे डॉक्टर बीमारी का कारण सीधे देख पाते हैं, मांस का छोटा टुकड़ा (बायोप्सी) ले सकते हैं और कभी कभी उसी समय इलाज भी कर देते हैं।

अपर जीआई एंडोस्कोपी में खाने की नली, पेट (आमाशय) और छोटी आंत का शुरुआती हिस्सा देखा जाता है। गले को सुन्न करने के बाद नली मुंह के रास्ते डाली जाती है। इसकी सलाह हम पुरानी एसिडिटी या जलन, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, खाना निगलने में दिक्कत, खून की उल्टी, काला मल, बिना साफ कारण खून की कमी और वज़न घटने में देते हैं। बच्चों के निगले हुए सिक्के जैसी चीज़ें निकालने में भी हम इसका इस्तेमाल करते हैं। नवंबर 2023 में स्थानीय समाचारों में बताया गया कि हमारे अस्पताल में एंडोस्कोपी से एक बच्चे के पेट से निगला हुआ सिक्का निकाला गया।

कोलोनोस्कोपी में गुदा के रास्ते बड़ी आंत देखी जाती है। इसकी सलाह हम गुदा से खून आने, शौच की आदत बदलने, लंबे समय से दस्त या कब्ज़ में, और 40 से ज़्यादा उम्र वालों में कुछ बवासीर के इलाज से पहले देते हैं।

अगर आप तंबाकू, गुटखा या खैनी खाते हैं, बीड़ी सिगरेट या शराब पीते हैं, और आपको निगलने में दिक्कत, लगातार एसिडिटी या वज़न घटने की शिकायत है, तो कृपया इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। समय पर एंडोस्कोपी से गंभीर होने से पहले बीमारी पकड़ में आ सकती है, जिसमें शुरुआती पेट और आंत का कैंसर भी शामिल है।

ली गई बायोप्सी हम हिस्टोपैथोलॉजी लैब भेजते हैं। जांच का समय तय होने पर हम आपको तैयारी के साफ़ निर्देश देते हैं।

एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी 1
एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी 2

हमारे यहां होने वाली जांच और इलाज

  • एसिडिटी, अल्सर और पेट के ऊपरी दर्द में अपर जीआई एंडोस्कोपी
  • खाना निगलने में दिक्कत या खून की उल्टी में एंडोस्कोपी
  • बच्चों के निगले हुए सिक्के और छोटी चीज़ें निकालना
  • गुदा से खून आने या शौच की आदत बदलने पर कोलोनोस्कोपी
  • शक वाली जगह से बायोप्सी, हिस्टोपैथोलॉजी जांच के लिए
  • लक्षण वाले तंबाकू और गुटखा खाने वालों की जांच
  • खून की कमी और काले मल की जांच
  • लंबे समय से दस्त या कब्ज़ की जांच

इस विभाग में होने वाले इलाज

पेट की दूरबीन जांच (एंडोस्कोपी)

डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम एंडोस्कोपी करते हैं, जिसमें पतली कैमरे वाली नली से खाने की नली, पेट और छोटी आंत का शुरुआती हिस्सा देखा जाता है। यह आमतौर पर गले में स्प्रे से होती है, और ज़्यादातर लोग उसी दिन घर जाते हैं।

कोलोनोस्कोपी

डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम कोलोनोस्कोपी करते हैं, जिसमें पतली कैमरे वाली नली से बड़ी आंत के अंदर देखा जाता है, ताकि पखाने में खून, पखाने की आदत में बदलाव या खून की कमी की वजह पता चले।

सुविधाएं और हमारा तरीका

  • हमारे अस्पताल में अपर जीआई एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी
  • बच्चों की निगली हुई चीज़ें एंडोस्कोपी से निकालना
  • बायोप्सी के सैंपल हम हिस्टोपैथोलॉजी लैब भेजते हैं
  • जांच के दौरान और बाद में निगरानी
  • जांच से पहले तैयारी के साफ़ निर्देश
  • हमारी सर्जिकल टीम, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू उसी अस्पताल में

