
फाइब्रोएडिनोमा ऑपरेशन
हम हाथ से जांच, अल्ट्रासाउंड या मैमोग्राफी और सुई जांच से स्तन की गांठ की पूरी जांच करते हैं, और ज़रूरत पर फाइब्रोएडिनोमा निकालते हैं, पूरी गोपनीयता और महिला सहायक की मौजूदगी में।
डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल, गोपालगंज में हम गांठ की जांच और इलाज करते हैं: एफएनएसी, बायोप्सी और हिस्टोपैथोलॉजी से पता चलता है कि गांठ साधारण है या कैंसर, फिर स्टेजिंग जांच और ज़रूरत पर ऑपरेशन।
गोपालगंज में ट्यूमर का ऑपरेशन और गांठ की जांच हम डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में पूरी सावधानी से करते हैं। शरीर की किसी भी गांठ की हम पहले एफएनएसी या बायोप्सी जांच करते हैं, ताकि कोई बड़ा फ़ैसला लेने से पहले पता चले कि गांठ कैंसर है या नहीं। हमारे पास गोपालगंज के अलावा सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और देवरिया से भी मरीज़ आते हैं। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के हमारे विज़िटिंग सीनियर कंसल्टेंट डॉ. (एक्स कैप्टन) फ़िरोज़ पाशा, जिन्हें 16+ साल का अनुभव है, हर महीने के पहले शनिवार को हमारी कैंसर ओपीडी लेते हैं, और हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर के नेतृत्व वाली सर्जिकल टीम उनके साथ काम करती है। पैथोलॉजी लैब, अल्ट्रासाउंड और डिजिटल एक्स-रे हमारे अस्पताल में ही हैं, इसलिए गोपालगंज में बायोप्सी जांच की योजना घर के पास बन सकती है। परामर्श के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सएप करें, चाहें तो पहले रिपोर्ट भेजें, और ओपीडी में पुरानी सारी रिपोर्ट, स्कैन और स्लाइड साथ लाएं।
ट्यूमर यानी शरीर में बनी असामान्य गांठ। बहुत सी गांठें साधारण (बिनाइन) होती हैं, यानी कैंसर नहीं होतीं और फैलती नहीं, जैसे चर्बी की गांठ (लाइपोमा) या स्तन में फाइब्रोएडेनोमा। कुछ गांठें कैंसर वाली (मैलिग्नेंट) होती हैं, जो आसपास बढ़ सकती हैं और शरीर में फैल सकती हैं। सिर्फ़ देखकर या छूकर कोई पक्का नहीं कह सकता कि गांठ किस तरह की है।
इसीलिए हम गांठ की जांच करते हैं। एफएनएसी (FNAC) में पतली सुई से कुछ कोशिकाएं निकाली जाती हैं। बायोप्सी में मोटी सुई से या छोटा चीरा लगाकर गांठ का छोटा टुकड़ा लिया जाता है। यह टुकड़ा हिस्टोपैथोलॉजी जांच के लिए जाता है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर माइक्रोस्कोप से देखकर पक्की रिपोर्ट देते हैं।
अगर गांठ कैंसर की निकले, तो स्टेजिंग जांच, जैसे खून की जांच, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन, से पता चलता है कि बीमारी कितनी फैली है। इसी से तय होता है कि ऑपरेशन, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या इनका मेल, क्या सबसे सही है।


अगर गांठ सख्त हो, बढ़ रही हो, एक जगह जमी हो, या 2 से 3 हफ्ते से ज़्यादा समय से हो, तो कृपया बिना देर किए दिखाएं। न भरने वाला घाव या मुंह का छाला (खासकर तंबाकू, खैनी या गुटखा खाने वालों में), तिल में बदलाव, या वज़न घटने के साथ गांठ हो, तब भी डॉक्टर को दिखाएं। जल्दी पकड़ में आए कैंसर का इलाज आमतौर पर आसान होता है। दर्द का इंतज़ार न करें, क्योंकि कई कैंसर शुरू में दर्द नहीं देते।
साधारण गांठ बढ़ने, तकलीफ़ देने या जांच साफ़ न होने पर हम उसे निकाल सकते हैं। कैंसर में ऑपरेशन से गांठ को आसपास के स्वस्थ हिस्से (मार्जिन) के साथ निकाला जाता है, और कभी कभी पास की गिल्टियां (लिम्फ नोड) भी। कुछ मरीज़ों को ऑपरेशन से पहले या बाद में कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी की ज़रूरत होती है। रिपोर्ट आने के बाद हमारी टीम आपकी पूरी योजना समझाती है।
