गोपालगंज में वैरिकोज़ वेन्स का लेज़र इलाज (EVLA)

वैरिकोज़ वेन्स (पैरों की फूली हुई नसें) का लेज़र इलाज

पैरों की फूली, टेढ़ी नसों का इलाज हम डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में डॉप्लर अल्ट्रासाउंड जांच, कम्प्रेशन स्टॉकिंग, और सही मरीज़ों में नस के अंदर से लेज़र इलाज (EVLA) से करते हैं।

गोपालगंज में वैरिकोज़ वेन्स का लेज़र इलाज हम डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में नसों की ध्यान से जांच के बाद करते हैं। डॉप्लर जांच के बाद हल्की नसों में हम स्टॉकिंग और व्यायाम की सलाह देते हैं, और सही मरीज़ों में हमारी अपनी डायोड लेज़र मशीन से एंडोवीनस लेज़र एब्लेशन (EVLA) करते हैं, जो पैरों की फूली नसों का इलाज करने का आधुनिक तरीका है। इलाज हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, एमएस (जनरल सर्जरी), की देखरेख में होता है, जो लेप्रोस्कोपिक, लेज़र और जनरल सर्जन हैं। यह परेशानी शिक्षकों, दुकानदारों, रसोइयों, गार्ड और लंबे समय तक खड़े रहने वाले लोगों में ज़्यादा होती है। गोपालगंज के साथ सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और देवरिया से भी मरीज़ हमारे पास आते हैं, और सीवान के पास वैरिकोज़ वेन्स का इलाज ढूंढने वाले कई परिवार हम पर भरोसा करते हैं। परिवार डॉ. ठाकुर पर उनके 16+ साल के सर्जिकल अनुभव और ईमानदार सलाह के कारण भरोसा करते हैं। कृपया सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 से शाम 7 बजे तक हमारी ओपीडी में आएं, या रिपोर्ट व्हाट्सऐप +91 72739 94786 पर भेजें।

ऑपरेशन का समयआमतौर पर 45 से 90 मिनट, नसों की संख्या के हिसाब से
अस्पताल में रुकनाआमतौर पर उसी दिन छुट्टी या 1 दिन

गोपालगंज में वैरिकोज़ वेन्स का लेज़र इलाज: EVLA क्या है

वैरिकोज़ वेन्स यानी पैरों की फूली हुई, टेढ़ी-मेढ़ी नसें, जो चमड़ी के नीचे उभरी दिखती हैं। नसों में छोटे वाल्व होते हैं जो खून को ऊपर दिल की ओर भेजते हैं। जब ये वाल्व कमज़ोर हो जाते हैं, तो खून पैर में रुकने लगता है और नसें खिंचकर फूल जाती हैं।

यह उन लोगों में ज़्यादा होता है जिनका काम घंटों खड़े रहने का है, जैसे शिक्षक, दुकानदार, रसोइया और सुरक्षा कर्मचारी, और गर्भावस्था के बाद, बढ़ती उम्र, ज़्यादा वज़न या परिवार में किसी को होने पर भी। कुछ लोगों में सिर्फ़ नसें दिखती हैं। दूसरों को पैरों में दर्द और भारीपन, टखने में सूजन, खुजली, चमड़ी का काला पड़ना, और पुरानी बीमारी में टखने के पास घाव (अल्सर) हो जाता है।

एंडोवीनस लेज़र एब्लेशन (EVLA) में खराब मुख्य नस का इलाज अंदर से किया जाता है। अल्ट्रासाउंड की मदद से हम सुई के छेद से एक पतला लेज़र फाइबर नस में डालते हैं, और लेज़र की गर्मी से नस बंद कर दी जाती है। फिर खून अंदर की स्वस्थ नसों से बहने लगता है।

वैरिकोज़ वेन्स का इलाज: डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में 1
वैरिकोज़ वेन्स का इलाज: डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में 2

वैरिकोज़ वेन्स के लक्षण: पैरों में फूली, दर्द वाली नसें

  • पैरों में उभरी, टेढ़ी या रस्सी जैसी नसें
  • पैरों में दर्द, भारीपन या थकान, जो शाम तक बढ़ जाती है
  • टखनों के आसपास सूजन
  • रात में पैरों में ऐंठन, या नसों पर खुजली
  • टखने के पास चमड़ी का काला या सख्त होना
  • टखने के पास न भरने वाला घाव (अल्सर), या नस से खून आना

