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अपना नाम और फ़ोन नंबर दें। हमारी टीम आपको कॉल करके ओपीडी का समय तय करेगी।
हमारी पैथोलॉजी लैब में खून, पेशाब और ऑपरेशन से पहले की जांच होती है, जैसे शुगर, थायराइड, लिवर और किडनी की जांच। बायोप्सी हम हिस्टोपैथोलॉजी जांच के लिए भेजते हैं।
गोपालगंज में पैथोलॉजी जांच हमारे डॉ. आर. के. ठाकुर हॉस्पिटल की लैब में होती है, जहां हम ओपीडी, वार्ड, आईसीयू और 24 घंटे इमरजेंसी के मरीज़ों के खून और पेशाब की जांच करते हैं। अगर आपको गोपालगंज में खून की जांच करानी है, जैसे शुगर और थायराइड की जांच या लिवर और किडनी की जांच, या आप ऑपरेशन वाले मरीज़ हैं जिन्हें ऑपरेशन से पहले की जांच करानी है, तो यह जांच हम यहीं करते हैं। बायोप्सी और निकाले गए हिस्से हम विशेष हिस्टोपैथोलॉजी लैब में भेजते हैं, और यह पूरी प्रक्रिया आपको समझाते हैं। गोपालगंज ज़िले के साथ सीवान, छपरा, मोतिहारी, बेतिया और पास के उत्तर प्रदेश से परिवार हमारे पास आते हैं, और लैब, एक्स-रे, ईसीजी और सर्जन एक ही अस्पताल में होने से उनके चक्कर बचते हैं। आने से पहले कृपया खाली पेट की सलाह देख लें: खाली पेट शुगर और कुछ जांचों के लिए 8 से 10 घंटे कुछ न खाएं। डॉक्टर की पर्ची और पुरानी रिपोर्ट एक फाइल में लाएं। सवाल हो तो कृपया +91 72739 94786 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें।
ज़्यादातर इलाज का फैसला किसी जांच से शुरू होता है। हमारी पैथोलॉजी लैब में ओपीडी, वार्ड, आईसीयू और इमरजेंसी के मरीज़ों के खून और पेशाब के सैंपल की जांच होती है, ताकि हमारे डॉक्टर जल्दी फैसला ले सकें।
आम जांचें हैं: खून की पूरी जांच (सीबीसी), जिससे हीमोग्लोबिन और संक्रमण का पता चलता है, ब्लड शुगर (खाली पेट, खाने के बाद और कभी भी), थायराइड की जांच, लिवर की जांच (एलएफटी), किडनी की जांच (केएफटी, यूरिया और क्रिएटिनिन सहित), ब्लड ग्रुप, और पेशाब की सामान्य जांच। ऑपरेशन से पहले हम प्री-ऑपरेटिव जांच करते हैं, ताकि ऑपरेशन और बेहोशी सुरक्षित रहें। इसमें आम तौर पर खून की जांच, शुगर, किडनी की जांच, ब्लड ग्रुप और डॉक्टर की सलाह के अनुसार हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एचआईवी जैसे संक्रमण की जांच होती है।
बायोप्सी और हिस्टोपैथोलॉजी: जब कोई गांठ, पित्त की थैली, अपेंडिक्स, प्रोस्टेट का टुकड़ा या दूसरा हिस्सा निकाला जाता है, या एंडोस्कोपी में बायोप्सी ली जाती है, तो हम उसे माइक्रोस्कोप से जांच के लिए अस्पताल के बाहर की एक विशेष हिस्टोपैथोलॉजी लैब में भेजते हैं। इसी जांच से पक्की बीमारी का पता चलता है, यह भी कि कैंसर है या नहीं। रिपोर्ट आने पर आपके डॉक्टर उसे समझाते हैं।
जांच से पहले:
कृपया अपनी सारी रिपोर्ट एक फाइल में संभालकर रखें और हर बार साथ लाएं।


लैब हमारे अस्पताल के अंदर होने से सैंपल वहीं लिया जाता है जहां आपका इलाज हो रहा है, और नतीजे सीधे डॉक्टर तक पहुंचते हैं। आपको सैंपल या रिपोर्ट लेकर शहर में इधर उधर नहीं जाना पड़ता। ऑपरेशन वाले मरीज़ों के लिए हम ऑपरेशन से पहले की जांच, ईसीजी, एक्स-रे और बेहोशी की जांच एक साथ तय कर सकते हैं, जिससे गांव से आने वाले परिवारों का समय बचता है। हम साफ़ बताते हैं कि हमारी लैब में क्या जांच होती है: बायोप्सी और निकाले गए हिस्से की हिस्टोपैथोलॉजी बाहर की विशेष लैब में होती है, और उसकी रिपोर्ट आपके डॉक्टर समझाते हैं।
केवल कुछ जांचों के लिए। खाली पेट शुगर और कुछ दूसरी जांचों में 8 से 10 घंटे बिना खाए रहना होता है, सादा पानी पी सकते हैं। खून की पूरी जांच, थायराइड और कई दूसरी जांचों में खाली पेट ज़रूरी नहीं, इसलिए कृपया जांच करवाने से पहले हमसे पूछ लें। शुगर के मरीज़ अपने डॉक्टर से पूछें कि जांच के दिन शुगर की दवा या इंसुलिन कैसे लें, और सैंपल के बाद खाने के लिए कुछ साथ लाएं।
ऑपरेशन से पहले की जांच से पता चलता है कि शरीर ऑपरेशन और बेहोशी के लिए तैयार है या नहीं। इसमें आम तौर पर खून की जांच, ब्लड शुगर, किडनी की जांच, ब्लड ग्रुप, पेशाब की जांच और हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एचआईवी जैसे संक्रमण की जांच होती है। उम्र और सेहत के हिसाब से ईसीजी, छाती का एक्स-रे, लिवर या थायराइड की जांच भी जोड़ी जा सकती है। हर मरीज़ की सही सूची हमारे सर्जन और बेहोशी के डॉक्टर तय करते हैं।