एफएनएसी या सुई वाली बायोप्सी के बाद आमतौर पर छोटी पट्टी लगाकर उसी दिन घर जा सकते हैं। गांठ निकालने के बाद घाव को सलाह के अनुसार साफ़ और सूखा रखें, दवा समय पर लें, और पट्टी या टांके कटवाने के लिए आएं। चलना और हल्का काम आमतौर पर उसी दिन या अगले दिन से शुरू हो जाता है। हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट में अक्सर कई दिन लगते हैं। कृपया रिपोर्ट लेने ज़रूर आएं, क्योंकि आगे का इलाज उसी पर निर्भर है। हमारी टीम की सलाह के अनुसार फॉलो-अप जारी रखें।
एफएनएसी या सुई वाली बायोप्सी के बाद: छोटी पट्टी को एक दिन सूखा रखें, और दर्द की गोली तभी लें जब हमारे डॉक्टर ने बताई हो। हल्का दर्द या नीला निशान आम है। गांठ निकालने के बाद: घाव को साफ़ और सूखा रखें, उस पर तेल, पाउडर या कोई घरेलू नुस्खा न लगाएं, और हमारी टीम की सलाह से नहाएं। खाने में आमतौर पर कोई खास परहेज नहीं होता, जब तक डॉक्टर न कहें: दाल, हरी सब्ज़ी, फल, अंडा या पनीर जैसा प्रोटीन वाला घर का खाना खाएं और पानी भरपूर पिएं। उसी दिन या अगले दिन से चलें, और घाव भरने तक भारी वज़न न उठाएं। ज़्यादातर लोग ऑपरेशन के हिसाब से कुछ दिनों से 2 हफ्ते में हल्के काम पर लौट आते हैं। कृपया टांके कटवाने और सबसे ज़रूरी, हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट के लिए ज़रूर आएं। कृपया तुरंत हमसे संपर्क करें अगर बुखार हो, लाली फैले, मवाद आए, पट्टी खून से भीग जाए या नई सूजन दिखे।
एफएनएसी और सुई वाली बायोप्सी आमतौर पर सुरक्षित होती हैं, हल्का दर्द, नील या थोड़ा खून आ सकता है। कभी कभी सैंपल कम पड़ जाता है और जांच दोहरानी पड़ती है। गांठ निकालने के ऑपरेशन में खून आना, संक्रमण, निशान, पानी भरना या घाव के पास सुन्नपन हो सकता है। कैंसर के बड़े ऑपरेशनों में बेहोशी समेत जोखिम ज़्यादा होते हैं। हमारी टीम आपके ऑपरेशन के खास जोखिम पहले समझाती है, और साफ़-सफ़ाई और निगरानी का पूरा ध्यान रखती है।
ट्यूमर के ऑपरेशन या बायोप्सी का कोई एक तय खर्च नहीं होता, क्योंकि हर गांठ अलग होती है। खर्च मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है: सिर्फ़ एफएनएसी या सुई वाली बायोप्सी चाहिए या गांठ निकालने का ऑपरेशन; पहले और बाद की जांच, जैसे अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन, खून की जांच और हिस्टोपैथोलॉजी; बेहोशी का प्रकार; अस्पताल में कितने दिन रुकना है और कौन सा कमरा; बड़े ऑपरेशन के बाद आईसीयू की ज़रूरत; और दवाइयां व पट्टी। परामर्श और रिपोर्ट देखने के बाद, भर्ती से पहले हम आपको साफ़ लिखित अनुमान देते हैं। आप पहले अपनी रिपोर्ट +91 72739 94786 पर व्हाट्सएप भी कर सकते हैं। हमारा अस्पताल आयुष्मान भारत PM-JAY में जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के पैकेज के लिए सूचीबद्ध है। आपकी गांठ का इलाज कवर होगा या नहीं, यह योजना के नियमों और बीमारी पर निर्भर है, इसलिए कृपया आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड लेकर हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पक्का कर लें।
हमारी सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ओपीडी हर महीने के पहले शनिवार को डॉ. (एक्स कैप्टन) फ़िरोज़ पाशा, सीनियर कंसल्टेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी लेते हैं, जिन्हें 16+ साल का अनुभव है। वे डॉ. आर. के. ठाकुर के नेतृत्व वाली हमारी सर्जिकल टीम के साथ काम करते हैं। पैथोलॉजी लैब, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, एंडोस्कोपी और आईसीयू हमारे अस्पताल में ही हैं। हमारे यहां रेडियोथेरेपी की सुविधा नहीं है। कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी की ज़रूरत हो तो हम बड़े सेंटर से तालमेल करते हैं, और आपका फॉलो-अप घर के पास जारी रहता है।