पैरों की फूली नसों का इलाज कब ज़रूरी है, और क्या स्टॉकिंग काफ़ी है

हमारी पहली जांच पैरों की नसों का डॉप्लर अल्ट्रासाउंड है। इससे पता चलता है कि कौन सी नसें खराब हैं, और यह भी कि अंदर की गहरी नसें ठीक हैं और उनमें खून का थक्का नहीं है। हल्की वैरिकोज़ वेन्स में कम्प्रेशन स्टॉकिंग (खास दबाव वाला मोज़ा), पैर ऊपर रखकर आराम, रोज़ टहलना और वज़न कंट्रोल से फायदा होता है। इनसे तकलीफ़ कम होती है, पर नसें खत्म नहीं होतीं।

दर्द, सूजन, चमड़ी में बदलाव, घाव या खून आने पर, और कभी कभी बिना इनके भी परेशान करने वाली नसों में, हम इलाज की सलाह देते हैं। EVLA हर किसी के लिए सही नहीं है, जैसे गहरी नस में अभी थक्का हो, नसें बहुत टेढ़ी हों, पैरों में खून का बहाव कमज़ोर हो, या गर्भावस्था हो। ऐसे में हम पारंपरिक ऑपरेशन या दूसरा तरीका बता सकते हैं।

वैरिकोज़ वेन्स का लेज़र इलाज कैसे होता है

  1. खराब नसों का नक्शा बनाने और गहरी नसें जांचने के लिए पैरों का डॉप्लर अल्ट्रासाउंड
  2. खून की ज़रूरी जांचें और फिटनेस जांच, और इलाज वाली नसों पर चमड़ी पर निशान लगाए जाते हैं
  3. हमारे एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के फ़ैसले के अनुसार नस के आसपास सुन्न करने की दवा या स्पाइनल एनेस्थीसिया
  4. अल्ट्रासाउंड की मदद से सुई के छेद से पतला लेज़र फाइबर खराब नस में डाला जाता है
  5. फाइबर को धीरे धीरे पीछे खींचते हुए लेज़र की गर्मी से नस अंदर से बंद की जाती है, और उभरी हुई शाखा नसें छोटे चीरों से निकाली जा सकती हैं
  6. पट्टी या कम्प्रेशन स्टॉकिंग पहनाई जाती है, और उसी दिन चलने को कहा जाता है

लेज़र इलाज के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है

हम उसी दिन से चलने को कहते हैं, इससे खून का बहाव ठीक रहता है और थक्के का खतरा कम होता है। सलाह के अनुसार कम्प्रेशन स्टॉकिंग पहनें, आमतौर पर 1 से 2 हफ्ते या ज़्यादा। इलाज वाली नस के साथ 1 से 2 हफ्ते तक नील, कसाव या खिंचाव महसूस होना आम है, जो ठीक हो जाता है। ज़्यादातर लोग कुछ दिनों में हल्का काम शुरू कर देते हैं। पहले 1 से 2 हफ्ते, या हमारे सर्जन की सलाह तक, देर तक खड़े रहने और भारी कसरत से बचें। फॉलो-अप में हम दोबारा डॉप्लर जांच की सलाह दे सकते हैं।

नसों के लेज़र इलाज के बाद सावधानियां

लेज़र इलाज के बाद कुछ अच्छी आदतों से पैर जल्दी ठीक होता है और नई नसें बनने का खतरा घटता है। घर जाने से पहले हम आपको ये बातें समझाते हैं।

  • चलना: पहले दिन से दिन में कई बार 10 से 15 मिनट चलें। इससे खून का बहाव ठीक रहता है और थक्का बनने का खतरा घटता है।
  • स्टॉकिंग: सलाह के अनुसार कम्प्रेशन स्टॉकिंग पहनें, आमतौर पर 1 से 2 हफ्ते या उससे ज़्यादा।
  • किन चीज़ों से बचें: पहले 1 से 2 हफ्ते देर तक एक जगह खड़े रहना, भारी व्यायाम और बिना रुके लंबा सफ़र।
  • आराम: बैठते या लेटते समय पैरों को तकिए पर ऊंचा रखें।
  • खानपान और वज़न: फल, सब्ज़ी और पर्याप्त पानी वाला संतुलित खाना लें, और तला व ज़्यादा नमक वाला खाना कम करें। इससे वज़न काबू में रहता है और सूजन घटती है।
  • काम: ज़्यादातर लोग कुछ दिनों में हल्का काम शुरू कर देते हैं।
  • खतरे के संकेत: पिंडली में अचानक दर्द और सूजन, या सांस फूलना। कृपया तुरंत +91 72739 94786 पर कॉल करें या हमारी 24 घंटे खुली इमरजेंसी में आएं।