मरीज़ हम पर भरोसा क्यों करते हैं

हमारे अस्पताल में एंडोस्कोपी हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर की देखरेख में होती है, जिन्हें 16+ साल का सर्जिकल अनुभव है और जो 10,000+ ऑपरेशन कर चुके हैं। हमारे पास ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, पैथोलॉजी, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड भी हैं, इसलिए एंडोस्कोपी के बाद का अगला कदम, चाहे दवा हो, ऑपरेशन हो या और जांच, आम तौर पर एक ही जगह तय हो जाता है। जब निगला हुआ सिक्का फंस जाए और निकालना ज़रूरी हो, तो एंडोस्कोपी से उसे मुंह के रास्ते, आम तौर पर बिना ऑपरेशन, निकाला जा सकता है। गोपालगंज के साथ सीवान, सारण, चंपारण और पास के उत्तर प्रदेश के परिवार भी इस इलाज के लिए हम पर भरोसा करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अपर जीआई एंडोस्कोपी की तैयारी कैसे करें?

कृपया जांच से लगभग 6 से 8 घंटे पहले तक कुछ न खाएं, न पिएं, ताकि पेट खाली रहे। सुबह की जांच सबसे आसान रहती है। मना न किया जाए तो ब्लड प्रेशर की दवा पानी के एक घूंट से ले लें, और अगर आप खून पतला करने की दवा या इंसुलिन लेते हैं, तो हमें ज़रूर बताएं। पुरानी रिपोर्ट और एक साथी को साथ लाएं। जांच में आम तौर पर कुछ मिनट लगते हैं, गले का सुन्नपन जाने के बाद सलाह के अनुसार खा सकते हैं।

बच्चे ने सिक्का निगल लिया है, क्या करें?

घबराएं नहीं। बच्चे को उल्टी कराने या गले में उंगली डालने की कोशिश न करें। कृपया बच्चे को जल्दी हमारे अस्पताल लाएं, और अगर बच्चे के मुंह से लार गिर रही हो, वह निगल न पा रहा हो, उल्टी कर रहा हो, सीने या पेट में दर्द हो या सांस लेने में दिक्कत हो, तो तुरंत हमारी इमरजेंसी में आएं। एक्स-रे से पता चलता है कि सिक्का कहां है। कई सिक्के अपने आप निकल जाते हैं, लेकिन खाने की नली में फंसा सिक्का आम तौर पर एंडोस्कोपी से निकालना पड़ता है।

क्या एंडोस्कोपी में दर्द होता है?

ज़्यादातर लोगों को दर्द से ज़्यादा थोड़ी बेचैनी, उबकाई या पेट फूलने जैसा लगता है। अपर जीआई एंडोस्कोपी में हम गले को स्प्रे से सुन्न करते हैं और जांच आम तौर पर कुछ ही मिनट में हो जाती है। डॉक्टर की सलाह पर हल्की नींद की दवा दी जा सकती है। सांस नहीं रुकती, क्योंकि नली खाने की नली में जाती है, सांस की नली में नहीं। कोलोनोस्कोपी में हवा की वजह से थोड़ी ऐंठन हो सकती है, जो आम तौर पर जल्दी ठीक हो जाती है।

कोलोनोस्कोपी की तैयारी कैसे करें?

साफ़ देखने के लिए बड़ी आंत का पूरी तरह साफ़ होना ज़रूरी है। आम तौर पर हम जांच से एक दिन पहले हल्का या तरल खाना लेने और निर्देश के अनुसार पेट साफ़ करने का घोल पीने को कहते हैं, जिससे पतले दस्त होते हैं। कृपया निर्देश ठीक वैसे ही मानें, क्योंकि आंत ठीक से साफ़ न हो तो जांच दोबारा करनी पड़ सकती है। अपनी सभी दवाओं के बारे में, खास कर खून पतला करने और शुगर की दवा के बारे में, डॉक्टर को बताएं।

एसिडिटी और पेट दर्द में पेट की दूरबीन जांच कब करानी चाहिए?

ज़्यादातर एसिडिटी खानपान में बदलाव और दवा से ठीक हो जाती है। एंडोस्कोपी की सलाह हम आम तौर पर तब देते हैं जब इलाज के बाद भी तकलीफ हफ्तों तक रहे, या खतरे के लक्षण हों: निगलने में दिक्कत या दर्द, खून की उल्टी, काला मल, खून की कमी, वज़न घटना, बार बार उल्टी, या अधेड़ उम्र के बाद नई तकलीफ। तंबाकू, गुटखा या शराब लेने वालों को लगातार तकलीफ हो तो भी यह जांच ज़रूरी है। फैसला हमारे डॉक्टर जांच के बाद करते हैं।

गोपालगंज में एंडोस्कोपी जांच में कितना समय लगता है, क्या उसी दिन घर जा सकते हैं?