कमला राय कॉलेज रोड, होटल राल्सन के बगल में, अरार, गोपालगंज स्थित हमारे अस्पताल में। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के हमारे विज़िटिंग सीनियर कंसल्टेंट डॉ. (एक्स कैप्टन) फ़िरोज़ पाशा हर महीने के पहले शनिवार को हमारी कैंसर ओपीडी में मरीज़ देखते हैं, और हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर के नेतृत्व वाली सर्जिकल टीम उनके साथ काम करती है। जांच के बाद वे ज़रूरत के हिसाब से एफएनएसी, बायोप्सी या ऑपरेशन की योजना बनाते हैं। तारीख पक्की करने के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सएप करें।
नहीं। बहुत सी गांठें साधारण निकलती हैं, जैसे चर्बी की गांठ (लाइपोमा), सिस्ट, सूजी हुई गिल्टी या स्तन में फाइब्रोएडेनोमा। लेकिन सिर्फ़ देखकर या छूकर गांठ को नहीं पहचाना जा सकता। एफएनएसी, बायोप्सी और हिस्टोपैथोलॉजी से ही पक्का जवाब मिलता है। कोई भी नई, सख्त, बढ़ती या लंबे समय से पड़ी गांठ हो, तो कृपया दर्द का इंतज़ार किए बिना जल्दी जांच कराएं।
आपको बैठाकर या लिटाकर हम गांठ के ऊपर की चमड़ी साफ़ करते हैं। हमारे डॉक्टर बहुत पतली सुई को गांठ में कुछ बार डालकर कोशिकाएं निकालते हैं, कभी कभी अल्ट्रासाउंड की मदद से। इसमें कुछ मिनट लगते हैं, आमतौर पर न टांके लगते हैं न भर्ती होना पड़ता है, और ज़्यादातर लोगों को सिर्फ़ सुई की चुभन लगती है। कोशिकाओं को कांच की स्लाइड पर माइक्रोस्कोप से देखकर बताया जाता है कि गांठ साधारण लगती है या कैंसर वाली। कभी कभी पक्के जवाब के लिए बायोप्सी भी करनी पड़ती है।
यह बहुत आम डर है, और हम इसे समझते हैं। बायोप्सी से कैंसर फैलने का खतरा बहुत कम होता है, और हमारे डॉक्टर सही तरीके का पूरा ध्यान रखते हैं। बायोप्सी के बिना बीमारी की पक्की पहचान और सही इलाज की योजना नहीं बन सकती। जांच टालने से सिर्फ़ इलाज में देर होती है, और देर ही असली खतरा है। कोई भी चिंता हो तो कृपया ओपीडी में हमारे सर्जन से खुलकर बात करें।
हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट में आमतौर पर कई दिन लगते हैं, और टुकड़े पर खास जांच की ज़रूरत हो तो और ज़्यादा समय लग सकता है। हमारे कर्मचारी बताएंगे कि कब आना है। कृपया तारीख याद रखें, अपनी सारी रिपोर्ट साथ लाएं, और अच्छा महसूस हो तब भी रिपोर्ट को नज़रअंदाज़ न करें, क्योंकि आगे का इलाज उसी पर निर्भर है।
एफएनएसी या सुई वाली बायोप्सी के बाद आमतौर पर उसी दिन घर जाते हैं और अगले दिन से हल्का काम कर सकते हैं। गांठ निकालने के बाद ज़्यादातर लोग उसी दिन या अगले दिन चलने लगते हैं, और गांठ के आकार और जगह के हिसाब से कुछ दिनों से 2 हफ्ते में हल्के काम पर लौट आते हैं। टांके आमतौर पर लगभग 7 से 14 दिन में, हमारे सर्जन की सलाह से, देखे या काटे जाते हैं।
खर्च इस पर निर्भर करता है कि सिर्फ़ एफएनएसी या बायोप्सी चाहिए या ऑपरेशन, पहले और बाद में कौन सी जांच होगी जैसे अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और हिस्टोपैथोलॉजी, बेहोशी कैसी होगी, अस्पताल में कितने दिन और कौन सा कमरा, आईसीयू की ज़रूरत, और दवाइयां। मरीज़ को देखे बिना हम कोई तय रकम नहीं बताते। परामर्श और रिपोर्ट के बाद, भर्ती से पहले हम साफ़ लिखित अनुमान देते हैं।
कभी कभी। जांच में जो छोटी गांठ साधारण निकले, उस पर सिर्फ़ नज़र रखी जा सकती है, और संक्रमण से सूजी गिल्टी दवा से ठीक हो सकती है। लेकिन मलहम, मालिश, सेंक या घरेलू नुस्खों से ट्यूमर नहीं गलता, और अगर गांठ कैंसर की हो तो कीमती समय निकल जाता है। कृपया पहले गांठ की जांच कराएं। फिर हमारे डॉक्टर ईमानदारी से बताएंगे कि उसे निकालना है, कोई और इलाज चाहिए, या सिर्फ़ नियमित जांच काफ़ी है।