फायदे

  • लंबे चीरे के बिना, सुई के छेद से खराब नस का अंदर से इलाज
  • ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन चलने लगते हैं
  • अस्पताल में कम रुकना, आमतौर पर उसी दिन या 1 दिन
  • ज़्यादातर मरीज़ों में पारंपरिक नस निकालने वाले ऑपरेशन से कम दर्द और नील
  • कई मरीज़ जल्दी काम पर लौट पाते हैं
  • दर्द, भारीपन और सूजन में राहत, और सही देखभाल के साथ घाव भरने में मदद
संभावित जोखिम:

संभावित जोखिमों में नील, इलाज वाली नस के साथ दर्द या कसाव, चमड़ी के नीचे सख्त और दुखने वाली नस, चमड़ी की छोटी नसों (नर्व) की जलन से कुछ जगह सुन्नपन, और बहुत कम मामलों में चमड़ी जलना या गहरी नस में खून का थक्का (डीवीटी) शामिल हैं। सालों बाद वैरिकोज़ वेन्स फिर हो सकती हैं, क्योंकि दूसरी नसें भी कमज़ोर हो सकती हैं। डॉप्लर से नक्शा, इलाज के दौरान अल्ट्रासाउंड की मदद, जल्दी चलना और कम्प्रेशन स्टॉकिंग से हमारी टीम इन जोखिमों को कम रखती है।

गोपालगंज में वैरिकोज़ वेन्स के इलाज का खर्च और आयुष्मान कार्ड

वैरिकोज़ वेन्स के इलाज का खर्च आपकी नसों की हालत पर निर्भर करता है, इसलिए हम कोई एक तय रकम नहीं बताते। मुख्य बातें हैं: डॉप्लर जांच में क्या मिला, कौन सा तरीका (सिर्फ़ स्टॉकिंग, लेज़र एब्लेशन या पारंपरिक ऑपरेशन), एक पैर या दोनों पैर और कितनी नसों का इलाज होगा, बेहोशी का तरीका, अस्पताल में रुकना (आमतौर पर उसी दिन या 1 दिन), कौन सा कमरा लिया, और बाद की स्टॉकिंग और दवाएं। परामर्श और डॉप्लर रिपोर्ट के बाद भर्ती से पहले हम आपको साफ़ लिखित अनुमान देते हैं। आप पहले रिपोर्ट व्हाट्सऐप +91 72739 94786 पर भेज सकते हैं।

हमारा अस्पताल आयुष्मान भारत PM-JAY में जनरल सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी पैकेज के लिए सूचीबद्ध है। आपका इलाज और चुना गया तरीका कवर होगा या नहीं, यह योजना की पैकेज सूची और आपकी पात्रता पर निर्भर करता है। कृपया आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड लेकर आएं और भर्ती से पहले हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पुष्टि कर लें।

वैरिकोज़ वेन्स के इलाज के लिए मरीज़ डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर पर क्यों भरोसा करते हैं

हमारे अस्पताल में वैरिकोज़ वेन्स के इलाज के लिए डायोड लेज़र मशीन है, साथ में आधुनिक ऑपरेशन थिएटर और अल्ट्रासाउंड भी। आपका इलाज डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर की देखरेख में होता है, जो लेप्रोस्कोपिक, लेज़र, यूरोलॉजी और जनरल सर्जन हैं। उन्हें 16+ साल का सर्जिकल अनुभव है और वे 10,000+ ऑपरेशन कर चुके हैं। उन्होंने आईजीआईएमएस पटना और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली में काम किया है। लेज़र की सलाह देने से पहले हम जांचते हैं कि यह आपकी नसों के लिए सच में सही है या नहीं, और दूसरा तरीका बेहतर हो तो ईमानदारी से बताते हैं।

वैरिकोज़ वेन्स से जुड़े आम सवाल

क्या वैरिकोज़ वेन्स खतरनाक हैं?

कई वैरिकोज़ वेन्स मुख्य रूप से तकलीफ़ और दिखावट की समस्या होती हैं। लेकिन नज़रअंदाज़ करने पर कुछ में चमड़ी काली पड़ना, एक्ज़िमा, टखने के पास घाव, नस में दर्द वाली सूजन या खून आना हो सकता है। चोट लगने पर फूली नस से तेज़ खून आ सकता है: लेट जाएं, पैर ऊपर उठाएं, साफ़ कपड़े से ज़ोर से दबाएं और हमारे अस्पताल आएं। पिंडली में अचानक दर्द वाली सूजन या सांस फूलने पर तुरंत इमरजेंसी में आएं।

गोपालगंज में वैरिकोज़ वेन्स का लेज़र इलाज कैसे होता है?