अपर जीआई एंडोस्कोपी में आम तौर पर कुछ ही मिनट लगते हैं, कोलोनोस्कोपी में इससे ज़्यादा समय लगता है। तैयारी और बाद में थोड़ा आराम मिलाकर ज़्यादातर लोग कुछ घंटे हमारे अस्पताल में रहते हैं और उसी दिन घर चले जाते हैं। बेहोशी की दवा दी गई हो तो कृपया उस दिन गाड़ी या मोटरसाइकिल न चलाएं और साथ में एक परिजन लाएं। गले का सुन्नपन खत्म होने के बाद सलाह के अनुसार खाना खा सकते हैं।

गोपालगंज में एंडोस्कोपी जांच का खर्च किन बातों पर निर्भर करता है?

खर्च इस पर निर्भर करता है कि जांच अपर जीआई एंडोस्कोपी है या कोलोनोस्कोपी, बेहोशी की दवा दी गई या नहीं, बायोप्सी लेकर हिस्टोपैथोलॉजी भेजी गई या नहीं, और निगली हुई चीज़ निकालने जैसी कोई प्रक्रिया करनी पड़ी या नहीं। जांच से पहले खून की जांच भी जुड़ सकती है। नंबर लगाते समय हमारा स्टाफ खर्च बता देता है। आने से पहले आप पर्ची या रिपोर्ट +91 72739 94786 पर व्हाट्सऐप करके पूछ सकते हैं।

मुझे सीवान के पास एंडोस्कोपी करानी है। क्या गोपालगंज आ सकते हैं?

हां, सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया और पास के उत्तर प्रदेश से मरीज़ एंडोस्कोपी के लिए हमारे पास आते हैं। नंबर लगाने के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें, और हो सके तो सुबह का समय लें, क्योंकि खाली पेट आना होता है। एक परिजन के साथ आएं, पुरानी रिपोर्ट और दवाएं साथ लाएं, और खून पतला करने या शुगर की दवा लेते हों तो हमें बताएं। सिक्का निगलने के बाद बच्चे की हालत खराब हो तो नज़दीकी इमरजेंसी जाएं।

क्या हमारे अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से एंडोस्कोपी होती है?

हमारी आयुष्मान भारत (पीएम-जेएवाई) सूची में जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के पैकेज शामिल हैं। योजना मुख्य रूप से सूचीबद्ध पैकेज में भर्ती का खर्च देती है, इसलिए ओपीडी में होने वाली सामान्य एंडोस्कोपी आम तौर पर अलग से कवर नहीं होती। अगर एंडोस्कोपी किसी कवर वाले ऑपरेशन की भर्ती का हिस्सा है, तो वह उस पैकेज में शामिल हो सकती है। कृपया आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड लेकर जांच से पहले हमारे सहायता केंद्र से पुष्टि करें।

शुगर या दिल की बीमारी हो तो क्या एंडोस्कोपी सुरक्षित है?

आम तौर पर हां, कुछ सावधानी के साथ। कृपया अपनी सभी दवाओं के बारे में डॉक्टर को बताएं। इंसुलिन या शुगर की गोली लेने वालों को खाली पेट रहने की वजह से जांच के दिन खुराक बदलनी पड़ सकती है, और बाद में खाने के लिए कुछ साथ लाएं। खून पतला करने की दवा में बदलाव की ज़रूरत हो सकती है, लेकिन अपने मन से बंद न करें। दिल या फेफड़ों के मरीज़ों की हम पहले जांच करते हैं और ईसीजी हो सकती है। जांच के दौरान और बाद में हम निगरानी रखते हैं।

स्रोत और आगे पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

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यह जानकारी सिर्फ़ जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं। इलाज हर मरीज़ की हालत देखकर तय होता है।

सफल इलाज की कहानियां

डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, लेप्रोस्कोपिक सर्जन, डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज

डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर

संस्थापक एवं मुख्य सर्जन: लेप्रोस्कोपिक, लेजर, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन

एमबीबीएस, डीए, एमएस (जनरल सर्जरी)

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