डॉ. (एक्स कैप्टन) फ़िरोज़ पाशा, सीनियर कंसल्टेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, हर महीने के पहले शनिवार को हमारी ऑन्कोलॉजी ओपीडी में मरीज़ देखते हैं। तारीख पक्की करने और नाम लिखवाने के लिए कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सएप करें। अपनी पुरानी सारी रिपोर्ट, स्कैन, बायोप्सी की स्लाइड या ब्लॉक (अगर हों) और चल रही दवाओं की सूची साथ लाएं।
हमारी सलाह है कि डॉक्टर को दावों से नहीं, उनकी पढ़ाई और अनुभव से चुनें। डॉ. (एक्स कैप्टन) फ़िरोज़ पाशा (MBBS, MS जनरल सर्जरी) को 16+ साल का अनुभव है, और वे अपोलो हॉस्पिटल्स, नई दिल्ली में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट हैं। वे हमारे संस्थापक और मुख्य सर्जन डॉ. रजनीश कुमार ठाकुर (16+ साल, 10,000+ ऑपरेशन) की सर्जिकल टीम के साथ काम करते हैं। नवंबर 2022 में हमारी टीम ने एक युवती के पेट से लगभग 10 किलो की गांठ निकाली थी, जिसकी खबर स्थानीय मीडिया में आई थी।
हां। सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया, कुशीनगर और देवरिया से बहुत से परिवार इसके लिए गोपालगंज में हमारे पास आते हैं। कृपया पहले अपनी रिपोर्ट +91 72739 94786 पर व्हाट्सएप करें, फिर महीने के पहले शनिवार को हमारी कैंसर ओपीडी में आएं। जांच, एफएनएसी या बायोप्सी और ज़्यादातर फॉलो-अप हम यहीं कर सकते हैं। अगर रेडियोथेरेपी या कोई ऐसा इलाज चाहिए जो सिर्फ़ बड़े सेंटर पर होता है, तो हम वहां के लिए तालमेल करते हैं।
आयुष्मान भारत PM-JAY में कवरेज योजना के नियमों और आपकी बीमारी पर निर्भर करता है। अगर आपके पास कार्ड है, तो कृपया उसे आधार कार्ड के साथ लाएं और हमारे आयुष्मान सहायता केंद्र से पूछें कि आपका इलाज कवर होता है या नहीं। बाकी मरीज़ों को हम भर्ती से पहले अनुमानित खर्च साफ़ साफ़ बता देते हैं, ताकि परिवार पहले से तैयारी कर सके।
अपनी जानकारी भेजें, हमारी टीम आपको कॉल करके समय तय करेगी।
यह जानकारी सिर्फ़ जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं। इलाज हर मरीज़ की हालत देखकर तय होता है।
आखिरी बार अपडेट: 30 सितंबर 2026
मरीज़ों और उनके परिवार के असली रिव्यू, जैसे उन्होंने हमारे गूगल बिज़नेस प्रोफ़ाइल पर लिखे हैं।
I Recently Visited this Clinic in Gopalganj, Earlier I was a bit Hesitant, But Once I met the Doctor, I was so Sure & Confident that I am in Good Hands,
Very Well Experienced Doctor
Well Behaved Staffs
Nice Arrangements
& Most Important, Very Easy Procedure.
Would Always be Thankful to Mr. RK Thakur & His Team.हाल ही में मैं गोपालगंज के इस क्लिनिक में आया। पहले थोड़ा झिझक रहा था, लेकिन डॉक्टर से मिलते ही मुझे पूरा भरोसा हो गया कि मैं सही हाथों में हूं। बहुत अनुभवी डॉक्टर, अच्छे व्यवहार वाला स्टाफ़, अच्छी व्यवस्था, और सबसे ज़रूरी, बहुत आसान प्रक्रिया। मैं श्री आर. के. ठाकुर और उनकी टीम का हमेशा आभारी रहूंगा।
My relative hernia surgery at Dr RK Thakur Hospital Went Very Well, Skilled Doctors, Caring Staff and Smooth recovery, Highly Satisfied.मेरे रिश्तेदार का हर्निया का ऑपरेशन डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल में बहुत अच्छे से हुआ। कुशल डॉक्टर, देखभाल करने वाला स्टाफ़ और आसानी से रिकवरी। हम बहुत संतुष्ट हैं।
डाक्टर साहब बहुत अच्छे है उनका बात करने का अंदाज बहुत ही निराला है स्टाफ के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता बाकी हॉस्पिटल अच्छा हैअपना नाम और फ़ोन नंबर दें। हमारी टीम आपको कॉल करके ओपीडी का समय तय करेगी।