पहले हम डॉप्लर अल्ट्रासाउंड से लीक करने वाली नसों का नक्शा बनाते हैं और गहरी नसें जांचते हैं। उस दिन नस के आसपास लोकल सुन्न करने की दवा दी जाती है, या हमारे एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के फ़ैसले के अनुसार स्पाइनल एनेस्थीसिया। अल्ट्रासाउंड देखते हुए सुई के छेद से पतला लेज़र फाइबर खराब नस में डाला जाता है, और लेज़र की गर्मी नस को अंदर से बंद कर देती है। फिर पट्टी या स्टॉकिंग पहनाई जाती है, और आप उसी दिन चलते हैं।

गोपालगंज में वैरिकोज़ वेन्स का लेज़र इलाज कराने के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है?

प्रक्रिया लगभग 45 से 90 मिनट की होती है, और ज़्यादातर लोग उसी दिन या अगले दिन घर चले जाते हैं। इलाज वाली नस के साथ 1 से 2 हफ्ते तक नील, खिंचाव या हल्का दर्द आम है। ज़्यादातर लोग कुछ दिनों में हल्का काम शुरू कर देते हैं। कृपया सलाह के अनुसार स्टॉकिंग पहनें, आमतौर पर 1 से 2 हफ्ते या ज़्यादा, और पहले 1 से 2 हफ्ते देर तक खड़े रहने और भारी व्यायाम से बचें।

क्या वैरिकोज़ वेन्स के लेज़र इलाज में दर्द होता है?

हम जगह को सुन्न कर देते हैं, इसलिए ज़्यादातर मरीज़ों को इलाज के दौरान हल्की तकलीफ़ ही होती है। बाद में इलाज वाली नस के साथ 1 से 2 हफ्ते तक कसाव, नील या खिंचाव आम है, जो आमतौर पर साधारण दर्द की दवा और चलने से संभल जाता है। हमारे ज़्यादातर मरीज़ों को रिकवरी पारंपरिक ऑपरेशन से आसान लगती है, लेकिन यह पूरी तरह दर्द रहित नहीं है।

क्या कम्प्रेशन स्टॉकिंग से वैरिकोज़ वेन्स ठीक हो जाती हैं?

नहीं। स्टॉकिंग नसों को सहारा देकर दर्द, भारीपन और सूजन कम करती है, और हल्की नसों में, गर्भावस्था में, या जब इलाज सही न हो, तब काम की है। लेकिन यह खराब वाल्व ठीक नहीं करती और नसें बनी रहती हैं। स्टॉकिंग का सही साइज़ और दबाव होना चाहिए, और यह हर किसी के लिए सही नहीं है, जैसे पैरों में खून का बहाव कमज़ोर हो। कृपया खरीदने से पहले हमारे डॉक्टर से पूछें।

पैरों की फूली नसों का इलाज लेज़र से कराना अच्छा है या बुरा? इसके क्या नुकसान हैं?

सही मरीज़ों में लेज़र से नसों का इलाज एक जाना-माना तरीका है। इसमें सुई जितने छोटे छेद होते हैं, और ज़्यादातर मरीज़ पुराने तरीके के ऑपरेशन से जल्दी काम पर लौटते हैं। लेकिन यह हर किसी के लिए नहीं है, जैसे गहरी नस में थक्का होने पर, बहुत टेढ़ी-मेढ़ी नसों में, पैरों में खून की सप्लाई कम होने पर या गर्भावस्था में। इसके नुकसान में नील, खिंचाव और त्वचा पर कुछ जगह सुन्नपन शामिल हैं, और बहुत कम मामलों में त्वचा जलना या गहरी नस में थक्का। इलाज से पहले हम ये सब समझाते हैं।

गोपालगंज में वैरिकोज़ वेन्स के इलाज का खर्च किन बातों पर निर्भर करता है?

खर्च डॉप्लर जांच के नतीजे, तरीके (लेज़र या पारंपरिक ऑपरेशन), एक या दोनों पैर और कितनी नसों का इलाज होना है, बेहोशी, अस्पताल में रुकने, कमरे, और स्टॉकिंग और दवाओं पर निर्भर करता है। बिना जांच के हम कोई रकम नहीं बताते। परामर्श और डॉप्लर रिपोर्ट के बाद भर्ती से पहले हम आपको साफ़ लिखित अनुमान देते हैं। आप पहले अपनी रिपोर्ट व्हाट्सऐप +91 72739 94786 पर भेज सकते हैं।

क्या आयुष्मान कार्ड से वैरिकोज़ वेन्स का इलाज हो सकता है?