बायोप्सी का सैंपल, या ऑपरेशन में निकाला गया हिस्सा, हम अपने अस्पताल में ही लेते हैं। फिर हम उसे एक विशेष हिस्टोपैथोलॉजी लैब भेजते हैं, जहां माइक्रोस्कोप से उसकी जांच होती है। इसी जांच से पक्की बीमारी का पता चलता है, यह भी कि गांठ कैंसर है या नहीं। रिपोर्ट आने में आम तौर पर कुछ दिन लगते हैं। रिपोर्ट आने पर आपके डॉक्टर उसे समझाते हैं और बताते हैं कि आगे इलाज की ज़रूरत है या नहीं।
पुरानी रिपोर्ट से पता चलता है कि समय के साथ आपकी सेहत कैसे बदली है। शुगर, हीमोग्लोबिन या किडनी की एक जांच काम की है, लेकिन पहले की रिपोर्ट से तुलना करने पर डॉक्टर को कहीं ज़्यादा जानकारी मिलती है। कृपया सारी रिपोर्ट, पर्चियां और डिस्चार्ज पेपर एक फाइल में रखें और हर बार साथ लाएं, दूसरे डॉक्टर के पास जाते समय भी। इससे बिना ज़रूरत की जांच दोबारा करवाने से भी बचते हैं।
आम जांचें हैं: खून की पूरी जांच (सीबीसी), ब्लड शुगर (खाली पेट, खाने के बाद और कभी भी), थायराइड, लिवर की जांच (एलएफटी), किडनी की जांच (केएफटी, यूरिया और क्रिएटिनिन सहित), ब्लड ग्रुप और पेशाब की सामान्य जांच, साथ में डॉक्टर की सलाह पर ऑपरेशन से पहले की जांच और संक्रमण की जांच। बायोप्सी और निकाले गए हिस्से हम विशेष हिस्टोपैथोलॉजी लैब भेजते हैं। कोई जांच हमारे यहां न होती हो तो हमारा स्टाफ बताता है कि सैंपल कहां जाएगा।
खून की पूरी जांच (सीबीसी) से हीमोग्लोबिन पता चलता है, जो खून की कमी में कम होता है, और सफेद कोशिकाओं की गिनती भी, जो अक्सर संक्रमण में बढ़ती है। लक्षण देखकर आपके डॉक्टर शुगर, थायराइड, लिवर या किडनी की जांच और पेशाब की जांच भी लिख सकते हैं। बुखार में किस संक्रमण की जांच करनी है, यह डॉक्टर तय करते हैं। कृपया रिपोर्ट हमेशा डॉक्टर को दिखाएं, खुद से इलाज न करें।
अक्सर हां। हमारे सर्जन के ऑपरेशन की सलाह देने के बाद, ऑपरेशन से पहले की जांच का सैंपल आम तौर पर उसी दिन हमारी लैब में दिया जा सकता है, ज़रूरत हो तो ईसीजी और एक्स-रे भी। ऑपरेशन से पहले हमारे बेहोशी के डॉक्टर रिपोर्ट देखते हैं। खाली पेट शुगर जैसी कुछ जांचों के लिए खाली पेट आना होता है, इसलिए कृपया हमारे स्टाफ से पूछ लें। इससे गांव से आने वाले परिवारों का एक चक्कर बचता है।
यह आपकी बीमारी और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर है। शुगर के बहुत से मरीज़ खाली पेट और खाने के बाद की शुगर नियमित जांचते हैं, और डॉक्टर की सलाह हो तो एचबीए1सी जांच, जो लगभग 3 महीने की औसत शुगर बताती है, कुछ महीनों में दोहराई जाती है। थायराइड की गोली की खुराक बदलने के कुछ हफ्ते बाद और फिर डॉक्टर के बताए समय पर थायराइड जांच होती है। कृपया एक रिपोर्ट देखकर अपने मन से दवा न बदलें।
खर्च इस पर निर्भर करता है कि डॉक्टर ने कौन सी और कितनी जांच लिखी है। एक शुगर जांच का खर्च ऑपरेशन से पहले की पूरी जांच से कम होता है, और बायोप्सी की हिस्टोपैथोलॉजी का खर्च बाहर की वह लैब लेती है जो उसकी जांच करती है। सैंपल लेने से पहले हमारा स्टाफ खर्च बता देता है। कृपया पुरानी रिपोर्ट साथ लाएं, हाल की रिपोर्ट से कभी कभी बेवजह दोबारा जांच की ज़रूरत नहीं पड़ती।
हमारी आयुष्मान भारत (पीएम-जेएवाई) सूची में जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के पैकेज शामिल हैं। योजना मुख्य रूप से भर्ती का खर्च देती है, इसलिए ओपीडी की खून की जांच आम तौर पर अलग से कवर नहीं होती। किसी कवर वाले ऑपरेशन के लिए भर्ती होने पर उससे जुड़ी जांचें आम तौर पर पैकेज में शामिल होती हैं। मध्य 2025 तक स्त्री रोग और यूरोलॉजी के पैकेज हमारी सूची में नहीं थे। कृपया हमारे सहायता केंद्र से पुष्टि करें।
अपनी जानकारी भेजें, हमारी टीम आपको कॉल करके समय तय करेगी।
यह जानकारी सिर्फ़ जागरूकता के लिए है, डॉक्टर की सलाह की जगह नहीं। इलाज हर मरीज़ की हालत देखकर तय होता है।
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