हमारा अस्पताल आयुष्मान भारत PM-JAY में जनरल सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी पैकेज के लिए सूचीबद्ध है। आपका वैरिकोज़ वेन्स का इलाज और चुना गया तरीका कवर होगा या नहीं, यह योजना की पैकेज सूची और आपकी पात्रता पर निर्भर करता है। कृपया अपना आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड लेकर आएं और भर्ती से पहले हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से जांच करा लें। बाकी मरीज़ों को हम भर्ती से पहले अनुमानित खर्च साफ़ साफ़ बता देते हैं।

नसों के लेज़र इलाज के बाद क्या सावधानियां रखें?

उसी दिन से दिन में कई बार 10 से 15 मिनट चलें, और सलाह के अनुसार कम्प्रेशन स्टॉकिंग पहनें। पहले 1 से 2 हफ्ते देर तक एक जगह खड़े रहने, भारी व्यायाम और बिना रुके लंबे सफ़र से बचें। आराम करते समय पैरों को तकिए पर ऊंचा रखें। संतुलित खाना और पर्याप्त पानी लेकर वज़न काबू में रखें। पिंडली में अचानक दर्द और सूजन, या सांस फूलने पर कृपया तुरंत हमसे संपर्क करें।

क्या लेज़र इलाज के बाद वैरिकोज़ वेन्स फिर हो सकती हैं?

इलाज वाली नस आमतौर पर बंद रहती है, लेकिन सालों में नई वैरिकोज़ वेन्स बन सकती हैं, क्योंकि दूसरी नसें भी कमज़ोर हो सकती हैं, खासकर देर तक खड़े रहने, वज़न बढ़ने या गर्भावस्था से। रोज़ टहलना, वज़न कंट्रोल, आराम करते समय पैर ऊपर रखना और सलाह के अनुसार स्टॉकिंग पहनना मदद करता है। नई नसें दिखें तो हम आमतौर पर उनका भी इलाज कर सकते हैं।

गोपालगंज में वैरिकोज़ वेन्स का सबसे अच्छा डॉक्टर कौन है?

हमारी सलाह है कि ऐसे सर्जन को चुनें जो पहले डॉप्लर जांच कराएं, स्टॉकिंग, लेज़र और पारंपरिक ऑपरेशन, हर विकल्प दे सकें, और ईमानदारी से बताएं कि आपकी नसों के लिए क्या सही है। हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर, एमएस (जनरल सर्जरी), लेप्रोस्कोपिक, लेज़र और जनरल सर्जन हैं। उन्हें 16+ साल का सर्जिकल अनुभव है और वे 10,000+ ऑपरेशन कर चुके हैं। उन्होंने आईजीआईएमएस पटना और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली में काम किया है। हमारे अस्पताल में अपनी डायोड लेज़र मशीन है। हमारे मरीज़ों के रिव्यू आप गूगल पर पढ़ सकते हैं।

हम सीवान में रहते हैं। सीवान के पास वैरिकोज़ वेन्स का इलाज कहां होता है?

अरार, गोपालगंज स्थित हमारे अस्पताल में सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया, कुशीनगर और देवरिया से मरीज़ आते हैं। हमारा अस्पताल सीवान से थोड़ी ही दूरी पर है। कोई पुरानी डॉप्लर रिपोर्ट हो तो साथ लाएं, या पहले व्हाट्सऐप +91 72739 94786 पर भेजें, और सोमवार से शुक्रवार, सुबह 10 से शाम 7 बजे के बीच हमारी ओपीडी में आएं। ज़्यादातर मरीज़ उसी दिन या अगले दिन घर चले जाते हैं, इसलिए परिवार को गोपालगंज में ज़्यादा दिन नहीं रुकना पड़ता।

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स्रोत और आगे पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

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आखिरी बार अपडेट: 30 सितंबर 2026

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डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर

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  • arav singhaniaनवंबर 2025
    My relative hernia surgery at Dr RK Thakur Hospital Went Very Well, Skilled Doctors, Caring Staff and Smooth recovery, Highly Satisfied.
    अनुवाद देखें

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  • Jamal Enterprisesजून 2026
    डाक्टर साहब बहुत अच्छे है उनका बात करने का अंदाज बहुत ही निराला है स्टाफ के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता बाकी हॉस्पिटल अच्छा है

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